Entertainment: Swaroop Sampat: मिस इंडिया रह चुकीं परेश रावल की पत्नी कैसे बन गईं स्कूल टीचर? – #iNA

Swaroop Sampat Journey: परेश रावल तो बॉलीवुड के एक दिग्गज एक्टर हैं ही, लेकिन उनके साथ-साथ उनकी पत्नी स्वरूप संपत भी एक बड़ी अदाकारा हैं. उन्होंने साल 1981 में आई फिल्म ‘नरम गरम’ से अपने करियर की शुरुआत की थी. बॉलीवुड डेब्यू करने से दो साल पहले यानी साल 1979 में उन्होंने मिस इंडिया का खिताब भी अपने नाम किया था.
मिस इंडिया और एक्ट्रेस के साथ-साथ उनकी एक और पहचान है. वो पहचान है स्कूल टीचर का. वो स्कूल में बच्चों को पढ़ाती भी हैं. Tv9 को दिए इंटरव्यू में स्वरूप ने इस बारे में बताया है कि वो मिस इंडिया और एक्ट्रेस से टीचर कैसे बन गईं
स्वरूप संपत ने क्या बताया?
स्वरूप संपत ने कहा, “टीनएज में मुझे एहसास हो गया था कि बच्चे मुझे बहुत प्रेम करते हैं, क्योंकि मेरी दोस्त की छोटी बहनें थी, वो सब मेरे साथ आकर खेलती थीं. तो मैं जानती थी कि बच्चे मुझे प्यार करते हैं. मेरा टीचर बनने का कोई प्लान नहीं था. मैं कॉलेज ड्रॉप आउट थी. जब मैं मिस इंडिया बनी तो मैंने कॉले ड्रॉप कर दिया था. पढ़ाई-लिखाई सब छोड़ दिया था.”
उन्होंने आगे कहा, “जब मेरे बच्चे बड़े होने लगे, तो मैं देखने लगी कि क्या माहौल. मैं उन्हें पढ़ाती थी. वो कभी ट्यूशन नहीं लेते थे. एक दफा परेश ने मुझे देखा, एक वाहियात किस्म की रोमांटिक नॉवेल पढ़ रही थी मैं. तो परेश ने बोला कि तुम इतनी गिर गई हो कि तुम ये पढ़ने लगी हो. तो मैंने जाकर एम.ए. साहित्य का फॉर्म भर दिया कि अब मैं इंग्लिश साहित्य की पढ़ाई करूंगी, ताकि कम से कम अच्छी किताबें तो पढूंगी.”
स्कूल में पढ़ाना शुरू किया
स्वरूप संपत ने बताया कि वो अपने बच्चों की स्कूल में PTA (पैरेंट-टीचर एसोसिएशन) की चेयरपर्सन थीं. वहां एक लर्निंग डिसेबिलिटी का कोर्स था, जिसमें कोई भी शामिल नहीं हो रहा था, तो वो उसमें शामिल हो गईं. उस वक्त तक उनके बच्चे भी थोड़े बड़े हो गए थे और वो फ्री थीं, तो वो कोशिश करती थीं कि वो टाइम पास में किसी स्कूल में पढाएं.
स्वरूप एक डिसएबल स्कूल में पहुंचीं. उस स्कूल के टीचर उनके साथ मेड की तरह बर्ताव करते थे कि हम जा रहे हैं आप बच्चों का ख्याल रखो. ये चीज स्वरूप को बिल्कुल पसंद नहीं थी. तो फिर उन्हें समझ आया कि अगर उन्हें कुछ करना तो उन्हें सीखना पड़ेगा. तो फिर उन्होंने लर्निंग डिसेबिलिटी सीखने का फैसला किया.
पीएचडी करने का ऑफर मिला
चूंकि स्वरूप का बैकग्राउंड थिएटर से था, तो इसलिए उन्होंने डिएसबल बच्चों को नाटक के द्वारा चीजें सिखाने लगीं. और इससे बच्चों में फर्क आ रहा था. बाद में उन्होंने विदेश में एक यूनिवर्सिटी में अप्लाई किया तीन महीने का कोर्स करने के लिए, जिससे वो ये सीख सकें कि डिसएबल बच्चों को पढ़ाने में ड्रामा का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं. उनकी सीवी देखने के बाद उस यूनिवर्सिटी ने उन्हें स्कॉलरशिप देने के साथ-साथ तीन महीने के कोर्स की जगह पीएचडी रने का ऑफर दे दिया. स्वरूप ने पीएचडी के करने के बारे में सोचा नहीं था, इसलिए वो पहले तो हिचकिचाईं, लेकिन फिर उन्होंने पीएचडी की पढ़ाई की.
इनपुट- भारती दुबे
Swaroop Sampat: मिस इंडिया रह चुकीं परेश रावल की पत्नी कैसे बन गईं स्कूल टीचर?
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