यूपी – ‘कब्रिस्तान बना आशियाना’: जीना मुश्किल था उनके बिना, कब्रों के बीच थमीं सांसें, बोले थे- फातिहा पढ़ आता हूं, और – INA

जब तक रजिया जीवित थी। सुभान अहमद को अपने पैरों पर खड़े होने और चलने के लिए पत्नी के सहारे की जरूरत थी लेकिन 11 दिन पहले जब पत्नी व बेटे की मौत हुई तो सुभान बिना किसी मदद के खड़े होने लगे और अकेले ही चलकर उनकी कब्र पर पहुंच रहे थे। पत्नी व बेटे को खोने के गम में वह टूटे हुए थे।
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ससुरालीजनों को यकीन नहीं हुआ कि उनके दामाद अब दोबारा वापस नहीं आएंगे। सुभान के जाने से अब उनके तीन बच्चों की जिम्मेदारी उनके ससुरालीजनों यानी ननिहाल पक्ष पर आ गई है। मृतक के साले सलीम ने बताया कि जब परिवार हरपालपुर में रहता था] तो रजिया खातून ही पति की देखभाल करती थी।