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मुंबई में हिंदी भाषा के कारण पीटा... मंत्री आशीष सलार ने पहलगाम आतंकी हमले से की तुलना

मंत्री आशीष शेलार.Image Credit source: facebook

महाराष्ट्र में हिंदी भाषी लोगों पर हो रहे कथित हमलों को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है. भाजपा नेता और राज्य के मंत्री आशीष शेलार ने रविवार को इन घटनाओं की तीखी निंदा करते हुए मुंबई में भाषा के आधार पर हुई हिंसा की तुलना जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले से की, उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेता इन घटनाओं का समर्थन कर रहे हैं और “अन्य हिंदुओं की पिटाई का आनंद ले रहे हैं,”

यह बयान ऐसे समय आया है जब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के कार्यकर्ताओं द्वारा मुंबई महानगर क्षेत्र में मराठी भाषा न बोलने वाले एक मिठाई दुकानदार पर हमला किया गया.

इसके साथ ही, शनिवार को मनसे कार्यकर्ताओं ने शेयर बाजार विश्लेषक सुशील केडिया के वर्ली स्थित कार्यालय में तोड़फोड़ की. केडिया ने पहले यह बयान दिया था कि वह मराठी नहीं बोलेंगे और मनसे प्रमुख राज ठाकरे को खुली चुनौती दी थी.

भाषा के आधार पर हिंसा निराशाजनक

पत्रकारों से बातचीत में मंत्री आशीष शेलार ने कहा, “पहलगाम हमले में आतंकियों ने गोली चलाने से पहले धर्म पूछा था, और अब यहां महाराष्ट्र में लोग भाषा के आधार पर हमला कर रहे हैं, यह बेहद निराशाजनक है, राज्य देख रहा है कि कैसे कुछ नेता अन्य हिंदुओं की पिटाई का आनंद ले रहे हैं,”

उन्होंने कहा कि भाजपा महाराष्ट्र में मराठी लोगों के गौरव की रक्षा करेगी, लेकिन साथ ही गैर-मराठी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी सरकार की जिम्मेदारी है,

हिंदी भाषा को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब महाराष्ट्र सरकार ने प्राथमिक विद्यालयों में हिंदी को अनिवार्य करने के लिए सरकारी प्रस्ताव (GR) जारी किया, इस पर एमएनएस और शिवसेना (उद्धव गुट) की तीखी प्रतिक्रिया के बाद सरकार ने कदम पीछे खींचते हुए 29 जून को GR वापस ले लिया और हिंदी को केवल “आम तौर पर” तीसरी भाषा के रूप में शामिल करने की बात कही.

हिंदी की अनिवार्यता के विरोध पर बवाल

इसी मुद्दे के विरोध में राज और उद्धव ठाकरे करीब दो दशकों बाद एक मंच पर आए और शनिवार को संयुक्त विजय रैली का आयोजन किया गया. यह रैली त्रिभाषा नीति के खिलाफ सरकार के फैसले को रद्द करवाने की सफलता का “जश्न” थी.

रैली के दौरान शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा, “अगर हमें न्याय के लिए गुंडागर्दी करनी पड़े, तो हम गुंडे कहलाने को तैयार है.” वहीं, राज ठाकरे ने अपने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे बिना किसी उकसावे के भाषा को लेकर किसी पर हमला न करें.

भाजपा नेता और मंत्री नितेश राणे ने भी मराठी न बोलने के कारण हिंदी भाषियों पर हमलों का विरोध किया. उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं हिंदुओं को हिंदुओं से लड़ाने का काम कर रही हैं. वहीं, शिवसेना (शिंदे गुट) के विधायक और मंत्री प्रताप सरनाईक ने भी टिप्पणी करते हुए कहा कि मराठी भाषा पर केवल मनसे का एकाधिकार नहीं हो सकता.

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी स्पष्ट किया है कि हिंसा किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी और भाषा विवाद को लेकर कानून अपने हाथ में लेने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी.

मुंबई में हिंदी भाषा के कारण पीटा… मंत्री आशीष सलार ने पहलगाम आतंकी हमले से की तुलना

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