जम्मू के उधमपुर में सुरक्षाबलों-आतंकियों में मुठभेड़, एक जवान शहीद:जैश के 3 आतंकी छिपे होने की खबर; किश्तवाड़ में भी एनकाउंटर जारी- INA NEWS

जम्मू-कश्मीर में उधमपुर के दूदू-बसंतगढ़ और डोडा के भद्रवाह में सोजधार के जंगलों में शुक्रवार शाम सेना और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने सर्च ऑपरेशन चलाया। इस दौरान वहां छिपे जैश के 2-3 आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग कर दी। इस एनकाउंटर में एक जवान घायल हुआ था, जिसकी शनिवार सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई। मुठभेड़ वाले इलाके को रात भर कड़ी घेराबंदी में रखा गया। शनिवार सुबह सर्च ऑपरेशन दोबारा शुरू किया गया है। उधमपुर और डोडा दोनों तरफ से ड्रोन और खोजी कुत्तों से लैस फोर्स आतंकियों की तलाश में भेजी गई है। आतंकियों की तलाश में एक ऑपरेशन किश्तवाड़ में भी चलाया गया, जहां शुक्रवार रात से आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ जारी है। कुलगाम एनकाउंटर में शहीद हुए थे 2 जवान इससे पहले 8 सितंबर को कुलगाम में ऑपरेशन गुड्‌डर के दौरान हुए एनकाउंटर में भी 2 जवान शहीद हुए थे। शहीद जवानों में कैथल के लांसनायक नरेंद्र सिंधु और उत्तर प्रदेश के पैरा कमांडो प्रभात गौड़ का नाम शामिल था। इस मुठभेड़ में लश्कर ए तैयबा के 2 आतंकी मारे गए थे। इनमें से एक शोपियां का रहने वाला आमिर अहमद डार और दूसरा विदेशी आतंकी रहमान भाई था। आमिर लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा था और सितंबर 2023 से एक्टिव था। पहलगाम हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों की तरफ से जारी 14 आतंकवादियों की लिस्ट में यह भी शामिल था। अगस्त में हुए 2 ऑपरेशन पुंछ में मिला हथियारों का जखीरा, इनमें AK47 और 20 ग्रेनेड जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर पुलिस (JKP) के साथ एक जॉइंट ऑपरेशन के दौरान हथियारों का एक जखीरा बरामद किया। सेना के अनुसार, बरामद हथियारों में एक AK-47 राइफल, चार AK मैगजीन, 20 हैंड ग्रेनेड और अन्य हथियार शामिल हैं। ——————— ये खबरें भी पढ़ें… जैश-हिजबुल के आतंकी अब खैबर में ठिकाने बना रहे: दावा- ऑपरेशन सिंदूर के बाद PoK छोड़ रहे भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर हमलों से आतंकी डर गए हैं। अब जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन खैबर पख्तूनख्वा में अपने नए ठिकाने बना रहे हैं। भारतीय सेना के सूत्रों ने शुक्रवार को बताया कि आतंकी संगठन PoK को अब भारतीय हमलों के कारण असुरक्षित मानते हैं। इसलिए, अफगानिस्तान से सटे खैबर पख्तूनख्वा की पहाड़ी इलाके उनके लिए सुरक्षित ठिकाना बन गए हैं। पढ़ें पूरी खबर…

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