राहुल गांधी के ‘हाइड्रोजन बम’ पर गृह मंत्री अमित शाह का अटैक, एक-एक करके दिया सबका करारा जवाब

लोकसभा में उस समय माहौल गर्म हो गया जब गृह मंत्री अमित शाह और विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बीच चुनावी सुधारों को लेकर तीखी नोकझोंक हो गई. अमित शाह चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR की प्रक्रिया, इतिहास और जरूरत पर बोल रहे थे, तभी राहुल गांधी ने बीच में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि उनकी तीन प्रेस कॉन्फ्रेंसेस पर बहस कराई जाए. शाह ने इस टिप्पणी का तुरंत जवाब देते हुए कहा कि वह अपनी भाषण की क्रमबद्धता खुद तय करेंगे और विपक्ष को धैर्य रखना चाहिए. उन्होंने कहा कि वह सभी मुद्दों पर समय आने पर बात करेंगे.

‘हाइड्रोजन बम’ विवाद और राहुल गांधी के आरोपों पर प्रतिक्रिया

अपने संबोधन में शाह कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा लगाए गए “हाइड्रोजन बम” आरोपों का जवाब दे रहे थे. गांधी ने दावा किया था कि हरियाणा के एक ही घर से 501 वोट पड़े हैं. शाह ने इस आरोप को तथ्यहीन बताते हुए कहा कि यह घर नंबर 265 एक संयुक्त परिवार का बड़ा पुश्तैनी परिसर है, जिसका क्षेत्रफल लगभग एक एकड़ है.

अलग-अलग परिवारों को अलग घर नंबर नहीं मिलने के कारण सभी मतदाता उसी नंबर के तहत दर्ज हैं. उन्होंने कहा कि न यह घर नकली है और न ही वोट. यह व्यवस्था कांग्रेस सरकार के समय से ही चली आ रही है.

मतदाता सूची में दोहराव और SIR पर उठे सवाल

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि कुछ लोग दो अलग-अलग स्थानों पर दर्ज हैं, जिस पर प्रतिक्रिया देते हुए शाह ने कहा कि यह सामान्य त्रुटि है और लोगों को दोष देना अनुचित है. उन्होंने स्पष्ट किया कि 2010 के बाद रिटर्निंग ऑफिसर के अधिकारों में बदलाव के चलते ऐसी विसंगतियां बढ़ीं. उन्होंने कहा कि स्वयं कई नेताओं के नाम भी दो स्थानों पर दर्ज पाए गए हैं, जो नियमों में बदलाव का नतीजा है. शाह के अनुसार SIR ऐसी गलतियों को सुधारने के लिए आवश्यक है, फिर भी इसे “Vote Chori” कहकर निशाना बनाया जा रहा है.

चुनावी पारदर्शिता की जरूरत और कानूनी प्रावधान

अमित शाह ने कहा कि 1952 से SIR विभिन्न सरकारों के दौरान होती रही है और यह प्रक्रिया समय-समय पर मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन रखने के लिए अनिवार्य है. उनके अनुसार यदि मतदाता सूची सही नहीं होगी, तो निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं हैं. उन्होंने आगे कहा कि 2004 के बाद पहली बार 2025 में SIR की जा रही है, जिसे लेकर बेवजह विवाद खड़ा किया जा रहा है. गृह मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 327 के तहत चुनाव आयोग को मतदाता सूची तैयार करने और संबंधित प्रक्रियाओं की पूर्ण अधिकारिता प्राप्त है. ऐसे में यह कहना गलत है कि आयोग को SIR करने का अधिकार नहीं है.

वोटर लिस्ट की वैरिफिकेशन जरूरी

शाह ने कहा कि देश की सुरक्षा तभी सुनिश्चित हो सकती है जब मतदाता सूचियों में घुसपैठियों के नाम न हों और मृत व्यक्तियों के नाम हटाए जाएं. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या विदेशियों को वोट देने का अधिकार मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि कांग्रेस बिना कारण के SIR पर सवाल उठा रही है जबकि यह प्रक्रिया लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए जरूरी है. उनके अनुसार विपक्ष हर हार का blame चुनाव आयोग, EVM और अन्य संस्थाओं पर डाल देता है, जबकि वास्तविक समस्या उनके अपने नेतृत्व में है. 

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