खबर फिली – वो बंगाली फिल्म, जिसे भारत में सबसे पहले होना पड़ा बैन का शिकार – #iNA @INA

बॉलीवुड में अक्सर फिल्मों को लेकर बायकॉट की बात सुनने को मिल जाती है. जब से अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत हुई है, तब से तो इसको काफी जोर मिला है. अक्सर किसी न किसी बात पर बॉलीवुड की फिल्मों का विरोध किया जाता रहा है. यही वजह है कि कुछ फिल्मों को छोड़ दें तो पिछले काफी वक्त से कई बड़े स्टार्स की मूवीज ने भी बढ़िया परफॉर्म नहीं किया है. हालांकि इंडिया में इसका चलन नया नहीं है. यह बहुत पुराने समय से होता चला आया है.

कुछ वक्त पहले जब साउथ वर्सेज बॉलीवुड की बहस छिड़ी तब भी लोगों ने कई हिंदी फिल्मों का विरोध किया था और साउथ की मूवीज को खूब प्यार दिया. उस समय भी बायकॉट बॉलीवुड चला करता था. हालांकि धीरे-धीरे ये चलन कम होता गया.

सबसे पहले इस फिल्म का हुआ विरोध

भारत में फिल्मों का विरोध करने और उनको बायकॉट करने का सिलसिला पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु के जमाने चल रहा है. आज से करीब 66 साल पहले आजाद भारत में 1958 में एक बंगाली फिल्म ‘नील अकाशर नीचे’ रिलीज हुई थी. मृणाल सेन की इस फिल्म को लेकर देश में बहुत विरोध हुआ था. मामला इतना बढ़ गया कि फिल्म पर बैन लगाना पड़ गया.

तीन महीने बाद हुई रिलीज

‘नील आकाशर नीचे’ को लेकर कहा जा रहा था कि इसमें काफी संवेदनशील मुद्दे पर बात की गई है. इसी वजह से फिल्म को तीन महीने के लिए बैन कर दिया गया था. तीन महीने के बाद जब ये रिलीज हुई तो लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं.

यह फिल्म महादेवी वर्मा की किताब चीनी फेरीवाला पर बेस्ड थी. इस बंगाली फिल्म में स्मृति बिस्वास, काली बनर्जी, बिकाश रॉय और मंजू डे जैसे कलाकार नजर आए थे.


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