ट्रंप प्रशासन में भारतवंशियों और मंदिरों को बनाया जा रहा निशाना, ऑनलाइन ट्रोलिंग के मामले 91 % बढ़े
अमेरिका में ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के साथ ही भारतीय मूल के लोगों और दक्षिण एशियाई समुदाय के खिलाफ नफरत के मामलों में तेज उछाल देखने को मिला है। अक्टूबर 2025 तक ऑनलाइन ट्रोलिंग के मामले 91 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। वीजा नीतियों और प्रवासियों पर चल रही सियासी बहसों के बीच भारतीयों को ‘नौकरियां छीनने वाले’ कहकर निशाना बनाया जा रहा है।
HighLights
H-1B वीजा को लेकर मिल रहीं धमकियां
भारतीयों के निर्वासन ने माहौल को और बिगाड़ा
सिर्फ एक साल में ट्रोलिंग के मामले 88,000 तक पहुंचे
अमेरिका में ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के साथ ही भारतीय मूल के लोगों और दक्षिण एशियाई समुदाय के खिलाफ नफरत के मामलों में तेज उछाल देखने को मिला है। अक्टूबर 2025 तक ऑनलाइन ट्रोलिंग के मामले 91 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं।
वीजा नीतियों और प्रवासियों पर चल रही सियासी बहसों के बीच भारतीयों को ‘नौकरियां छीनने वाले’ कहकर निशाना बनाया जा रहा है। वीजा और नौकरियों को लेकर भी धमकियां बढ़ गई हैं। H-1बी वीजा शुल्क में वृद्धि और भारतीयों के निर्वासन ने माहौल को बिगाड़ दिया, जिससे मंदिरों पर भी हमले और गोलीबारी की घटनाएं सामने आई हैं।
ट्रंप सरकार द्वारा एच-1B वीजा शुल्क बढ़ाने और कई भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट करने के फैसले ने माहौल को और भड़काया। नतीजा सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक, भारतवंशियों के खिलाफ घृणा अभियानों में लगातार इज़ाफा हुआ है।
बाइडेन काल में था नियंत्रण
‘सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ ऑर्गनाइज्ड हेट’ की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, बाइडेन शासन के दौरान दक्षिण एशियाई लोगों के खिलाफ ऑनलाइन नफरत और धमकियों के मामले अपेक्षाकृत सीमित रहे।
अक्टूबर 2024 तक केवल 46,000 ट्रोलिंग पोस्ट और 884 धमकियों के मामले दर्ज किए गए थे। लेकिन ट्रंप की वापसी के बाद स्थिति पलट गई। सिर्फ एक साल में ट्रोलिंग के मामले 88,000 तक पहुंच गए। यानी हेट ट्रेंड में 91% की वृद्धि। नस्लभेद का यह ट्रेंड पूरे दक्षिण एशियाई समुदाय को अपना निशाना बना रहा है।
‘नौकरियां छीनने’ की बहस बनी हिंसा की वजह
रिपोर्ट बताती है कि दिसंबर 2025 में ट्रंप, एलन मस्क और विवेक रामास्वामी के बीच हुए वीज़ा और माइग्रेंट डिबेट के बाद माहौल और गरम हो गया। 76 प्रतिशत धमकियां ‘नौकरियां छीनने’से जुड़ी थीं। एच-1बी वीज़ा शुल्क में वृद्धि और 104 भारतीयों के डिपोर्टेशन के फैसले के बाद टेक्सास, वर्जीनिया और कैलिफ़ोर्निया में गोलीबारी और मंदिरों पर हमलों के मामले भी बढ़े हैं। सोशल मीडिया पर नस्लभेदी पोस्ट्स और ‘भारतीयों को देश से निकालो’ जैसे ट्रेंड फिर से उभर आए हैं।
दक्षिण एशियाई समुदाय पर सामूहिक निशाना
रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि यह नफरत केवल भारतीयों तक सीमित नहीं है। पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका मूल के लोगों को भी ट्रोलिंग और हिंसा का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में प्रवासियों के खिलाफ बढ़ती नाराजगी अब दक्षिणपंथी राजनीति की पहचान बन चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच अमेरिका के कई शहरों में भारतीय समुदाय के लोगों को निशाना बनाया गया। कैलिफोर्निया में पूरे साल मंदिरों पर हमले किए गए। वहीं, ओहायो, इलिनॉय और इंडियाना राज्यों में हेट क्राइम के मामले सामने आए।
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भारतीय समुदाय पर हुए हमले
इसी वर्ष फरवरी, 2025 में वर्जीनिया में एक भारतीय-अमेरिकी कारोबारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद मार्च, 2025 में एक किराना स्टोर पर हुए हमले में पिता-पुत्री की मौत हो गई। इसके अलावा सितंबर, 2025 में टेक्सास के डलास में दो छात्रों और श्रमिकों की हत्या का मामला सामने आया। यही नहीं, हाल ही में चंद्रमौली नागमल्लैया की सिर काटकर हत्या ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया। पेंसिल्वेनिया के पिट्सबर्ग में अक्टूबर 2025 में एक मोटेल पर गोलीबारी में भी हमलावरों द्वारा भारतीय मूल के मालिक और कर्मचारियों को निशाना बनाया गया।
ट्रंप प्रशासन में भारतवंशियों और मंदिरों को बनाया जा रहा निशाना, ऑनलाइन ट्रोलिंग के मामले 91 % बढ़े
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