Delhi-Ncr लाइब्रेरी विवाद पर JNUSU और प्रशासन आमने-सामने, जानें क्या है पूरा मामला- #INA

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) ने शुक्रवार को कहा कि हमारे पदाधिकारियों और छात्र कार्यकर्ताओं को चुप कराने और धमकाने के उद्देश्य से, जेएनयू प्रशासन ने लाइब्रेरी में निगरानी का विरोध करने पर पदाधिकारियों और पूर्व जेएनयूएसयू अध्यक्ष के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है.

जेएनयूएसयू ने कहा कि हम सभी जानते हैं कि निधि में कटौती और प्रशासनिक उदासीनता के कारण जेएनयू का बी.आर. अंबेडकर केंद्रीय पुस्तकालय दयनीय स्थिति में है. वर्षों से छात्र अधिक पुस्तकों, अधिक बैठने की क्षमता और पुस्तकालय के खुलने के समय में वृद्धि की मांग कर रहे हैं.

प्रशासन ने गुपचुप तरीके से गेट लगवाया

छात्रों की मांगों पर ध्यान न देते हुए, प्रशासन ने अपने सीमित संसाधनों को चेहरे की पहचान करने वाले कैमरों और चुंबकीय द्वारों पर खर्च करने का निर्णय लिया है, ताकि छात्रों की आवाजाही को प्रतिबंधित किया जा सके और उनकी निजता का उल्लंघन किया जा सके. पिछले साल अगस्त में प्रशासन ने गुपचुप तरीके से ये गेट लगवा दिए थे. तत्कालीन जेएनयूएसयू अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और महासचिव के साथ बड़ी संख्या में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया और प्रशासन को इन निगरानी उपकरणों को हटाने के लिए मजबूर होना पड़ा.

स्वतंत्र समिति का गठन

पुस्तकालय अध्यक्ष और प्रशासन के अन्य अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि लाइब्रेरी में चुंबकीय गेटों के संबंध में कोई भी कार्रवाई करने से पहले छात्रों के प्रतिनिधित्व वाली एक स्वतंत्र समिति का गठन किया जाएगा. अपने ही आश्वासनों का उल्लंघन करते हुए, उसी प्रशासन ने इन गेटों को उस समय दोबारा लगवा दिया जब पूरा छात्र समुदाय नवंबर 2025 में हुए जेएनयूएसयू चुनावों में व्यस्त था. इस बार नव निर्वाचित जेएनयूएसयू ने विरोध प्रदर्शन किया. लेकिन प्रशासन यहीं नहीं रुका.

उन्होंने न केवल अंधाधुंध प्रॉक्टोरियल नोटिस जारी किए, बल्कि जेएनयूएसयू अध्यक्ष अदिति, उपाध्यक्ष गोपिका, महासचिव सुनील और संयुक्त सचिव दानिश के साथ-साथ पूर्व जेएनयूएसयू अध्यक्ष नीतीश कुमार के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई.

दिल्ली पुलिस पर लगाया आरोप

अब दिल्ली पुलिस ने जेएनयू प्रशासन द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर उन्हें जांच नोटिस भेजा है. दिल्ली पुलिस बार-बार जेएनयू प्रशासन की छात्र विरोधी नीतियों का समर्थन करती रही है. यह ताजा मामला भी इसका अपवाद नहीं है. जेएनयूएसयू इस घृणित हमले की कड़ी निंदा करता है और मांग करता है कि ऐसे सभी निराधार मामले तत्काल प्रभाव से वापस लिए जाएं.

लाइब्रेरी विवाद पर JNUSU और प्रशासन आमने-सामने, जानें क्या है पूरा मामला

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