Entertainment: बॉलीवुड के पहले ‘कुमार’ और रोमांटिक सुपरस्टार, क्यों कहे जाते थे ‘दादा मुनि’? – #iNA

‘दादा मुनि’ अपने समय के सिर्फ सदाबहार अभिनेता ही नहीं थे बल्कि फिल्म इंडस्ट्री के पहले ‘कुमार’ सुपरस्टार भी थे. इस बात का जिक्र करते हुए मुझे सबसे पहले अमिताभ बच्चन का एक मशहूर डायलॉग याद आता है- मैं जहां से खड़ा होता हूं, लाइन वहीं से शुरू होती है. लेकिन नहीं. अशोक कुमार पहले ऐसे अभिनेता थे, जिनके नाम के साथ ‘कुमार’ इस कदर चस्पां होकर चर्चित हो गया कि उनके बाद कई और स्टार इस ‘कुमार’ के मुरीद हो गए और अपने-अपने नाम के साथ ‘कुमार’ को स्वीकार कर लिया. कुछ बानगी देखिए- दिलीप कुमार, प्रदीप कुमार, राजेंद्र कुमार, राज कुमार; अशोक कुमार के दोनों भाई अनूप कुमार, किशोर कुमार और प्रख्यात बंगाली अभिनेता उत्तम कुमार आदि आदि. अनोखा संयोग है कि 13 अक्टूबर अशोक कुमार की जन्म तिथि है तो अमर गायक किशोर कुमार की पुण्यतिथि भी.
दोनों भाई हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के महान कलाकार थे. वैसे अशोक कुमार को ना तो फिल्मों में कोई रुचि थी और ना ही अभिनय करने का शौक था. लेकिन चालीस के दशक में जब स्क्रीन पर आए तो अचानक ही सब के चहेते हो गए. दरअसल अशोक कुमार की सबसे बड़ी खूबी उनकी भोली भाली सूरत और शांत संवाद अदायगी में थी. उस दौर में फिल्मी कलाकारों पर पारसी थिएटर का प्रभाव था. कलाकार गहरे चटख मेकअप से लैस होते थे और ऊंचे स्वर में संवाद बोलते थे लेकिन अशोक कुमार इसके उलट साबित हुए. ना तो गहरा मेकअप और ना ही लाउड डायलॉग डिलीवरी. पहली बार जब सन् 1936 में जीवन नैया फिल्म में देविका रानी जैसी हाई प्रोफाइल अभिनेत्री के साथ आए तभी दर्शकों का दिल जीत लिया.
‘जुबली’ में दिखी बॉम्बे टॉकीज की झलकियां
अभिनेता अशोक कुमार की शुरुआती फिल्मी जिंदगी की झलकियां की कल्पना करनी हो तो अमेजन प्राइम वीडियो की जुबली वेब सीरीज को देखा जा सकता है. यह सीरीज बॉम्बे टॉकीज फिल्म कंपनी के बनने, सफलता पाने और फिर उसके ध्वस्त होने तक की काल्पनिक नजीर पेश करती है. बॉम्बे टॉकीज के कर्ताधर्ता हिमांशु रॉय-देविका रानी पति-पत्नी थे. चालीस के दशक में दोनों प्रसिद्ध कलाकार और निर्माता थे, जब बॉलीवुड अपने बाल्यकाल में था. जुबली सीरीज में हिमांशु रॉय के किरदार को श्रीकांत रॉय, देविका रानी को सुमित्रा कुमारी तो अशोक कुमार को मदन कुमार का नाम दिया गया है. हालांकि जुबली सीरीज कहीं से भी यह दावा नहीं करती कि इसकी कहानी बॉम्बे टॉकीज के उतार-चढ़ाव पर आधारित है लेकिन जब यह सीरीज आई थी, जब इसे बॉम्बे टॉकीज की कहानी के करीब माना गया था.
अशोक कुमार, किशोर कुमार और अनूप कुमार
सीरीज में दिखाया गया था कि अपारशक्ति खुराना ने बिनोद दास नाम के जिस किरदार को निभाया था, वह स्टूडियो में एक लैब सहायक है लेकिन प्रोड्यूसर श्रीकांत रॉय दूसरे अभिनेता से नाराज होकर उसे अपनी फिल्म में अभिनेता बना देते हैं, जिसका नाम बदलकर मदन कुमार रखा जाता है. प्रोड्यूसर श्रीकांत रॉय की नई फिल्म में अब मदन कुमार हीरो हैं तो उनकी पत्नी सुमित्रा कुमारी हीरोइन. अशोक कुमार के अभिनेता बनने की कहानी भी इससे इतर नहीं. अशोक कुमार का मूल नाम था- कुमुदलाल गांगुली था. उनका जन्म 13 अक्तूबर 1911 को भागलपुर में हुआ था. शुरुआती शिक्षा कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज में हुई.
