नेता जी सँभल कर कहीं पुलिस की छवि खराब करने के चक्कर मे खुद के हाथ मत जला लेना, मनगढ़ंत आरोपों से मंटोला पुलिस की छवि धूमिल करने की कोशिश!

आगरा। एक राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी के कथित नेता के द्वारा घटिया मामू-भांजा क्षेत्र में अतिक्रमण और अवैध वसूली को लेकर लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार और भ्रामक प्रतीत होते हैं, जिनका एकमात्र उद्देश्य मंटोला पुलिस की छवि को जानबूझकर खराब करना है।

यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि बिना किसी ठोस प्रमाण के इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना बयान दिए जा रहे हैं, जो पुलिस के मनोबल को तोड़ने का काम करते हैं।

एक फर्जी बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे न्यूज़ पोर्टल पर लगी पोस्ट में दावा किया है कि बशीर होटल से मीरा हुसैनी चौराहा तक कुछ लोग सड़क पर कुर्सियां डालकर बैठते हैं और दुर्घटना होने पर मोटी रकम वसूलते हैं। ये आरोप मनगढ़ंत और सच्चाई से कोसों दूर हैं। मंटोला पुलिस अपने क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अतिक्रमण हटाने के लिए लगातार प्रयासरत रहती है। यदि ऐसी कोई गतिविधि वास्तव में हो रही होती, तो पुलिस निश्चित रूप से उस पर तत्काल कार्रवाई करती।

सबसे हास्यास्पद बात तो यह है कि ये आरोप ऐसे लोगों द्वारा लगाए जा रहे हैं जो मस्जिदों को अपनी जागीर समझते हैं, जिनके घर की रोटियां मस्जिदों के चढ़ावे से चलती हैं, जो लोगों द्वारा मस्जिदों में दान किए गए पैसों को अपने घर में लगाते हैं, और यहाँ तक कि मस्जिदों में लगे एयर कंडीशनर तक बेच खाते हैं। नमाज़ के बाद चंदे के लिए लोगों पर दबाव बनाने वाले ऐसे लोगों का पुलिस पर सवाल उठाना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है और एक गलत संदेश देता है।

वहीं लोगो ने ऐसे फर्जी पोर्टल जो बिना रजिस्ट्रेशन बिना पत्रकारिता के नियमो को पूरा करे चल रहे हैं कि जांच करा कर कार्यवाही के लिए आगरा पुलिस कमिश्नर, जिला अधिकारी, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय आदि से मांग की है ताकि अपने कर्तव्यों का पालन कर रही पुलिस फोर्स के मनोबल पर गलत असर डालने वाले फर्जी पोर्टल पर कार्यवाही की जाए ।

यह स्पष्ट रूप से मंटोला पुलिस के समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा पर सवाल उठाने का एक ओछा प्रयास है। ऐसे समय में जब पुलिसकर्मी दिन-रात जनता की सेवा में लगे हैं, इस तरह के गलत और नकारात्मक प्रचार से उनकी मेहनत को कम आंकना अत्यंत निंदनीय है। हम आशा करते हैं कि भविष्य में ऐसे भ्रामक आरोप लगाने से पहले तथ्यों की पुष्टि की जाएगी, ताकि जनता में गलत संदेश न जाए और पुलिस के प्रति अविश्वास पैदा न हो।

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