मणिपुर की नई डिप्टी सीएम नेमचा किपगेन का विरोध:कुकी ग्रुप्स ने बंद बुलाया: आज से विधानसभा का सत्र शुरू होगा- INA NEWS

मणिपुर में आज से विधानसभा का नया सत्र शुरू हो रहा है। यह सत्र नए मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के शपथ ग्रहण के एक दिन बाद बुलाया गया है। राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने गुरुवार शाम 4 बजे से सत्र बुलाया है। इधर, दिल्ली में बुधवार शाम को कुकी-जो समूह से जुड़े लोगों ने मणिपुर भवन के बाहर प्रदर्शन किया। मणिपुर में जॉइंट फोरम ऑफ सेवन (JF7) ने शुक्रवार को सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक कुकी बहुल इलाकों में बंद का आह्वान किया है। ये विरोध प्रदर्शन कुकी समुदाय से आने वाली उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन का किया जा रहा है। कुकी-जो परिषद ने कहा है कि यदि समुदाय का कोई विधायक सामूहिक फैसले के खिलाफ सरकार में शामिल होता है, तो उसके फैसले की जिम्मेदारी संगठन की नहीं होगी। बीरेन सरकार में मंत्री रह चुकी हैं नेमचा किपगेन नेमचा किपगेन कांगपोकपी से भाजपा विधायक हैं और इससे पहले बीरेन सिंह सरकार में सामाजिक कल्याण, सहकारिता, वाणिज्य, उद्योग और वस्त्र विभाग की मंत्री रह चुकी हैं। जातीय हिंसा के दौरान इम्फाल में उनका सरकारी आवास जला दिया गया था। वे उन 10 कुकी-जो विधायकों में शामिल हैं, जिन्होंने पहाड़ी क्षेत्रों के लिए अलग प्रशासन की मांग की थी। नेमचा के उपमुख्यमंत्री बनने के बाद मणिपुर के कुकी बहुल कांगपोकपी जिले में बुधवार रात प्रदर्शन हुए। लेइमाखोंग के पास प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर टायर जलाकर विरोध जताया। कुछ कुकी संगठनों ने भी समुदाय के विधायकों को सरकार गठन से दूर रहने की चेतावनी दी है। युमनाम खेमचंद बीरेन सिंह के नजदीकी, लेकिन कट्‌टर मैतेई नहीं युमनाम खेमचंद सिंग्जामेई क्षेत्र (इंफाल वेस्ट) से भाजपा विधायक हैं। 2017-2022 तक मणिपुर विधानसभा स्पीकर रहे। 2022 में पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह की दूसरी सरकार में मंत्री रहे। वे मैतेई समुदाय से आते हैं, जो मणिपुर के घाटी क्षेत्र में बहुसंख्यक हैं। बीरेन सिंह के साथ नजदीकी भी हैं। हाल के महीनों में वे शांति प्रयासों में सक्रिय रहे हैं। मई 2023 हिंसा के बाद दिसंबर 2025 में कुकी बहुल इलाकों और रिलीफ कैंप का दौरा करने वाले वे पहले मैतेई नेता हैं। बीरेन सिंह की तुलना में मध्यमार्गी माने जाते हैं। यही बात इन्हें कट्टर मैतेई लाइन से अलग करती है। कुकी-मैतेई समुदाय के बीच हिंसा की 3 मुख्य कारण 1. ST (अनुसूचित जनजाति) दर्जे की मांग: 14 अप्रैल 2023 को मणिपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मैतेई समुदाय के लिए ST का दर्जा देने पर सिफारिश भेजने का निर्देश दिया था। इस आदेश के बाद कुकी समुदाय में आक्रोश फैला और हिंसा भड़की। कुकी पहले से ST श्रेणी में है। उन्हें डर है कि अगर मैतेई को भी ST का दर्जा मिला, तो वे पहाड़ी इलाकों में जमीन खरीद सकेंगे और इससे उनका सांस्कृतिक, सामाजिक और भौगोलिक अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। मणिपुर के इंफाल घाटी में लगभग 10% भूमि क्षेत्र है, जहां मैतेई बहुसंख्यक रहते हैं। बाकी 90% पहाड़ी इलाका कुकी और नगा समुदायों का है। यह क्षेत्र आदिवासी जमीन (Tribal Lands) के अंतर्गत आता है और मैतेई यहां जमीन नहीं खरीद सकते। 2. अलग कुकी प्रशासन की मांग: कुकी समुदाय ‘कुकीलैंड’ या ‘जूमलैंड’ नाम से अलग प्रशासनिक स्वायत्तता की मांग कर रहे हैं । मैतेई समुदाय और राज्य सरकार इस मांग को राज्य की अखंडता के लिए खतरा मानती है। 3. कुकी पर ड्रग्स तस्करी का आरोप: कुकी समुदाय पर म्यांमार से ड्रग्स की तस्करी का आरोप लगता रहा है। सरकार ने भी कुकी पर अवैध अफीम की खेती की तस्करी में शामिल होने का आरोप लगाया, जिससे सरकार के प्रति उनका अविश्वास और बढ़ गया। कुकी का मानना है कि उनके समुदाय को बदनाम करने के लिए ऐसे आरोप लगाए जाते हैं। कुकी समुदाय का आरोप है कि मणिपुर सरकार (पूर्व भाजपा सरकार) मैतेई का पक्ष लेती है। वे सुरक्षाबलों और पुलिस पर भी एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाते हैं। —————- मणिपुर हिंसा से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… मणिपुर में मैतेई शख्स की गोली मारकर हत्या, VIDEO: आदिवासी महिला के साथ अफेयर था; आरोपियों ने पहले बात की, फिर शूट कर दिया मणिपुर- 3 साल पहले गैंगरेप की शिकार युवती की मौत: सदमे में थी; 2023 हिंसा में किडनैपिंग, फिर दरिंदगी हुई, अबतक एक भी गिरफ्तारी नहीं

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