देविका रानी ने नाम दिया- अशोक कुमार
अपनी बहन सती रानी देवी के योगदान से ही अशोक कुमार फिल्मों में आ सके. उनके पति शशधर मुखर्जी भी एक प्रसिद्ध फिल्म निर्माता थे जोकि हिमांशु रॉय के असिस्टेंट थे. शशधर मुखर्जी की मदद से उन्हें बॉम्बे टॉकीज में प्रवेश मिला. सबसे पहले लैब सहायक बने. बॉम्बे टॉकीज के नए प्रोजेक्ट में अभिनेता के विकल्प के तौर पर उन्हें लैब से निकाल कर पर्दे पर पेश किया गया. पर्दे पर आने से पहले उनका नाम बदला गया. देविका रानी ने ही उनको कुमुद कुमार गांगुली से अशोक कुमार बनाया. इस प्रकार वो बॉलीवुड के पहले ‘कुमार’ बन गए. हालांकि उनके नाम को लेकर यह भी कहा जाता है कि उनका पहना नाम ‘अशोक’ ही था, जिसे उनके माता-पिता ने बदल दिया. जब फिल्म एक्टर के लिए नाम रखने की बारी आई तो फिर से ‘अशोक’ नाम ही रखा. हालांकि गांगुली नहीं लगाया.
बहुत कम लोगों को इस बात का इल्म होगा कि प्रारंभ में अशोक कुमार अभिनय करने के साथ-साथ गाते भी थे. उस दौर में पार्श्वगायक विधिवत शुरू नहीं हुआ था. अभिनेता-अभिनेत्री खुद ही अपने गाने गाते थे. अशोक कुमार ने भी कई गाने गाए थे, जिनमें मैं बन का पंछी बन बन डोलूं रे…भी है. बॉम्बे टॉकीज के लिए देविका रानी के साथ उन्होंने कई और फिल्में कीं, मसलन इज्जत, सावित्री और निर्मला. उन्होंने बॉम्बे टॉकीज के लिए फिल्में बनाई भी थीं. इनमें एक महल भी है, जिसमें नायिका मधुबाला थीं. अशोक कुमार की जोड़ी लीला चिटनिस के साथ भी कंगन, बंधन और झूला फिल्मों में काफी हिट हुई थी. लेकिन मीना कुमारी के साथ अशोक कुमार की जोड़ी सबसे ज्यादा सराही गई. ये फिल्में थीं- परिणीता, बिराज बहू, एक ही रास्ता, बहू बेगम, पाकीजा और बंदिश आदि.
अशोक कुमार और मीना कुमारी फिल्म परिणीता में
‘दादा मुनि’ क्यों कहा जाता है
अशोक कुमार को हिंदी सिनेमा का पहला ‘नेचुरल एक्टर’ भी कहा जाता है क्योंकि उन्होंने अपने समय की लोकप्रिय पारसी थिएटर की शैली नहीं अपनाई. उनकी बहन सती रानी देवी उन्हें प्यार से ‘मणि’ कहा करती थीं. मणि का मतलब होता है जो सबसे चमकीला हो. जाहिर उसकी चमक हर किसी को प्रभावित करती है और लोग उससे मोहित होते हैं. अशोक कुमार का व्यक्तित्व भी कुछ ऐसा ही बनकर निखरा. बहन द्वारा मणि नाम पुकारे जाने के बाद कुछ और लोगों ने इसे सुनकर बंगाली होने के नाते दादा मणि कहना शुरू कर दिया. यही दादा मणि बाद में दादामुनि बन गया.
अशोक कुमार का बतौर नायक का करियर दिलीप कुमार, देव आनंद, राज कपूर, शम्मी कपूर या राजेंद्र कुमार के चमकने के बाद जरूर प्रभावित हुआ लेकिन उनकी अभिनय प्रतिभा कभी किसी के आगे फीकी नहीं पड़ी. अशोक कुमार ने अपने जीवन में सभी तरह के किरदारों को पर्दे पर बखूबी जीकर दिखाया है. वे अपने ज़माने के सबसे प्रसिद्ध रोमांटिक नायक थे.उन्होंने करीब तीन सौ फिल्मों में काम किया था. सन् 1943 में आई उनकी किस्मत फिल्म में बॉक्स ऑफिस पर डंका बजा दिया था. वह हिंदी की पहली फिल्म थी, जिसने एक करोड़ की कमाई की थी.
बाद में चरित्र किरदारों में पिता, चाचा, दादा और बड़े भाई के अलावा खलनायक की भूमिका भी निभाई है तो लाजवाब शौकीन भी बने. भारत में जब टीवी सीरियल की शुरुआत हुई तो हम लोग में भी नजर आए. दादा मुनि का निधन 10 दिसंबर 2001 को हुआ. सिनेमा के क्षेत्र में उनके जीवनपर्यंत योगदान को देखते हुए उन्हें दादासाहेब फालके अवॉर्ड से भी सम्मानित किया था.
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