Political – बिहार से आकर दिल्ली सियासत के अंगद कैसे बन गए ये 5 नेता?- #INA

बिहार से आकर दिल्ली सियासत के अंगद कैसे बन गए ये 5 नेता?
दिल्ली देश की राजधानी है और यहां की सियासत कई उलटफेरों की गवाह रही है, लेकिन बिहार से आने वाले 5 ऐसे नेता भी हैं, जो लंबे वक्त से दिल्ली की सियासत में अंगद की तरह पांव जमाए हुए हैं. चुनाव में हार हो या जीत हो, इन नेताओं का सियासी दबदबा बना रहता है.
दिलचस्प बात है कि इनमें से 4 नेता इस बार भी दिल्ली के दंगल में उतरे हुए हैं. वहीं एक नेता ने अपनी विरासत अपने बेटे के जिम्मे सौंप दी है. दिल्ली चुनाव 2025 के इस स्पेशल स्टोरी में इन्हीं 5 नेताओं की कहानी विस्तार से पढ़ते हैं…
महाबल मिश्रा- बिहार के मधुबनी में जन्मे महाबल मिश्रा ने दिल्ली को 1980 के दशक में दिल्ली को अपना कर्म भूमि बना लिया. पढ़ाई-लिखाई के बाद महाबल मिश्रा को सेना में नौकरी मिली, लेकिन 1982 में वे वहां से रिटायरमेंट लेकर राजनीति में सक्रिय हो गए. 1997 में महाबल मिश्रा पहली बार पार्षद चुने गए
1998 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने नसीरपुर सीट से महाबल मिश्रा को विधायकी का टिकट दिया. महाबल जीतने में कामयाब रहे. महाबल ने इसके बाद सियासत में पीछे मुड़कर नहीं देखा. एक वक्त में पूर्वांचल के बड़े नेताओं में महाबल की गिनती होती थी. महाबल शीला दीक्षित के करीबी थे.
2009 में महाबल लोकसभा भी पहुंचे, लेकिन 2014 के लोकसभा और 2015 के विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हार गए. महाबल ने इसके बाद पाला बदल लिया. पहले बेटे को आम आदमी पार्टी में भेजा और फिर खुद आ गए. 2024 के लोकसभा चुनाव में महाबल मिश्रा को आप ने पश्चिमी दिल्ली से उम्मीदवार भी बनाया.
हालांकि, बीजेपी के कमलजीत सहरावत से वे जीत नहीं पाए. इस चुनाव में महाबल के बेटे विनय मिश्रा द्वारका से आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार हैं. चुनाव आयोग में दाखिल हलफनामे के मुताबिक महाबल मिश्रा के पास करीब 45 करोड़ रुपए की संपत्ति है. वहीं उनके बेटे विनय के पास करीब 8 करोड़ रुपए की संपत्ति है.
बंदना कुमारी- बिहार के समस्तीपुर में जन्मीं बंदना की शुरुआती पढ़ाई-लिखाई मुजफ्फरपुर में हुई है. अन्ना आंदोलन के जरिए बंदना राजनीति में आईं. उस वक्त उनके पास महिला विंग की कमान थी. 2013 में बंदना को आम आदमी पार्टी ने शालीमार बाग सीट से उम्मीदवार बनाया.
बंदना ने यहां से जीत दर्ज कर ली. 2015 और 2020 के चुनाव में भी बंदना ने शालीमार सीट से जीत हासिल की. बंदना दिल्ली विधानसभा की उपाध्यक्ष भी रही हैं. बंदना को आप ने फिर से शालीमार बाग से मैदान में उतारा है. 50 साल की बंदना के पास करीब 10 करोड़ रुपए की संपत्ति है.
संजीव झा- अन्ना आंदोलन से राजनीति में आने वाले संजीव झा भी बिहार के मधुबनी जिले के मूल निवासी हैं. संजीव झा दिल्ली के बुरारी सीट से आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार हैं. 2013 के चुनाव में संजीव को आप ने बुरारी सीट से प्रत्याशी बनाया था. संजीव ने इस चुनाव में बीजेपी के श्री किशन को पटखनी दी थी.
झा 2015 और 2020 के चुनाव में भी बुरारी सीट से जीत कर सदन पहुंचे. झा आम आदमी पार्टी के बिहार प्रभारी भी हैं. संजीव झा को आम आदमी पार्टी के टॉप लीडरशिप का करीबी माना जाता है.
संजीव झा ने अपनी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई मधुबनी से ही की है. 2012 में आप के गठन के वक्त में पार्टी में आ गए. इसके बाद से वे लगातार आप में ही सक्रिय हैं.
अनिल झा- दिल्ली के सियासी रण में अनिल झा भी काफी सालों से सक्रिय हैं. झा भी बिहार के मधुबनी के ही रहने वाले हैं. 2008 में झा पहली बार विधायक चुने गए थे. अनिल झा इस बार आम आदमी पार्टी के सिंबल पर किराड़ी सीट से उम्मीदवार हैं.
अनिल छात्र राजनीति से सक्रिय राजनीति में आए हैं. 1997 में अनिल ने दिल्ली छात्रसंघ के चुनाव में अध्यक्ष पद पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के टिकट पर जीत हासिल की थी. अनिल इसके बाद बीजेपी की सक्रिय राजनीति में आ गए.
2008 में अनिल पहली बार विधायकी जीते. 2013 में भी उन्हें जीत मिली लेकिन अनिल 2015 और 2020 में आप के ऋतुराज गोविंद से चुनाव हार गए. आप के टिकट पर अनिल को इस बार जीत की उम्मीद है.
सोमनाथ भारती- वकालत से राजनीति में आने वाले सोमनाथ भारती भी बिहार के नवादा जिले के रहने वाले हैं. सोमनाथ को आम आदमी पार्टी ने मालवीय नगर सीट से उम्मीदवार बनाया है. सोमनाथ इस सीट से लगातार 3 बार से जीत दर्ज कर रहे हैं.
भारती दिल्ली सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें आप ने नई दिल्ली सीट से उम्मीदवार बनाया था, जहां वे काफी क्लोज मुकाबले में चुनाव हार गए. भारती को आप हाईकमान का करीबी माना जाता है.
बिहार से आकर दिल्ली सियासत के अंगद कैसे बन गए ये 5 नेता?
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