UP News: ट्रंप कै टैरिफ से निपटने के लिए कानपुर के कारोबारियों ने कसी कमर, इस देश से मिल रहे ऑफर्स – INA


अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ के बाद पूरी दुनिया में हलचल मची हुई है. इसमें सबसे ज्यादा बात भारत की हो रही है क्योंकि एक तरह से ट्रंप ने धमकी देते हुए भारत पर 50% का टैरिफ लगा दिया है. ट्रंप के इस मनमाने निर्णय के बाद कानपुर के कारोबारियों ने भी इससे निपटने के लिए कमर कस ली है. एक तरफ लेदर कारोबारियों के पास रूस से ऑफर आ रहे हैं वहीं दूसरी तरफ केमिकल के कारोबारियों ने ट्रेड फ्री देशों की तरफ जाने का मन बना लिया है. हालांकि कारोबारियों का यह मानना है कि टैरिफ की वजह से कुछ समय के लिए दिक्कत जरूर होगी लेकिन वह फिर भी अपनी सरकार के साथ हैं.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डिक्टेटरशिप दिखाते हुए भारत से कहा कि वो रूस से तेल की खरीददारी ना करे. जब देश की सरकार ने इस मनमाने आदेश को मानने से इनकार कर दिया तो डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के ऊपर पहले 25% और फिर उसके बाद 25% यानी कुल 50% का टैरिफ लगा दिया. इस वजह से देश के कारोबारियों में काफी नाराजगी है. अगर हम कानपुर की बात करें तो यहां से भारी मात्रा में लेदर का कारोबार अमेरिका के साथ होता है. ऐसे में टैरिफ बढ़ने की वजह से लेदर कारोबारियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा. एक तरफ रूस से खरीददारों का ऑफर आना शुरू हुआ है, दूसरी तरफ कारोबारी भी ट्रेड फ्री देशों की तरफ रुख कर रहे हैं.
रूस से मिल रहे नए ऑफर्स
काउंसिल ऑफ लेदर एक्सपोर्ट के जावेद इकबाल ने बताया कि कानपुर और उन्नाव को मिलाकर करीब 2000 करोड़ का कारोबार अमेरिका से होता है. ऐसे में अगर टैरिफ रहा तो कारोबार करने में बहुत परेशानी आ जाएगी. उन्होंने कहा कि रूस से पहले से कारोबार हो रहा है जो करीब 1000 करोड़ का है. अब वहां के कारोबारियों के ऑफर आना शुरू हो गए हैं और रूस से कारोबार बढ़ने की उम्मीद है. जावेद इकबाल ने बताया कि पाकिस्तान, कंबोडिया जैसे देशों का टैरिफ कम रखा गया है जिसकी वजह से ऑर्डर्स वहां शिफ्ट होने की आशंका है. उन्होंने कहा कि वह सरकार के साथ हैं और टैरिफ नहीं हटा तो वह भी ऑस्ट्रेलिया, दुबई, यूके जैसे ट्रेड फ्री देशों की ओर रुख करेंगे. जावेद इकबाल ने बताया कि यूएस का डेलिगेशन सरकार से मिलने आने वाला है उसके बाद कोई निर्णय लिया जाएगा. जावेद इकबाल ने माना कि यह डोनाल्ड ट्रंप की डिक्टेटरशिप है और कोई देश हमको नहीं बता सकता कि हमको तेल कहां से खरीदना है.
ट्रेड फ्री देश पहली पसंद
दूसरी तरफ केमिकल का भी बड़ा कारोबार यूपी और कानपुर से होता है. यूपी डाई एंड केमिकल मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन के महामंत्री आर के सफड़ ने बताया कि यूपी से डाई, पिगमेंट, एग्रो केमिकल, अमीनो कंपाउंड जैसे कई केमिकल बाहर के देशों में एक्सपोर्ट होते है. ट्रंप का टैरिफ बढ़ने से केमिकल के कारोबारियों को दिक्कत होगी. उन्होंने बताया कि दूसरे ट्रेड फ्री देशों की तरफ उन्होंने रुख करना शुरू कर दिया है. उन्होंने कहा कि ट्रंप की धमकियों के आगे वह झुकने वाले नहीं है और हम ऐसे देशों से व्यापार शुरू करेंगे जहां टैरिफ नहीं है। हालांकि उन्होंने माना कि इसमें कुछ महीनों का समय लग सकता है और तब तक निश्चित तौर पर कुछ परेशानियां आएंगी। उन्होंने बताया कि हमारे यहां बनने वाले केमिकल कई ऐसे केमिकल है जो मेडिसिन, प्लास्टिक, फर्टिलाइजर इत्यादि में काम आते है.
दोनों का बराबर जरूरतें
कानपुर के कारोबारियों का यह साफ तौर पर कहना है कि यह डोनाल्ड ट्रंप की डिक्टेटरशिप है. उनका यह मानना है कि जितना हमको बेचने की जरूरत है उतना ही उनको खरीदने की जरूरत है..भारत से कारोबार को कम करके अमेरिका का ज्यादा नुकसान होने वाला है. कारोबारियों का मानना है कि कुछ समय के लिए दिक्कत जरूर हो सकती है लेकिन उसके बाद पूरी दुनिया पड़ी है कारोबार करने के लिए. जो हमको ज्यादा सुविधाएं देगा हम उसके साथ काम करेंगे.
ट्रंप कै टैरिफ से निपटने के लिए कानपुर के कारोबारियों ने कसी कमर, इस देश से मिल रहे ऑफर्स
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