देश- नेता प्रतिपक्ष से लेकर अध्यक्ष तक… झारखंड में किस फॉर्मूले से आगे बढ़ेगी बीजेपी?- #NA
अमित शाह, जेपी नड्डा, बाबू लाल मरांडी और चंपई सोरेन.
झारखंड में हेमंत सोरेन से सियासी मात खाने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी संगठन के कील-कांटे को दुरुस्त करने में जुट गई है. 5 साल तक हेमंत सोरेन से मुकाबला करने के लिए पार्टी को दो मजबूत चेहरे मैदान में उतारने हैं. उनमें एक नेता प्रतिपक्ष तो दूसरा प्रदेश अध्यक्ष का पद है.
कहा जा रहा है कि दोनों पदों के लिए कई नाम सियासी चर्चा में है, लेकिन रांची में मंथन के बाद नामों को लेकर फाइनल मुहर दिल्ली में लगेगी.
किस फॉर्मूले से आगे बढ़ेगी बीजेपी?
झारखंड गठन के बाद से ही भारतीय जनता पार्टी एक आदिवासी और एक गैर आदिवासी फॉर्मूले पर आगे बढ़ती रही है. 2014 तक पार्टी में विधायक दल के नेता का पद आदिवासी और अध्यक्ष की कुर्सी गैर आदिवासी चेहरे को मिलती थी, लेकिन रघुबर दास की एंट्री के बाद इसमें बदलाव किया गया. हालांकि, पुराने फॉर्मूले से पार्टी ने कोई छेड़छाड़ नहीं की.
2019 में जब बीजेपी की करारी हार हुई, तब बाबू लाल मरांडी को अपने पाले में लाकर पार्टी ने उन्हें नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी सौंप दी. हालांकि, सियासी और तकनीकी वजहों से मरांडी कुर्सी पर काबिज नहीं हो पाए.
2023 में बीजेपी ने मरांडी को प्रदेश अध्यक्ष तो दलित समुदाय से आने वाले अमर कुमार बाउरी को नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी सौंप दी, लेकिन 2024 के चुनाव में बीजेपी का यह फॉर्मूला काम नहीं आया.
ऐसे में चर्चा है कि बीजेपी किस फॉर्मूले से अब आगे बढ़ेगी?
1. दोनों पद आदिवासी समुदाय को मिले- झारखंड के सियासी गलियारों में इसकी चर्चा सबसे ज्यादा है. बीजेपी इस चुनाव में आदिवासी बेल्ट में ही हेमंत से मात खा गई है. पार्टी आदिवासियों के लिए रिजर्व विधानसभा की 28 में से सिर्फ एक सीट पर जीत दर्ज कर पाई है.
बाबू लाल मरांडी आदिवासी समुदाय से जरूर आते हैं, लेकिन वे चुनाव धनवार सीट से लड़ते हैं, जो सामान्य कैटेगरी की सीट है. इसी तरह लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी को आदिवासियों के लिए रिजर्व झारखंड की 5 सीटों पर बुरी तरह शिकस्त मिली थी.
ऐसे में आदिवासियों को साधने के लिए कहा जा रहा है कि पार्टी दोनों ही कुर्सी इस समुदाय को सौंप सकती है. चंपई सोरेन और बाबू लाल मरांडी रेस में सबसे आगे हैं.
2. एक महिला और एक आदिवासी का फॉर्मूला– झारखंड में आदिवासियों की आबादी करीब 26 प्रतिशत है. वहीं 2024 के विधानसभा चुनाव में यहां महिला वोटर्स भी एक्स फैक्टर बनकर उभरी हैं. हेमंत सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा ने कल्पना सोरेन को आगे कर महिलाओं को साधने का काम किया.
कल्पना गांडेय विधानसभा सीट से विधायक चुनी गई हैं और राजनीति में सक्रिय हैं. आने वाले वक्त में कल्पना को जेएमएम की तरफ से और भी ज्यादा प्रमोट किया जा सकता है. जीत के बाद हेमंत सोरेन उन्हें स्टार प्रचारक बता चुके हैं.
कहा जा रहा है कि इसे देखते हुए बीजेपी भी किसी महिला नेता को आगे बढ़ाने का प्लान कर सकती है.
3. पुराने फॉर्मूले ही रिपीट कर दे- झारखंड बीजेपी में पुराने फॉर्मूले के ही फिर से लागू होने की चर्चा ज्यादा है. हालांकि, कहा जा रहा है कि इस बार चेहरा बदल सकता है. पिछली बार प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष दोनों उत्तरी छोटा नागपुर से थे.
वहीं रघुबर दास के वक्त दोनों ही पद कोल्हान में चला गया था, लेकिन इस बार कहा जा रहा है कि बीजेपी इसमें प्रमंडल को भी साधने की कवायद करेगी.
बीजेपी अबकी एक पद कोल्हान या संथाल और दूसरा पद उत्तरी छोटा नागपुर के हिस्से में रख सकती है.
लगातार गिर रहा है बीजेपी का ग्राफ
2014 में भारतीय जनता पार्टी को विधानसभा की 37 सीटों पर जीत मिली थी. पार्टी ने आजसू के साथ मिलकर सरकार का गठन कर लिया था. 2019 के चुनाव में बीजेपी की सीटें 37 घटकर 25 पर पहुंच गई.
वहीं 2024 के चुनाव में भी बीजेपी की सीटों की संख्या में कमी आई. 2024 में बीजेपी को सिर्फ 21 सीटों पर जीत मिली है. वहीं उसके सहयोगियों ने 3 सीटों पर जीत हासिल की है.
दिलचस्प बात है कि 2019 में 12 सीट घटने के बावजूद बीजेपी के वोट प्रतिशत में इजाफा हुआ था. पार्टी को 2014 के 31 प्रतिशत के मुकाबले 2019 में 33 प्रतिशत वोट मिले थे, लेकिन 2024 में वोट प्रतिशत में भी कमी आई है.
2024 में पार्टी के वोट प्रतिशत में करीब 0.19 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है.
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