Entertainment: नाइट क्लब से हुई थी शुरुआत, लुक और आवाज से बनाई अलग पहचान फिर बनीं क्वीन ऑफ पॉप – #iNA

भारतीय संगीत की अद्वितीय आवाज और स्टाइल आइकन उषा उत्थुप का नाम जब भी पॉप एन्टरटेनमेंट या फ़िल्मी गीतों की चर्चा में आता है, एक अलग ही चमक लिए सामने आती है. 7 नवंबर 1947 को तमिलनाडु के मद्रास में जन्मीं उषा ने एक नाइट क्लब से शुरू किया था, लेकिन अपनी आवाज के जरिए उन्होंने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. बाद में उन्होंने बॉलीवुड में पॉप सिंगर के तौर पर अपनी खास जगह बना ली.
20 साल की उम्र में उषा उत्थुप ने अपनी गायिकी की शुरुआत चेन्नई के माउंट रोड स्थित एक छोटे नाइट क्लब “नाइन जेम्स” में की थी. साड़ी और लेग-कैलिपर पहने वो क्लब-मंच पर जितनी सहज थीं, उतना ही उनके रवैये में एक अरमान भी था. तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि वही लड़की बॉलीवुड की उस पॉप आइकन में बदल जाएगी जिस पर आज भी लोग तारीफ करते हैं. उषा उत्थुप की सबसे खास बात सिर्फ उनकी आवाज नहीं थी, बल्कि उनका लुक भी था.
पॉप कल्चर का हिस्सा
कांजीवरम साड़ी, बड़ी गोल बिंदी, फूलों से सजे बाल-गजरे और मंच पर आत्मविश्वास से भरी बॉडी लैंग्वेज ने उनके व्यक्तित्व को और भी अलग बनाया. ऐसे अवतार ने उन्हें आज पॉप कल्चर का हिस्सा बना दिया है. उनकी आवाज में वो जान थी, जो सुनते ही दिल को छू जाती थी, वहीं उनका स्टाइल दर्शकों को स्क्रीन-मंच दोनों पर मोहित कर देता था. उषा ने शुरुआती दौर में बॉलीवुड में कदम रखा था जब उन्होंने फिल्म “बॉम्बे टॉकीज” में अंग्रेजी गाना गाया था.
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दिए कई कमाल के गाने
70-80 के दशक में उन्होंने आर डी बर्मन, बप्पी लहरी जैसे कमाल के सिंगर और म्यूजिक कंपोजर के साथ काम किया और कुछ यादगार गाने दिए. जिसमे “एक दो चा चा चा“, “शान से”, “तू मुझे जान से भी प्यारा है”, “कोई यहां आहा नाचे नाचे” जैसे गानों के नाम शामिल हैं. इन गानों ने उन्हें सिर्फ आवाज नहीं दी बल्कि पहचान भी दिलाई. उषा उत्थुप के करियर में विविधता की कमी नहीं थी. हिन्दी के अलावा उन्होंने मलयालम, तेलुगु जैसी 18 भाषाओं में गाना गाया है.
नाइट क्लब से हुई थी शुरुआत, लुक और आवाज से बनाई अलग पहचान फिर बनीं क्वीन ऑफ पॉप
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