Entertainment: शरीर से निकल गई थी रूह, Shaktimaan की गीता विश्वास का बड़ा दावा- कुछ देर तक मैं बाहर थी और फिर… – #iNA

Vaishnavi Macdonald: वैष्णवी मैकडोनाल्ड को सबसे ज्यादा फेम सुपरहीरो वाले टीवी सीरियल शक्तिमान से मिला था. इतने सालों के बाद भी लोग उन्हें गीता विश्वास के नाम से ही जानते हैं. मुकेश खन्ना स्टारर शक्तिमान में उन्होंने गीता विश्वास का किरदार निभाया था. अब वही वैष्णवी इन दिनों खूब चर्चा में हैं. उन्होंने एक इंटरव्यू दिया है, जिसमें उन्होंने अपने सुपरनैचुलर अनुभवों के बारे में बड़े दावे किए हैं. उन्होंने भूत-प्रेत और आत्माओं के दावों के साथ साथ एक ऐसा दावा भी किया, जिसपर शायद ही उनके फैंस को यकीन होगा.
हाल ही में वैष्णवी मैकडोनाल्ड ने सिद्धार्थ कन्नन को एक इंटरव्यू दिया. इस दौरान उन्होंने ऐसे-ऐसे दावे किए कि कोई भी हैरान रह जाए. इनमें सबसे बड़ा दावा तो ये था कि एक बार उनकी रूह यानी आत्मा उनके शरीर से बाहर आ गई थी. जी हां, ये दावा खुद वैष्णवी ने किया. उन्होंने पूरा वाकया भी बताया कि ये कब और कैसे हुआ था.
जब शरीर से बाहर आ गई आत्मा
वैष्णवी मैकडोनाल्ड आत्माओं के बारे में बात कर रही थीं, उसी दौरान उन्होंने बताया, “इससे मुझे एक और चीज़ याद आ गई. मैं बता दूं कि मैं अपने शरीर से बाहर आ चुकी हूं. ये बस कुछ सेकेंड के लिए हुआ था. 14 साल की उम्र में, मैंने अपने शरीर को जमीन पर लेटे हुए देखा. उस वक्त मुझे यकीन हो गया था कि हम रूह हैं. उससे पहले बहुत सारे सवाल थे कि क्या सच में हम लोग आत्मा हैं कि नहीं…साइंस में मेरी बहुत रुचि थी. आज तो साइंस भी मानता है कि पैरा साइंस है. उन दिनों में साइंटिस्ट बोलते थे कि कोई गॉड नहीं है. आप बस एक एटम हो, मरने के बाद आपका कोई वजूद नहीं है. ऐसी एक सोच थी उस वक्त. मैं तब की बात कर रही हूं, जब मैं छोटी थी. पर वो धीरे धीरे बदलता गया.”
कैसे शरीर से निकली रूह?
वैष्णवी ने बताया कि बचपन में उनके पिता काफी एक्सरसाइज करावाया करते थे. वो बताती हैं कि वो शवासन भी करती थीं. इसमें वो शरीर को लूज़ (ढीला) छोड़ देती थीं. पर सोती नहीं थी, दिमाग जागा रहता था. वो बताती हैं, “मैं अपने शरीर को लूज लूज लूज छोड़ती गई. एक दिन मैं बाहर आ गई. मैंने अपने आप को यहां देखा. कमरे को देखा. मुझे आज भी याद है वहां मैदान में एक फंक्शन चल रहा था. मैंने वो भी देखा…और मैं अपने पैरों के पास खड़ी हूं अपने बॉडी के, और मैं देख रही हूं और मैं बोल रही हूं, ये कौन है? ये इधर हूं, तो फिर मैं इधर कैसे हूं? सच में. जैसे फिल्मों में दिखाते हैं, कैसे इंसान शरीर से बाहर निकलकर खड़ा हो जाता है. मैं खुद को देख रही थी. फिर मैं, वापस आ गई (शरीर में).”
शरीर से निकल गई थी रूह, Shaktimaan की गीता विश्वास का बड़ा दावा- कुछ देर तक मैं बाहर थी और फिर…
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