Entertainment: WAVES यानी भारतीय सिनेमा का ग्लोबल गेटवे… क्या है कांसेप्ट, समझें पूरा प्लान – #iNA

भारतीय सिनेमा जगत ग्रेट शोमैन राज कपूर के जमाने से ही ग्लोबल है. राज कपूर की फिल्में पूर्व सोवियत संघ से लेकर चीन और पूरे एशियाई देशों में काफी लोकप्रिय रही हैं. राज कपूर के पहले लंदन से लेकर पेरिस तक देविका रानी और हिमांशु रॉय जैसी फिल्म हस्तियों की पर्सनाल्टी का दबदबा रहा है. वहीं सत्तर और अस्सी के दशक में जब भारतीय सिनेमा अमिताभ बच्चन, मिथुन चक्रवर्ती, रजनीकांत, शाहरुख खान, सलमान खान, ऋतिक रोशन, प्रियंका चोपड़ा जैसे सितारों के दौर से गुजरता है तो वह पहले से भी अधिक इंटरनेशनल हो जाता है. दुनिया का कोई भी ऐसा मुल्क नहीं जहां भारतीय कला और मनोरंजन जगत की उपलब्धियों की पहुंच और प्रसिद्धि ना देखने को मिली हो. इस लिहाज से वेव्स समिट अहम है जो क्रिएटर्स को विधिवत तरीके से एक मंच प्रदान करता है. नई पीढ़ी के कलाकारों में सकारात्मक उत्साह बढ़ाता है.
हाल के सालों में इंडियन एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का ग्लोबल प्रभाव और भी तेजी से बढ़ा है. यह देखा गया है कि हॉलीवुड, कोरिया, चीनी, ईरानी या रसियन सिनेमा की तरह भारतीय सिनेमा भी अब पूरे ग्लोबल स्टैंडर्ड के साथ आ रहा है. इस तकनीक में दक्षिण भारत का सिनेमा तो बॉलीवुड से भी एक कदम आगे निकल चुका है, जो सीधे हॉलीवुड से मुकाबला कर रहा है. गुरुवार को वेव्स समिट में एक बातचीत में पुष्पा एक्टर अल्लू अर्जुन ने यह कहा भी कि हम दुनिया के प्लेटफॉर्म पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. यानी वेव्स समिट भारतीय सिनेमा का ग्लोबल गेटवे बनने वाला है.
बॉलीवुड को संकट से उबरना है
गौरतलब है कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री इन दिनों आर्थिक संकट से भी गुजर रही है. पूरे साल में पांच सौ से ज्यादा फिल्में तो बन रही हैं लेकिन गिनती की ही ऐसी फिल्में हैं जो बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर हो पा रही हैं. ज्यादातर फिल्मों का बॉक्स ऑफिस पर प्रदर्शन खराब देखा जा रहा है. ऐसे में WAVES का मकसद निराशा के इस माहौल को दूर करना और सिनेमा संस्कृति को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है. सम्मेलन में फिल्म जगत के तमाम दिग्गजों में अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, दीपिका पादुकोण, रणबीर कपूर, आलिया भट्ट, आमिर खान आदि जुटे और इस पहल की सबसे अपने अपने शब्दों में सराहना की. तय ये भी किया गया कि भविष्य में WAVES पुरस्कार शुरू किए जाएंगे.
भारत को ग्लोबल पावर बनाना है
वास्तव में WAVES समिट का मकसद क्रिएटीविटी को प्रोत्साहित करना और डिजिटल कंटेंट के साथ भारत को ग्लोबल पावर रूप में स्थापित करना है. भारतीय सिनेमा हमेशा से पूरी दुनिया में भरपूर मनोरंजन प्रदान करता रहा है. आज की तारीख में अमेरिका में भारतीय फिल्में धूम मचाती हैं. हिंदी फिल्मों का कैसा प्रभाव है, उसे इसी बात से समझा जा सकता है कि पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा जब भारत आए तो उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत शाहरुख खान की लोकप्रिय फिल्म दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे से की. उन्होंने कहा- बड़े बड़े देशों में… दुनिया के सबसे शक्ति राष्ट्र के शक्तिशाली राष्ट्रपति की जुबान पर हिंदी फिल्म का डायलॉग था. मिथुन चक्रवर्ती की फिल्म डिस्को डांसर रूस से लेकर चीन तक ब्लॉकबस्टर रही है.
सम्मेलन का मकसद भारतीय कला और मनोरंजन को रेखांकित करना और उसे वैश्विक फलक पर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना है. सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया गया है कि भारत पौराणिक काल में भी दुनिया में अग्रणी था और आज जिस तरह से दुनिया के मंच पर भारत के हर क्षेत्र की प्रसिद्धि तेजी से बढ़ रही है, सिनेमा जगत को भी उसका लाभ उठाना चाहिए.
भारतीय फिल्मी हस्तियों का ग्लोबल प्रभाव
आज की तारीख में भारत दुनिया के मंच पर एक ऐसा देश बन कर उभर रहा है, जिसकी केवल इकॉनोमी की चर्चा ही शुमार नहीं है बल्कि ब्रॉडकास्टिंग, फिल्म, डिजीटल मीडिया, इन्फोटेनमेंट जैसे अनेक क्षेत्रों में तेजी से विस्तार कर रहा है. गुरु दत्त की सिनेमाई कविता, सत्यजीत रे और आरआरआर को ऑस्कर, ऋत्विक घटक के सामाजिक सरोकार वाली फिल्में, एआर रहमान का संगीत, एसएस राजामौली का एपिक सबने दुनिया भर में धूम मचाई है. यह अनवरत जारी है. भारतीय फिल्मों का दुनिया से संपर्क पहले से कहीं ज्यादा बढ़ा है. और भारत में भी दुनिया के सिनेमा ने अपने दर्शक बनाए हैं.
भारत मनोरंजन जगत का ग्लोबल हब
वेव्स के उद्धाटन समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समिट की भरपूर प्रशंसा की और इसकी उपयोगिता को रेखांकित किया. उन्होंने क्रिएटीविटी इकोनॉमी की बात कही और ये भी बताया कि भारत फिल्म प्रोडक्शन, डिजिटल कंटेंट, फैशन, म्यूजिक का ग्लोबल हब बन रहा है. भारत और यहां जुटे तमाम मुल्कों के क्रिएटर्स को इस मंच का भरपूर लाभ उठाना चाहिए. प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत में कथा-कहानियां का खजाना है. फिल्म निर्माण में इन कहानियों का लाभ उठाया जाना चाहिए. इन पर फिल्में बननी चाहिए. नई पीढ़ी तक उसे पहुंचाना चाहिए.
कहानी कहने की कला विकसित करना है
वेव्स समिट में 100 से अधिक देशों के कलाकार, स्टार्टअप उद्यमी, निवेशक और क्रिएटर्स एकजुट हुए हैं. वेव्स का मकसद प्रतिभा और रचनात्मकता को उचित मंच देना और उसे ग्लोबल लेवल पर प्रसारित करना है. इसके जरिए संस्कृति, रचनात्मकता और सार्वभौमिक संपर्क को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखा गया है. फिल्म, संगीत, गेमिंग, एनीमेशन और कहानी के जरिए अपनी बातें करने के लिए वेव्स को उचित मंच बनाना है. ताकि नये कलाकार और उद्यमी इससे मुहिम समझ कर जुड़ें. वैसे वेव्स का ज्यादा जोर इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के नवाचार पर है.
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