MP News: शेरों की शिकारी यांगचेन लाचुंगपा कौन? MP STSF ने चीन बॉर्डर से पकड़ा, इसको लेकर 195 देशों में था अलर्ट – INA


मध्य प्रदेश की स्पेशल टाइगर स्ट्राइक फोर्स और WCCB यानी वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो की संयुक्त टीम ने दस साल से फरार चल रही कुख्यात तस्कर यांगचेन लाचुंगपा को बेहद चुनौतीपूर्ण अभियान के बाद सिक्किम में धर दबोचा. यह ऑपरेशन किसी थ्रिलर फिल्म की तरह था जिसमें बर्फीली हवा, टूटती कनेक्टिविटी, स्थानीय विरोध और लगातार बदलते ठिकाने शामिल थे.
यांगचेन को टीम ने इंडिया-चाइना इंटरनेशनल बॉर्डर के पास स्थित एक अत्यंत दूरदराज इलाके से 2 दिसंबर को पकड़ा. जहां तापमान -7°C तक गिरा हुआ था. उस इलाके में न तो नेटवर्क उपलब्ध था और न ही आसानी से पहुंचने का कोई रास्ता. अधिकारियों के अनुसार यांगचेन लंबे समय से बाघों की खाल, पैंगोलिन के शल्क, लाल चंदन और शातोश ऊन जैसे प्रतिबंधित वन्यजीव उत्पादों की तस्करी कर रही थी और एक अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट की मुख्य सदस्य थी.
बताया जा रहा है कि यांगचेन लाचुंगपा मूल रूप से तिब्बत की रहने वाली है और कई सालों से दिल्ली और सिक्किम के दुर्गम क्षेत्रों में अपने ठिकाने बनाकर छिपती रही. गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार अपनी लोकेशन बदलती रहती थी. वन्यजीव तस्करी के नेटवर्क में उसकी सक्रिय भूमिका को देखते हुए इंटरपोल ने 195 देशों में उसके खिलाफ अलर्ट जारी कर रखा था. उसका पति जयय तामंग भी इसी अवैध नेटवर्क का बड़ा नाम रहा है. जांच एजेंसियों के मुताबिक जयय ने भारत से नेपाल, तिब्बत होते हुए चीन तक पहुंचने वाला एक सुरक्षित रूट तैयार किया था. जिसका इस्तेमाल कई शिकारियों और तस्करों द्वारा किया जाता था.
यह पूरा प्रकरण 2015 में उस समय सामने आया जब मध्य प्रदेश से बाघों और पैंगोलिन के अवैध शिकार और उनकी तस्करी की शिकायत दर्ज हुई. सरकार ने मामला STSF को सौंपा और लगातार की गई छापेमार कार्रवाई में इस बड़े सिंडिकेट की परतें खुलती चली गईं. अब तक इस मामले में 31 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. 2022 में नर्मदापुरम की अदालत ने 27 आरोपियों को दोषी करार दिया था. यांगचेन इस नेटवर्क की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही थी.
पहली बार 2017 में हुई थी अरेस्ट
अधिकारियों के अनुसार यांगचेन को सितंबर 2017 में पहली बार पकड़ा गया था और उसे ट्रांजिट रिमांड पर अदालत में प्रस्तुत किया गया था. लेकिन अंतरिम जमानत मिलने के बाद वह पुलिस को चकमा देकर गायब हो गई. 2019 में जबलपुर हाई कोर्ट ने उसकी अग्रिम जमानत याचिका भी खारिज कर दी थी. तभी से वह लगभग एक दशक तक भारत और नेपाल के बीच घूम-घूमकर छिपती रही. यांगचेन का नाम कई अंतरराष्ट्रीय केसों से जुड़ा हुआ है. अप्रैल 2015, इथियोपिया में आठ भारतीय बाघों की खाल पकड़ी गई थी जिनमें से तीन सतपुड़ा क्षेत्र की बताई गईं.
2013 में जब्त हुई थी बड़ी खेप
2013 में नेपाल के नुवाकोट जिले में पुलिस ने पांच बाघों की खाल और सात बोरियां हड्डियां बरामद की थीं. DNA जांच में एक खाल पेंच टाइगर रिजर्व की बाघिन टी-13 की निकली थी. ये जब्तियां इस बात की पुष्टि करती हैं कि मध्य प्रदेश से निकलने वाला वन्यजीव तस्करी का रास्ता नेपाल, तिब्बत और यहां तक कि अफ्रीकी देशों तक फैला हुआ है. गंगटोक की अदालत में 3 दिसंबर की रात ट्रांजिट वारंट जारी होने के बाद यांगचेन को मध्य प्रदेश लाने की प्रक्रिया शुरू की गई. इस पूरे ऑपरेशन में सिक्किम पुलिस का सहयोग निर्णायक रहा.
जांच एजेंसियों का कहना है कि पैसों का लेन-देन काठमांडू, सिलीगुड़ी और सीमा से लगे गांवों में हुआ करता था. पकड़ी गई डायरी में दर्ज एन्क्रिप्टेड संदेशों से अब अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और नेटवर्क के नए नाम सामने आने की उम्मीद है.
शेरों की शिकारी यांगचेन लाचुंगपा कौन? MP STSF ने चीन बॉर्डर से पकड़ा, इसको लेकर 195 देशों में था अलर्ट
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