भारतीय सेना और साल 2025: ऑपरेशन सिंदूर से हाई-टेक युद्ध क्षमता तक एक निर्णायक वर्ष

Indian Army: वर्ष 2025 भारतीय सेना के लिए केवल एक कैलेंडर वर्ष नहीं, बल्कि रणनीतिक बदलाव, तकनीकी रूपांतरण और सैन्य दृढ़ता का प्रतीक बनकर उभरा. आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक अभियानों से लेकर अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों, ड्रोन युद्ध, डिजिटलीकरण और आत्मनिर्भरता तक सेना ने इस वर्ष कई ऐसे मील के पत्थर स्थापित किए, जिन्होंने भारत की सैन्य शक्ति को नई ऊंचाई दी.

ऑपरेशन सिंदूर: आतंक के खिलाफ निर्णायक संदेश

मई 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया. इस अभियान के तहत सीमा पार स्थित 9 आतंकी शिविरों को नष्ट किया गया, जिनमें 7 शिविरों पर सेना और 2 पर भारतीय वायुसेना ने सटीक प्रहार किए. इस दौरान पाकिस्तान की ओर से ड्रोन और मिसाइल हमलों की कोशिशों को भारत की एयर डिफेंस ग्रिड ने पूरी तरह नाकाम कर दिया. लगातार सैन्य दबाव के बाद 10 मई 2025 को पाकिस्तान को सीजफायर की पहल करनी पड़ी. ऑपरेशन सिंदूर भारत की डिटरेंस और एस्केलेशन कंट्रोल रणनीति का सशक्त उदाहरण बना.

लंबी दूरी की मारक क्षमता में ऐतिहासिक विस्तार

2025 में भारतीय सेना की स्ट्राइक क्षमता में बड़ा विस्तार देखने को मिला. ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफल कॉम्बैट लॉन्च किया गया, जबकि पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट सिस्टम के नए रेजिमेंट ऑपरेशनल हुए. इसके साथ ही पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट (LRGR) का 120 किलोमीटर रेंज तक सफल परीक्षण हुआ, और भविष्य में इसे 300 किलोमीटर तक बढ़ाने की दिशा में काम तेज हुआ.

आर्मी एविएशन को मिला नया धारदार हथियार

सेना की एरियल फायरपावर को मजबूती देते हुए 2025 में 6 अपाचे AH-64E अटैक हेलिकॉप्टर भारतीय सेना को सौंपे गए. इससे टैंक रोधी अभियान, क्लोज एयर सपोर्ट और नेटवर्क्ड युद्ध क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई.

नई युद्ध संरचनाएं और ड्रोन युग की तैयारी

इस वर्ष सेना ने भविष्य के युद्ध को ध्यान में रखते हुए कई नई संरचनाओं को फील्ड में उतारा. भैरव बटालियन, अशनि ड्रोन प्लाटून, शक्तिबाण रेजिमेंट और दिव्यास्त्र बैटरियां ये सभी ड्रोन, लोइटर म्यूनिशन और सटीक प्रहार प्रणालियों से लैस की गईं. इससे सेना की सेंसर-टू-शूटर क्षमता को नई धार मिली.

खरीद, आत्मनिर्भरता और टेक-एब्जॉर्प्शन ईयर

भारतीय सेना ने 2024–25 को ‘टेक एब्जॉर्प्शन ईयर’ के रूप में मनाया. इस दौरान गोला-बारूद की 91% स्वदेशी उपलब्धता सुनिश्चित की गई.
3000 से अधिक लॉजिस्टिक, सर्विलांस और कामिकाजे ड्रोन शामिल किए गए. काउंटर-ड्रोन सिस्टम, नाइट फाइटिंग उपकरण और आधुनिक संचार प्रणालियों को तेजी से शामिल किया गया. 

डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और डेटा-ड्रिवन वॉरफेयर

2025 में सेना ने डिजिटल परिवर्तन को भी गति दी. एज डेटा सेंटर्स की स्थापना, सैनिकों के लिए इन-हाउस मोबाइल एप्लिकेशन और तेज डेटा-टू-डिसीजन प्रणाली ने कमांड और कंट्रोल को अधिक प्रभावी बनाया. इससे निर्णय लेने की गति और सटीकता दोनों में सुधार हुआ.

रणनीतिक सोच और भविष्य की युद्ध तैयारी

जैसलमेर में आयोजित आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में ग्रे जोन वॉरफेयर, संयुक्तता , साइबर और स्पेस डोमेन पर विशेष ध्यान दिया गया. सेना ने स्पष्ट संकेत दिया कि भविष्य के युद्ध केवल जमीन तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि मल्टी-डोमेन होंगे.

वैश्विक सैन्य सहयोग और अभ्यास

2025 में भारत ने फ्रांस, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूके, यूएई और श्रीलंका सहित कई देशों के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास किए. इससे इंटरऑपरेबिलिटी, सामरिक भरोसा और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को मजबूती मिली.

इनो-योद्धा: नवाचार की रीढ़

सेना की इनोवेशन पहल इनो-योद्धा के तहत 89 नवाचार प्रस्तुत किए गए, जिनमें से 32 को आगे विकास और फील्ड ट्रायल के लिए चुना गया. यह सेना की समस्या-आधारित नवाचार नीति को दर्शाता है.

वर्ष 2025 ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारतीय सेना अब केवल परंपरागत युद्ध बल नहीं, बल्कि हाई-टेक, ड्रोन-संचालित, डेटा-आधारित और आत्मनिर्भर फोर्स बन चुकी है. ऑपरेशन सिंदूर से लेकर स्वदेशी हथियार प्रणालियों और डिजिटल युद्ध तक यह वर्ष भारतीय सेना के लिए रिफॉर्म से ट्रांसफॉर्मेशन का निर्णायक अध्याय साबित हुआ.

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