India-US Trade Deal: अमेरिका-भारत तनाव के बीच व्यापार समझौते पर अनिश्चितता, भारत ने अपनाई वैकल्पिक रणनीति
भारत और अमेरिका के बीच होने वाले द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के पहले चरण पर सितंबर-अक्टूबर तक कोई ठोस फैसला होने की संभावना कम होती दिख रही है। भारत अब यूरोपीय यूनियन (EU), ओमान, न्यूजीलैंड, और दक्षिण अमेरिका के कुछ देशों के साथ व्यापार समझौते पर फोकस कर रहा है
HighLights
सितंबर-अक्टूबर तक कोई ठोस फैसला होने की संभावना कम होती दिख रही है।
डोनाल्ड ट्रंप की लगातार धमकियों और भारत पर प्रतिकूल रुख अपनाने के चलते यह स्थिति बनी है।
भारत ने शुल्क कम करने की कोई अपील नहीं की।
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच होने वाले द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के पहले चरण पर सितंबर-अक्टूबर तक कोई ठोस फैसला होने की संभावना कम होती दिख रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लगातार धमकियों और भारत पर प्रतिकूल रुख अपनाने के चलते यह स्थिति बनी है।
अमेरिका की धमकी और भारत का रुख
अमेरिका ने भारत पर 25% पारस्परिक शुल्क लगाने के साथ-साथ रूस से तेल खरीदने के कारण भारी जुर्माने की चेतावनी दी है। इसके बावजूद भारत ने शुल्क कम करने की कोई अपील नहीं की। इसके बजाय भारत बढ़े हुए शुल्क को समायोजित करते हुए व्यापार बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।
भारत ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी हालत में कृषि, डेयरी और मत्स्य क्षेत्र को अमेरिकी बाजार के लिए नहीं खोलेगा। वहीं, अमेरिका इन क्षेत्रों के शुल्क को कम करने के लिए भारत पर दबाव बना रहा है।
25 अगस्त से अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भारत आने वाला है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि बीटीए पर वार्ता से किसी बड़े नतीजे की उम्मीद नहीं है।
भारत की वैकल्पिक योजना: नए FTA की तैयारी
अमेरिका के साथ समझौते में रुकावटों को देखते हुए भारत अब यूरोपीय यूनियन (EU), ओमान, न्यूजीलैंड, और दक्षिण अमेरिका के कुछ देशों के साथ व्यापार समझौते पर फोकस कर रहा है। ब्रिटेन के साथ हुआ नया व्यापार समझौता अगले साल से लागू होगा।
ईयू के साथ FTA होने पर भारत को 27 यूरोपीय देशों के साथ मुक्त व्यापार का अवसर मिलेगा। इससे जर्मनी, फ्रांस, इटली जैसे बड़े बाजार भारतीय वस्तुओं के लिए शुल्क-मुक्त हो जाएंगे। इससे अमेरिका में संभावित व्यापार नुकसान की भरपाई हो सकेगी।
50 से ज्यादा नए बाजार तलाशे गए
पिछले दो वर्षों में भारत ने 50 से अधिक नए बाजारों की पहचान की है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अब अमेरिकी दबाव में आने के बजाय वैकल्पिक बाजारों पर ज्यादा जोर देगा।
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