German Chancellor Visits India: दो दिन के दौरे पर भारत आएं जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज, आज पीएम मोदी से इन मुद्दों पर होगी अहम बातचीत

German Chancellor Visits India: जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज सोमवार (12 जनवरी) को अपनी पहली आधिकारिक भारत यात्रा पर अहमदाबाद पहुंचे. यह दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर 12 से 13 जनवरी तक दो दिनों का है. अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनके आगमन के साथ ही भारत-जर्मनी संबंधों में एक नया अध्याय शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है.

जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को अहमदाबाद में ही चांसलर मर्ज से मुलाकात करेंगे. इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हो सकती है. वैश्विक राजनीति में जारी अस्थिरता के बीच यह दौरा दोनों देशों के लिए खास महत्व रखता है. चांसलर बनने के बाद फ्रेडरिक मर्ज का यह पहला एशियाई दौरा है.

क्या है चांसलर मर्ज का कार्यक्रम?

आपको बता दें कि यात्रा के पहले दिन सुबह करीब 9:30 बजे प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर मर्ज साबरमती आश्रम का संयुक्त दौरा करेंगे. इसके बाद दोनों नेता साबरमती रिवरफ्रंट पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में हिस्सा लेंगे. सुबह 11:15 बजे महात्मा मंदिर में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता होगी.

किन मुद्दों पर होगी बातचीत?

बैठक में भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा की जाएगी, जिसके 25 साल पूरे हो चुके हैं. बातचीत का फोकस व्यापार और निवेश बढ़ाने, उन्नत तकनीक, शिक्षा, कौशल विकास और लोगों के बीच संपर्क मजबूत करने पर रहेगा. इसके साथ ही रक्षा और सुरक्षा सहयोग को नई दिशा देने पर भी चर्चा होगी. विज्ञान, इनोवेशन, रिसर्च और ग्रीन व सस्टेनेबल डेवलपमेंट भी एजेंडे में शामिल हैं.

गौरतलब है कि दोनों नेताओं की पिछली मुलाकात G7 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी, जहां उन्होंने द्विपक्षीय रिश्तों को और मजबूत करने पर सहमति जताई थी. उसी दौरान पीएम मोदी ने चांसलर मर्ज को भारत आने का न्योता दिया था.

पनडुब्बी सौदे पर क्यों है खास नजर?

इस दौरे का सबसे बड़ा मुद्दा भारतीय नौसेना के लिए छह आधुनिक पनडुब्बियों की खरीद का प्रस्ताव है. करीब 52,500 करोड़ रुपये के इस सौदे में जर्मनी की कंपनी थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स और भारत की माझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड की साझेदारी हो सकती है.

इस सौदे से भारत को क्या फायदा होगा?

इस करार से भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ेगी, स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, उन्नत जर्मन तकनीक हासिल होगी और ‘मेक इन इंडिया’ को रक्षा क्षेत्र में नई मजबूती मिलेगी. इसके साथ ही हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति और मजबूत होगी.

यह भी पढ़ें- जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज का दो दिवसीय भारत दौरा, गांधी नगर में पीएम मोदी से करेंगे मुलाकात

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