MP News: भोपाल के इलाकों में खुलेआम घूम रहे 5 बाघ, सामने आए 3 वीडियो – INA

MP News: भोपाल के इलाकों में खुलेआम घूम रहे 5 बाघ, सामने आए 3 वीडियो – INA

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में केरवा और कालियासोत इलाके में 17 अगस्त को टाइगर नजर आया. ये टाइगर एक निजी स्कूल के पास दिखाई दिया. आम लोगों ने टाइगर का खूब वीडियो और फोटो बनाया. कार से चल रहे लोगों ने पैदल चल रहे लोगों को कार में बैठाकर टाइगर से उनकी जान बचाई. ऐसे में आज वन विभाग की टीम उसी जगह पर पहुंची जहां सबसे पहले टाइगर नजर आया. यहां पर टाइगर के पगमार्क दिखाई दिए.

वन विभाग के रेंजर शिवपाल ने कहा टाइगर यहां तक आया था वो यहां बैठा और फिर यहां से कहीं और चला गया. वन विभाग की टीम केरवा और कलियासोत इलाके में अलर्ट पर है. बैरियर लगाकर लोगों को इसके बारे में समझाया जा रहा है. लाउड स्पीकर से अनाउंसमेंट किया जा रहा है कि लोग सावधानी से इस रास्ते से गुजरें. यहां खतरा है.

वहीं आम लोगों ने बातचीत में कहा की हम इस रास्ते को थोड़ा कम ही इस्तेमाल करते हैं. हमने भी वीडियो देखें है जब यहां टाइगर आया था. वन विभाग की टीम उस केरवा और कलियासोत के घने जंगल में पहुंच गई है जहां से टाइगर बाहर आया था. वन विभाग की टीम टाइगर ढूंढ रही है. बातचीत में वन विभाग के रेंजर शिवपाल पीपरदे का कहना है कि टाइगर 17 अगस्त को इसी रास्ते से बाहर आया था. फिलहाल वो जंगल में चला गया है. लेकिन फिर भी एहतियात बरता जा रहा है.

भोपाल के अर्बन टाइगर के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी

क्या हैं अर्बन टाइगर: अर्बन टाइगर उन बाघों को कहा जाता है जो शहरी या अर्ध-शहरी इलाकों में रहते हैं और इंसानों के साथ सह-अस्तित्व में रहते हैं. भोपाल को दुनिया के उन चुनिंदा शहरों में से एक माना जाता है, जहां शहरी सीमा के भीतर बाघों का मूवमेंट देखा जाता है.

क्यों हैं भोपाल में अर्बन टाइगर: भोपाल के आसपास का जंगल, खासकर दक्षिण का क्षेत्र, रातापानी वन्यजीव अभयारण्य से जुड़ा हुआ है. यह जंगल बाघों को रहने, पानी और शिकार की सुविधा देता है. रातापानी अभयारण्य को अब टाइगर रिजर्व भी बना दिया गया है.

आवाजाही के प्रमुख क्षेत्र: बाघों को अक्सर शहर के बाहरी इलाकों जैसे कलियासोत, केरवा और उससे सटे जंगलों में देखा जाता है. ये क्षेत्र अक्सर रिहायशी इलाकों के करीब होते हैं, जिससे कभी-कभी इंसानों और बाघों का आमना-सामना भी हो जाता है.

बाघों की संख्या: रिपोर्ट्स के अनुसार, भोपाल वन मंडल के अंतर्गत 25 से अधिक बाघों का मूवमेंट है, जिनमें से कुछ नियमित रूप से शहरी इलाकों में देखे जाते हैं.

वन विभाग का रोल: वन विभाग बाघों की गतिविधियों पर नजर रखता है और लोगों को सुरक्षित रखने के लिए चेतावनी जारी करता है. वे कैमरा ट्रैप का उपयोग करते हैं और लोगों को रात के समय इन इलाकों में सावधानी बरतने की सलाह देते हैं.

सह-अस्तित्व: भोपाल में बाघों और इंसानों के बीच एक अनोखा सह-अस्तित्व देखा जाता है. यहां दोनों एक ही भूभाग में रहते हैं. हालांकि, इंसानों को सतर्क रहने की सलाह दी जाती है ताकि संघर्ष की स्थिति न बने.

भोपाल के इलाकों में खुलेआम घूम रहे 5 बाघ, सामने आए 3 वीडियो

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