उपजिलाधिकारी के निरीक्षण से बौखलाई नपाध्यक्ष, जारी नोटिस, पूछा कि अधिकार से खंगाले अभिलेख

🔴नगर पालिका में एसडीएम के निरीक्षण पर मचा संग्राम, अध्यक्ष ने उठाया एसडीएम के अधिकार पर सवाल 

🔴पत्र के जरिए अध्यक्ष ने एसडीएम से पूछा -अभिलेख खंगालने का किसने दिया अधिकार?

कुशीनगर। नगर पालिका परिषद कुशीनगर में बीते 20 अगस्त को एसडीएम द्वारा किये गये  निरीक्षण को लेकर अब नगर पालिका अध्यक्ष का गुस्सा सार्वजनिक हो गया है। निरीक्षण के तरीके और अभिलेखों की मांग को लेकर नगर पालिका अध्यक्ष किरन जायसवाल ने सवाल खडा कर दिया है। अध्यक्ष की ओर से जारी पत्र में आरोप लगाया गया है कि निरीक्षण के दौरान नगर पालिका कार्यालय का मुख्य प्रवेश द्वार करीब डेढ़ घंटे तक बंद रहा और विभिन्न कक्षों में जाकर अधिकारियों-कर्मचारियों से पंजिकाएं एवं अभिलेख मांगे गए। अध्यक्ष ने एसडीएम से पूछा है कि आखिर यह सब किस अधिकार और किस लिखित आदेश के तहत किया गया?

मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि अध्यक्ष किरन जायसवाल की ने अपने पत्र में उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1916 की धाराओं का हवाला देते हुए निरीक्षण की वैधानिकता पर सवाल खड़ा किया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि यदि निरीक्षण और अभिलेखों की मांग के लिए मंडलायुक्त या किसी सक्षम प्राधिकारी ने कोई आदेश अथवा प्राधिकरण-पत्र जारी किया है तो उसकी प्रति नगर पालिका कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए।

🔴सुबह 10:10 बजे पहुंचे थे एसडीएम, डेढ़ घंटे बंद रहा मुख्य द्वार!

नगर पालिका अध्यक्ष के पत्र के मुताबिक, 20 अगस्त की सुबह करीब 10:10 बजे उपजिलाधिकारी राजस्व विभाग, तहसील कसया द्वारा नगर पालिका परिषद कुशीनगर का औचक निरीक्षण किया गया। अध्यक्ष का कहना है कि निरीक्षण के दौरान कार्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार को लगभग 01:30 घंटे तक बंद रखा गया। पत्र में कहा गया है कि इससे आम नागरिकों, सभासदों, कर्मचारियों और अन्य कार्यालयीय कार्य से आने वाले लोगों को परेशानी हुई। यानी जिस कार्यालय में जनता अपने काम लेकर पहुंचती है, उसी कार्यालय का प्रवेश द्वार निरीक्षण के दौरान बंद रहने का आरोप अब विवाद का केंद्र बन गया है। अध्यक्ष किरन जायसवाल की ओर से भेजे गए पत्र में आरोप लगाया गया है कि निरीक्षण के दौरान विभिन्न कक्षों में जाकर संबंधित कर्मचारियों से आधिकारिक पंजिकाएं और अभिलेख मांगे गए। यहीं से पूरा मामला ‘औचक निरीक्षण’ से आगे बढ़कर अधिकार क्षेत्र के सवाल पर पहुंच गया है।नगर पालिका अध्यक्ष ने अपने पत्र में उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1916 की धारा 32 का हवाला देते हुए कहा है कि नगरपालिका के कार्यों और संचालन आदि का निरीक्षण निर्धारित प्रावधानों के तहत अधिकृत अधिकारी द्वारा ही किया जा सकता है। पत्र में अधिनियम की धारा 17(2) का भी उल्लेख किया गया है। अध्यक्ष का कहना है कि अगर एसडीएम को निरीक्षण का अधिकार था तो उसका आधार भी होना चाहिए।

🔴मौखिक अधिकार नहीं, आदेश की प्रति दीजिए’

नगर पालिका अध्यक्ष ने एसडीएम को भेजे गये पत्र में  मंडलायुक्त गोरखपुर द्वारा निरीक्षण, पंजिकाओं अथवा अभिलेखों की मांग के लिए यदि कोई लिखित आदेश या प्राधिकरण-पत्र जारी किया गया है तो उसकी प्रति नगर पालिका कार्यालय में उपलब्ध कराने को कहा है।

🔴प्रतिलिपि लखनऊ से लेकर जिला प्रशासन तक

मामला अब दबने वाला नहीं दिख रहा है। सबब यह है कि अध्यक्ष ने पत्र की प्रतिलिपि प्रमुख सचिव, नगर विकास विभाग लखनऊ, मंडलायुक्त गोरखपुर, जिलाधिकारी कुशीनगर और अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद कुशीनगर को भी भेजी है।इससे साफ है कि नगर पालिका अध्यक्ष ने मामले को महज स्थानीय आपत्ति तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि इसे उच्च अधिकारियों के संज्ञान में अधिकार की सीमा को लेकर नई जंग शुरू कर दी है। 

🔴प्रशासनिक निरीक्षण या अधिकार क्षेत्र की सीमा?

नगर पालिका जैसी स्थानीय स्वायत्त संस्था के कार्यालय में किसी उप जिलाधिकारी/ उप जिला मजिस्ट्रेट के निरीक्षण को लेकर उठे इस विवाद ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। एक तरफ प्रशासनिक अधिकारियों के निरीक्षण को सरकारी व्यवस्था का हिस्सा माना जाता है, वहीं दूसरी तरफ नगर पालिका अध्यक्ष ने कानून की धाराओं का हवाला देकर उप जिलाधिकारी के निरीक्षण की प्रक्रिया और अधिकारिता पर आपत्ति दर्ज कराई है। ऐसे मे सवाल यह उठता है कि क्या उपजिलाधिकारी के पास नगर पालिका निरीक्षण और अभिलेखों की मांग करने का अधिकार नही है? अब देखना दिलचस्प होगा कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले में क्या रुख अपनाता है। निरीक्षण किस आदेश के तहत हुआ, अभिलेख किस अधिकार से मांगे गए और कार्यालय का प्रवेश द्वार करीब डेढ़ घंटे तक बंद रखने की जरूरत क्यों पड़ी। इन सभी सवालों का जवाब सामने आना बाकी है।

🔵रिपोर्ट – संजय चाणक्य 

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