Entertainment: Stree-Bhediya Vs Thamma: जो ‘स्त्री’ और ‘भेड़िया’ में देखने को मिला, वो ‘थामा’ में क्यों नहीं दिखा? डायरेक्टर बोले- जरूरी नहीं… – #iNA

Stree-Bhediya Vs Thamma: हॉरर-कॉमेडी यूनिवर्स की ‘थामा’ बॉक्स ऑफिस पर छाई हुई है. फिल्ममेकर अमर कौशिश की ‘थामा’ में आयुष्मान खुराना और रश्मिका मंदाना लीड रोल में हैं. हॉरर-कॉमेडी यूनिवर्स में ये दोनों सितारे पहली बार शामिल हुए हैं. लेकिन जो एक बात ‘स्त्री’ और ‘भेड़िया’ में थी, वो बात ‘थामा’ में मिसिंग हैं. हाल ही में अमर कौशिश से ‘थामा’ को लेकर कई सवाल पूछे गए, जिनके जवाब डायरेक्टर ने खुलकर दिए.

इंटरव्यू के दौरान अमर कौशिश से पूछा गया कि आप मैडॉक सिनेमैटिक यूनिवर्स के कैरेक्टर्स को किस तरह आगे ले जाना चाहते हैं? इस सावल का जवाब देते हुए डायरेक्टर ने कहा, “जब हम इस फिल्म जगत की परिकल्पना कर रहे थे, तब हमने कभी सितारों के बारे में नहीं सोचा था. सितारे यूनिवर्स का निर्माण नहीं करते. सितारे यूनिवर्स का एक हिस्सा हैं. प्रकृति ऐसी ही है.”

‘थामा’ क्यों नहीं दिखा कोई मैसेज?

अमर कौशिक ने आगे कहा, “हम इसी पर चल रहे हैं. हमारा मैन फोकस हमेशा कहानी और उसे आगे बढ़ाने के तरीके पर रहा है. हमने यूनिवर्स के कैरेक्टर्स को आपस में जोड़ने और हर अगली फ़िल्म को बड़ा बनाने पर काम किया है. हमारा ध्यान कभी सितारों पर नहीं रहा. हमारी फ़िल्म जगत की आत्मा एक गहरी देसी कहानी है.” डायरेक्टर से ‘स्त्री’ और ‘भेड़िया’ में दिखाई गए सोशल मैसेज को लेकर पूछा गया कि ‘थामा’ में कोई सोशल मैसेज क्यों नहीं दिखा?

फिल्ममेकर ने जवाब दिया, “हमने कभी नहीं कहा कि हम हर फिल्म में कोई मैसेज देना चाहते हैं. लेकिन अगर आप गौर करें तो पाएंगे कि हमने यह कारण ज़रूर बताया है कि बेताल कभी खून क्यों नहीं पीते. बेताल कहते हैं कि इंसान एक-दूसरे को मार रहे हैं और उनका खून अब शुद्ध नहीं रहा. बेताल शुद्ध खून चाहते हैं. आप इसे एक मैसेज के तौर पर या फिर सिर्फ़ मनोरंजन के तौर पर ले सकते हैं. हर मैसेज में संदेश डालना ज़रूरी नहीं है.”

क्या है अमर कौशिक की पहली पसंद?

अमर कौशिक ने ये भी बताया कि वह निर्देशक या निर्माता में से किस भूमिका को ज्यादा पसंद करते हैं. उन्होंने कहा, ज़ाहिर है, मुझे डायरेक्टर के तौर पर अमर कौशिक ज़्यादा पसंद हैं क्योंकि मुझे कहानियां सुनाना पसंद है. शुरुआत में मुझे लगता था कि निर्माता का काम कुछ और होता है. लेकिन जल्द ही मुझे इसकी अहमियत समझ आ गई. एक निर्माता फिल्म बनाने में भी मज़ा ले सकता है. उसका काम सिर्फ फिल्म निर्माण के लिए पैसे का इंतज़ाम करने तक सीमित नहीं है. जब भी मेरे निर्देशकों को मेरी ज़रूरत होती है, मैं उनके साथ फिल्म निर्माण में हमेशा शामिल रहता हूं.

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