IndiGo Crisis: कैसे इंडिगो बनी देश की नंबर-1 Airlines? किराए के प्लेन से शुरु हुआ था सफर, जानिए पूरी कहानी

IndiGo Crisis: देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो भारी संकट से गुजर रही है. लगातार पांचवें दिन 400 से ज्यादा उड़ानें रद्द हो चुकी हैं. हजारों यात्री एयरपोर्ट पर फंसे हुए हैं और कई यात्रियों की जरूरी योजनाएं बिगड़ गई हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को स्थिति की पूरी जानकारी भेजी गई है. नागरिक उड्डयन मंत्री ने आपात बैठक बुलाकर इंडिगो को निर्देश दिया है कि वह आज (7 दिसंबर) रात 8 बजे तक सभी प्रभावित यात्रियों का पूरा पैसा वापस करे.

एयरपोर्ट पर हालात काफी खराब हैं- कई लोग कई दिनों से वहीं रुके हुए हैं. वैकल्पिक फ्लाइट लेने की कोशिश करें तो टिकट के दाम बहुत अधिक हैं. यात्रियों का कहना है कि शादी, कार्यक्रम और बिजनेस मीटिंग्स रद्द करनी पड़ रही हैं.

लेकिन क्या आपको पता है इस समय जमीन पर आई इंडिगो कैसे देश की नंबर वन एयरलाइन बनी? तो आइए विस्तार से जानते हैं इस बारे में.

देश की सबसे बड़ी एयरलाइन

2006 में इंडिगो ने भारतीय एविएशन को बदल डाला था. उस समय इसे सस्ती और समय पर उड़ान देने वाली एयरलाइन के रूप में जाना गया. आज भारत के उड्डयन बाजार में इंडिगो का दबदबा है. पूरे एविएशन सेक्टर में लगभग 60% से ज्यादा शेयर इंडिगो के पास है. मतलब यदि 10 लोग हवाई सफर करते हैं, तो 6 लोग इंडिगो में यात्रा करते हैं. इंडिगो के विमान हर दिन 2700 से ज्यादा उड़ानें भरते हैं, इसलिए कुछ फ्लाइटें भी रद्द होने पर पूरे देश की उड़ान व्यवस्था प्रभावित हो जाती है.

इंडिगो की शुरुआत कैसे हुई?

इंडिगो को राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल ने शुरू किया. शुरुआत में इंडिगो के पास सिर्फ एक ही प्लेन था. उस समय जेट एयरवेज, एयर इंडिया और किंगफिशर जैसी बड़ी कंपनियां बाजार पर राज कर रही थीं, लेकिन इंडिगो ने मेहनत, प्लानिंग और किफायती सेवा के दम पर शून्य से सफलता का सफर तय किया.

राहुल भाटिया 1984 में कनाडा से पढ़ाई करके लौटे थे. पिता की टिकट बुकिंग एजेंसी में मुश्किलों के कारण उन्हें बिजनेस संभालना पड़ा. 1992 में जब निजी एयरलाइंस को लाइसेंस मिलने लगे तो राहुल ने इस क्षेत्र में आने का फैसला किया. इसी दौरान उनकी मुलाकात अमेरिकी एविएशन विशेषज्ञ राकेश गंगवाल से हुई.

दोनों ने 2004 में इंटरग्लोब एविएशन बनाई और एयरलाइन का नाम इंडिगो रखा. आर्थिक मुश्किलों के बावजूद दोनों ने 4% डाउन पेमेंट पर 100 एयरबस विमानों का ऑर्डर दिया, और 28 जुलाई 2006 को पहला विमान मिला. सिर्फ एक हफ्ते बाद 4 अगस्त 2006 को पहली उड़ान भरी गई और यह दिन इतिहास बन गया.

किराए के प्लेन से की शुरुआत

इंडिगो ने शुरुआत में एयरबस से 100 विमान खरीदने का बड़ा फैसला किया. उस समय बाकी भारतीय एयरलाइंस बोइंग के प्लेन इस्तेमाल करती थीं. एयरबस ने इंडिगो के लिए 40-50% डिस्काउंट पर प्लेन बनाए. बाद में इंडिगो ने सभी विमान बेचकर 200 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया और फिर उन्हें लीज पर लेकर ऑपरेट करना शुरू किया. इसी रणनीति ने उसे तेजी से बढ़ने में मदद की.

‘इंडिगो’ नाम कैसे रखा गया?

इसका नाम ‘India on the Go’ के आधार पर रखा गया, जिसे छोटा करके IndiGo कर दिया गया. आपको बता दें कि इंडिगो भारत ही नहीं, एशिया की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन है. हर दिन हजारों लोग इंडिगो के साथ यात्रा करते हैं, इसलिए इसे ‘किंग ऑफ एयरलाइंस’ कहा जाता है.

क्यों मिली सफलता?

इंडिगो ने मध्यम वर्ग को ध्यान में रखकर फैसले लिए:-

  • कम किराया और भरोसेमंद सेवा

  • इकोनॉमी सीटें बढ़ाईं

  • कम खर्च और समय पर उड़ान

  • बिना फालतू सुविधाओं के उपयोगी सेवा

  • कुशल प्रबंधन और विकास पर ध्यान

IndiGo का विस्तार

वर्ष उपलब्धि
2011 नए एयरबस A320 का ऑर्डर
2015 100 विमानों का ऑर्डर
2019 250 नए विमान का ऑर्डर
2023 500 विमानों का रिकॉर्ड ऑर्डर
2025 61.4% मार्केट शेयर, 34 घरेलू और 43 अंतरराष्ट्रीय रूट

 

क्यों बिगड़ी स्थिति?

2022 में कंपनी में नीतियों को लेकर राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल के बीच विवाद गहरा गया. राकेश ने इंडिगो को “पान की दुकान” कहते हुए इस्तीफा दे दिया. इसके बाद कंपनी मुश्किलों में घिरती गई. आज इंडिगो का साम्राज्य 73,000 करोड़ का है, लेकिन सिर्फ पांच दिन की गड़बड़ी ने इसे जमीन पर ला दिया.

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