इंडियन ओसियन में बढ़ेगी भारत की धाक, रूस से लेने जा रहा है Nuclear-powered attack submarine
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भारत अपनी समुद्री सुरक्षा और दूरगामी सैन्य क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा है. सूत्रों के अनुसार, भारत रूस से एक और परमाणु-संचालित अटैक सबमरीन (SSN) लीज पर लेने की योजना बना रहा है. अगर यह समझौता अंतिम रूप ले लेता है तो यह रूस से ली जाने वाली भारत की तीसरी SSN सबमरीन होगी. इस पनडुब्बी को भारतीय नेवी में शामिल किए जाने की संभावित समयसीमा 2027 या 2028 बताई जा रही है.
अकुला-श्रेणी की पनडुब्बी होगी INS चक्र III
इस पनडुब्बी का आधार रूस की उन्नत अकुला-श्रेणी होगी, जिसे भारतीय नौसेना की आवश्यकताओं के अनुसार मॉडर्नाइज किया जाएगा. इसमें भारत द्वारा विकसित सेंसर, कम्युनिकेशन सिस्टम और हथियार नियंत्रण तकनीकें लगाई जाएंगी, जिससे यह भारतीय ऑपरेटिंग डॉक्ट्रिन के अनुरूप काम कर सके. नौसेना में शामिल होने के बाद इसे INS चक्र III के नाम से जाना जाएगा. यह नाम उस ट्रडिशन को आगे बढ़ाएगा जिसमें भारत ने पहले भी दो परमाणु-संचालित पनडुब्बियां रूस से लीज पर ली थीं.
इसके पहले भारत ने 2012 में रूस से INS चक्र (पूर्व में नेरपा) को 10 साल के लिए लीज पर लिया था. यह सबमरीन 2022 में लीज अवधि पूरी होने पर रूस को वापस कर दी गई थी. नई सबमरीन इसी श्रेणी की अधिक उन्नत और भारत के लिए कस्टमाइज्ड संस्करण होगी.
रूस की ओर से 2028 तक रिफिट पूरा होने का भरोसा
रूसी पक्ष ने भारत को आश्वस्त किया है कि सबमरीन का रिफिट और सभी तकनीकी अपग्रेड 2028 तक पूरे कर दिए जाएंगे. वहीं, भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि नौसेना तैयार है और यदि उपलब्धता समय से पहले मिलती है तो 2027 तक इसे बेड़े में शामिल किया जा सकता है. गुरुवार को होने वाली भारत-रूस रक्षा मंत्रियों की द्विपक्षीय वार्ता में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है.
कैसी होगी ऑपरेशनल क्षमता
परमाणु-संचालित अटैक सबमरीन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह हफ्तों तक पानी के भीतर रह सकती है, जिससे इसकी स्टील्थ और ऑपरेशनल रेंज दोनों अत्यधिक बढ़ जाती हैं. यह बिना सतह पर आए लंबी दूरी की सामरिक समुद्री निगरानी, एंटी-सबमरीन मिशन और स्ट्राइक ऑपरेशन संचालित कर सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार, यह क्षमता भारतीय नौसेना की डिटरेंस स्ट्रेटजी और इंडियन ओशन रीजन में ताकत दोनों को कई गुना बढ़ाएगी.
यह सबमरीन पारंपरिक हथियारों से लैस होगी और इसका मुख्य उपयोग शत्रु की पनडुब्बियों, युद्धपोतों व रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने में किया जाएगा. भारत के समुद्री क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए ऐसी सबमरीन का होना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.
रूस-भारत रक्षा वार्ता में S-400 पर भी चर्चा संभव
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने संकेत दिया है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की आगामी यात्रा के दौरान S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की डिलीवरी और अन्य रक्षा सहयोग पर भी अहम चर्चा हो सकती है. इससे भारत-रूस रक्षा साझेदारी और अधिक मजबूत होने की संभावना है.
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