Entertainment: रिव्यू: ‘द व्हील ऑफ फॉर्च्यून इंडिया’- क्या अक्षय कुमार का ‘जादुई चक्का’ दर्शकों की किस्मत बदल पाएगा? – #iNA

Wheel of Fortune India Review: बॉलीवुड के ‘असली खिलाड़ी’ अक्षय कुमार एक बार फिर छोटे पर्दे पर अपनी धाक जमाने लौट आए हैं. सोनी टीवी और सोनी लिव पर शुरू हुआ नया रियलिटी शो ‘व्हील ऑफ फॉर्च्यून इंडिया’ इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है. 1975 से अमेरिका में राज कर रहे इस कल्ट गेम शो को अब भारतीय तड़के के साथ पेश किया गया है. लेकिन क्या ये शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ जैसी लोकप्रियता हासिल कर पाएगा? या फिर सिर्फ अक्षय की कॉमेडी के सहारे ही टिकेगा? आइए इस बारे में विस्तार से चर्चा करते हैं.
अक्षय कुमार की वापसी
अक्षय कुमार का बेमिसाल ‘होस्ट’ अवतार अक्षय कुमार टीवी के लिए नए नहीं हैं, लेकिन ‘खतरों के खिलाड़ी’ के सख्त होस्ट और ‘मास्टरशेफ’ के जज के बाद, ‘व्हील ऑफ फॉर्च्यून इंडिया’ में उनका एक अलग ही रूप दिख रहा है. उनकी कॉमिक टाइमिंग, हाजिरजवाबी और आम आदमी (कॉन्टेस्टेंट्स) के साथ घुलने-मिलने का अंदाज शो की सबसे बड़ी जान है. पहले एपिसोड में रितेश देशमुख और जेनेलिया के साथ उनकी मस्ती ने साबित कर दिया कि ‘अक्की’ आज भी मनोरंजन के बादशाह हैं.
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लक्की ड्रा से अलग है ये शो
ये रियलिटी शो महज एक ‘लकी ड्रॉ’ शो नहीं है. यहां वर्ड पजल और दिमाग का इस्तेमाल भी जरूरी है. ‘अक्षरों के खेल’ में छिपे हुए मुहावरों और नामों को पहचानना दर्शकों को भी टीवी के सामने बैठकर सोचने पर मजबूर करता है. इसका ‘प्ले अलॉन्ग’ फैक्टर इसे काफी एंगेजिंग बनाता है.
हाई-स्टेक्स और सस्पेंस
अक्षय कुमार के इस शो में जीतने की राशि 1 करोड़ रुपये तक रखी गई है, जो किसी भी गेम शो के लिए बड़ी बात है. हर स्पिन के साथ जो टेंशन होती है कि सुई ‘बैंकरप्ट’ (बैंकरप्ट) पर रुकेगी या ‘बोनस’ पर, यही ट्रिक दर्शकों को बांधे रखती है. साथ ही ‘सांप वाला ट्विस्ट’ गेम में एक अलग ही रोमांच पैदा करता है.
देसी अंदाज
भले ही ये एक अमेरिकी फॉर्मेट है, लेकिन मेकर्स ने इसे पूरी तरह ‘देसी’ रंग में रंगा है. हिंदी, अंग्रेजी और ‘हिंग्लिश’ की पहेलियां इसे हर वर्ग के दर्शकों के लिए सुलभ बनाती हैं. हमारे देश के मुहावरे और बॉलीवुड से जुड़ी पहेलियां इसे ग्लोबल से लोकल बनाती हैं.
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फैमिली-फ्रेंडली कंटेंट
आजकल के शोर-शराबे वाले रियलिटी शोज के बीच ‘व्हील ऑफ फॉर्च्यून’ एक क्लीन फैमिली शो है. इसे आप घर के बच्चों और बुजुर्गों के साथ बैठकर देख सकते हैं. इसमें कोई फिजूल का ड्रामा या बनावटी इमोशन्स नहीं है, बस शुद्ध खेल और मनोरंजन है.
इस शो की वो 5 बातें जो खटकती हैं-
1. थोड़ा धीमा पेस
इंटरनेशनल वर्जन की तुलना में भारतीय वर्जन कभी-कभी खिंचा हुआ लगता है. अक्षय की बातचीत मजेदार है, लेकिन पहेलियों के बीच में होने वाले लंबे ब्रेक और बातचीत गेम की रफ्तार को कम कर देते हैं. गेम शो में जितनी ज्यादा तेजी हो, उतना ही मजा आता है.
2. ओवर-द-टॉप साउंड और ग्राफिक्स
सोनी टीवी के अन्य शोज की तरह, इसमें भी कभी-कभी बैकग्राउंड म्यूजिक और साउंड इफेक्ट्स जरूरत से ज्यादा लाउड लगते हैं. हर छोटी बात पर ड्रामैटिक म्यूजिक कभी-कभी खेल के ओरिजिनल रोमांच को दबा देता है.
3. KBC से तुलना का बोझ
भारत में जब भी कोई बड़ा इनाम वाला गेम शो आता है, उसकी तुलना ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (केबीसी) और बिग बॉस से होना लाजमी है. ‘व्हील ऑफ फॉर्च्यून’ का फॉर्मेट थोड़ा लाइट हार्टेड है, इसलिए जो लोग केबीसी जैसी गंभीरता या ज्ञान की उम्मीद कर रहे हैं, या फिर बिग बॉस जैसे कंट्रोवर्सी की उन्हें इस शो से जुड़ने में थोड़ा समय लग सकता है.
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4. पहेलियों का स्तर
शुरुआती एपिसोड्स में देखा गया कि कुछ पहेलियां बहुत आसान थीं, जिन्हें कोई भी बच्चा सुलझा ले. एक ‘प्राइम टाइम’ शो के लिए पहेलियों का लेवल थोड़ा और चुनौतीपूर्ण होना चाहिए ताकि दर्शक को जीतने वाले की काबिलियत पर गर्व महसूस हो.
5. विजुअल डिजाइन में नयेपन की कमी
अक्षय कुमार के शो का सेट भव्य है, लेकिन वो काफी हद तक पुराने गेम शोज की याद दिलाता है. 2026 के हिसाब से इसमें कुछ और आधुनिक टेक्नोलॉजी या ‘ऑगमेंटेड रियलिटी’ (AR) का इस्तेमाल किया जा सकता था, जो इसे विजुअली और ज्यादा आकर्षक बनाता.
कुल मिलाकर ‘व्हील ऑफ फॉर्च्यून इंडिया’ एक रिफ्रेशिंग शो है जो अक्षय कुमार की एनर्जी पर टिका है. अगर आप भारी-भरकम ज्ञान के बजाय मस्ती और हल्की-फुल्की पहेलियों के शौकीन हैं, तो यह शो आपके लिए परफेक्ट वॉच है. हालांकि, इसे अपनी पहचान बनाने के लिए गेमप्ले में थोड़ी और रफ्तार लानी होगी.
रिव्यू: ‘द व्हील ऑफ फॉर्च्यून इंडिया’- क्या अक्षय कुमार का ‘जादुई चक्का’ दर्शकों की किस्मत बदल पाएगा?
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