भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी संस्था FFI को मिला नया नेतृत्व, IMPPA प्रेसिडेंट अभय सिन्हा बने नए अध्यक्ष
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भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की सबसे बड़ी और अहम संस्था Film Federation of India (FFI) में नया नेतृत्व आया है. फिल्म निर्माता अभय सिन्हा को FFI का नया अध्यक्ष चुना गया है. यह बदलाव ऐसे दौर में हुआ है जब फिल्में तेजी से थिएटर के साथ-साथ OTT और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर भी नई पहचान बना रही हैं, और क्षेत्रीय सिनेमा को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी भूमिका मिलने लगी है.
OTT के दौर में भारतीय सिनेमा को नई दिशा देने की तैयारी
OTT प्लेटफ़ॉर्म के दौर में फिल्म उद्योग तेजी से बदल रहा है, और इसी बदलाव की चर्चा पटना में हुए FFI के कार्यक्रम में खुलकर हुई. फिल्म से जुड़े लोगों ने कहा कि FFI को अब डिजिटल/OTT सिस्टम के साथ तालमेल बनाकर काम करना होगा. सबसे ज़रूरी है कि फिल्म कारोबार में साफ़ नियम और मजबूत समन्वय हो, ताकि निर्माता, डिस्ट्रीब्यूटर और सिनेमा घर एक भरोसे के मॉडल पर साथ काम कर सकें. साथ ही, थिएटर और OTT के बीच ऐसा सिस्टम बने जहाँ दोनों एक-दूसरे के पूरक बनकर इंडस्ट्री को नई दिशा दें. नई कमिटी के आने से ये भी माना जा रहा है कि OTT और थिएटर के बीच संतुलन, क्षेत्रीय भाषाओं के कंटेंट को समर्थन और रीजनल सिनेमा की आवाज़ को मजबूती मिलेगी.
हिंदी और रीजनल सिनेमा के बीच बेहतर सहयोग बढ़ाने पर ज़ोर
FFI देशभर के 29 से अधिक फिल्म संगठनों का संयुक्त मंच है, जो निर्माता, वितरक, प्रदर्शक और फिल्म तकनीकी निकायों की साझा आवाज़ के रूप में काम करता है. संगठन फिल्म व्यापार से जुड़े नीतिगत संवाद, उद्योग समन्वय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म मंचों पर भारत की भूमिका को मजबूत करने में सक्रिय रहा है. अभय सिन्हा भारतीय फिल्म उद्योग का एक जाना-माना नाम हैं. वह लंबे समय से फिल्म निर्माण, इंडस्ट्री समन्वय और सिनेमा से जुड़े संगठनों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं. बिहार से आने वाले अभय सिन्हा ने हिंदी और क्षेत्रीय सिनेमा के बीच बेहतर सहयोग को बढ़ाने पर हमेशा ज़ोर दिया. उनके काम में निर्माताओं के लिए मजबूत मंच तैयार करना, फिल्म कारोबार को संगठित करना और नई तकनीक के साथ इंडस्ट्री को जोड़ना शामिल रहा है.
पूर्वी भारत और बिहार के सिनेमा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान और बेहतर अवसर मिलेंगे
अभय सिन्हा के FFI अध्यक्ष पद संभालने के बाद यह उम्मीद और मजबूत हुई है कि पूर्वी भारत और बिहार का क्षेत्रीय सिनेमा अब राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान और बेहतर अवसर हासिल करेगा. उनके नेतृत्व में रीजनल फिल्मों के निर्माण, वितरण और प्रदर्शन को बढ़ावा मिलने की संभावना है, जिससे छोटे व नए निर्माताओं को भी बड़ा मंच मिल सकेगा. फिल्म जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि FFI को अब ऐसा नेतृत्व मिला है जो फिल्म व्यापार और बदलते वितरण मॉडल के बीच संतुलन साधते हुए पूर्वी भारत और बिहार की फिल्मों को मुख्यधारा में लाने में अहम भूमिका निभा सकता है. इससे पहले भी कई दिग्गज इस पद को संभालते आए हैं, जिन्होंने भारतीय सिनेमा को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने और उद्योग की आवाज़ को मजबूत करने में योगदान दिया.
इंडस्ट्री के भीतर यह भी चर्चा तेज है कि भारतीय फिल्मों और कंटेंट की हिस्सेदारी को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कैसे बढ़ाया जाए, ताकि देश की कहानियाँ वैश्विक दर्शकों तक बेहतर तरीके से पहुँच सकें. इसी क्रम में, छोटे और क्षेत्रीय फिल्म निर्माताओं को नीतिगत समर्थन और राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व देना भी FFI की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल होना चाहिए, क्योंकि भारतीय सिनेमा की विविधता केवल बड़े स्टूडियो या मुख्यधारा तक सीमित नहीं, बल्कि देश के हर हिस्से में रची-बसी है.
भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी संस्था FFI को मिला नया नेतृत्व, IMPPA प्रेसिडेंट अभय सिन्हा बने नए अध्यक्ष
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