भारत-EU के बीच ऐतिहासिक व्यापारिक डील, क्या इस गणतंत्र दिवस पर खत्म होगा 18 साल का इंतजार?
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भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच सालों से अटका हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) अब अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच गया है. दावोस में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने संकेत दिया था कि बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है. अब वह यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ भारत पहुंच चुकी हैं, जिससे यह उम्मीद जाग गई है कि इस बड़े समझौते पर जल्द ही मुहर लग सकती है.
गणतंत्र दिवस पर खास मेहमान और रणनीतिक संदेश
इस बार का गणतंत्र दिवस भारत और यूरोपीय संघ के रिश्तों के लिए बहुत खास है. पीएम नरेंद्र मोदी 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे. खास बात यह है कि पहली बार EU के शीर्ष नेतृत्व को सामूहिक रूप से गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया गया है. यह दिखाता है कि भारत अब यूरोपीय देशों को अलग-अलग देखने के बजाय एक मजबूत पार्टनर के रूप में देख रहा है.
क्या है इस दौरे का असली मकसद?
25 से 27 जनवरी 2026 तक चलने वाले इस दौरे का सबसे बड़ा एजेंडा ‘फ्री ट्रेड एग्रीमेंट’ को फाइनल करना है. 2022 में नौ साल के लंबे इंतजार के बाद यह बातचीत फिर से शुरू हुई थी. अगर इस शिखर सम्मेलन में घोषणा होती है, तो यह दोनों के लिए अब तक की सबसे बड़ी व्यापारिक उपलब्धि होगी. इस डील के तहत 90% से ज्यादा सामानों पर टैक्स (टैरिफ) खत्म करने और निवेश को आसान बनाने का लक्ष्य है.
बदलते वैश्विक हालात और चीन पर निर्भरता कम करने की कोशिश
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पूरी दुनिया में व्यापार को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. अमेरिका की नई आर्थिक नीतियों और बढ़ते संरक्षणवाद के बीच भारत और यूरोपीय संघ, दोनों ही अपनी सप्लाई चेन को सुरक्षित करना चाहते हैं. यह समझौता न केवल व्यापार बढ़ाएगा, बल्कि चीन पर निर्भरता कम करने और एक-दूसरे के बाजार तक बेहतर पहुंच बनाने में भी मदद करेगा.
भारत और यूरोपीय संघ को इससे क्या फायदा होगा?
भारत के लिए कपड़ा (Apparel), दवा (Pharma), स्टील और पेट्रोलियम जैसे सेक्टर में टैक्स की राहत मिलेगी. इससे भारत के एक्सपोर्ट में अगले 10 सालों में 20 से 30% की बढ़त हो सकती है और नए रोजगार पैदा होंगे. यूरोपीय संघ के लिए उन्हें भारत के 140 करोड़ की आबादी वाले विशाल बाजार तक आसान पहुंच मिलेगी. इसके अलावा, क्लीन एनर्जी और नई टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे.
🇪🇺🇮🇳 EU–India ties move forward.@EUCouncil President @antoniocostapm and @EU_Commission President @vonderleyen will be in New Delhi for the Republic Day & 16th EU–India Summit
Trade, security & clean transition and more on the agenda.🇪🇺🇮🇳 pic.twitter.com/rYvtr20NHT
— EU in India (@EU_in_India) January 24, 2026
इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ क्यों कहा जा रहा है?
लगभग 18 साल की लंबी और पेचीदा बातचीत के कारण इस समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ का नाम दिया गया है. यह दुनिया के सबसे बड़े बाजार और सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को एक साथ जोड़ता है. अगर यह समझौता लागू होता है, तो यह आने वाले दशकों तक ग्लोबल ट्रेड और भारत-यूरोप के रिश्तों की तस्वीर बदल देगा.
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