MP News: Chhindwara Cough Syrup: 36 दिन में 19 मौतें, 484 कोल्ड्रिफ सिरप गायब… कहीं और मासूमों ने तो नहीं पी? उठ रहे सवाल – INA

MP News: Chhindwara Cough Syrup: 36 दिन में 19 मौतें, 484 कोल्ड्रिफ सिरप गायब… कहीं और मासूमों ने तो नहीं पी? उठ रहे सवाल – INA

Chhindwara Cough Syrup: मध्य प्रदेश में कोल्ड्रिफ सिरप से छिंदवाड़ा जिले में अब तक 16 बच्चों की मौत हो चुकी है. मंगलवार को दो वर्षीय जेयूशा यदुवंशी की किडनी फेल हो जाने से मौत हो गई. जेयूशा जुन्नारदेव की रहने वाली थी. इस बच्ची का भी प्राथमिक उपचार डॉक्टर प्रवीण सोनी ने किया था. जेयूशा का नागपुर के GMC हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था. अकेले छिंदवाड़ा में इस कफ सिरप ने 16 बच्चों की जान ले ली है. वहीं पांढुर्ना और बैतूल मिलाकर 19 बच्चों की मौत हुई है. वहीं इस बीच एमपी स्वास्थ्य की लापरवाही को लेकर कई अहम खुलासे हुए हैं…

दरअसल, कोल्ड्रिफ सिरप से मौतों का सिलसिला सितंबर महीने में ही शुरू हो गया था. पहली मौत तीन सितंबर को हुई थी. सात वर्षीय अजिया खान नाम की बच्ची की किडनी फेल हुई थी, जिसके बाद उसने दम तोड़ दिया था.

मासूमों की मौत का चार्ट

  • 3 सितंबर को 1
  • 4 सितंबर को 2
  • 5 सितंबर को 1
  • 6 सितंबर को 1
  • 7 सितंबर को 1
  • 8 सितंबर को 1 (बैतूल जिला)
  • 12 सितंबर को 1 (पांढुर्णा जिला)
  • 13 सितंबर को 1
  • 15 सितंबर को 1
  • 19 सितंबर को 1
  • 23 सितंबर को 1
  • 26 सिताब को 1
  • 27 सितंबर को 1
  • 8 अक्टूबर को 1 (बैतूल)
  • 1 अक्टूबर को 1
  • 4 अक्टूबर को 1
  • 6 अक्टूबर को 1

आज तक छिंदवाड़ा नहीं गए स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला

वहीं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला आज तक छिंदवाड़ा नहीं पहुंचे. उन्होंने तो शुरुआत में कोल्ड्रिफ सिरप कंपनी को क्लीन चिट दे दी और कहा कि सिरप से मौत होना निराधार है. वहीं राजेंद्र शुक्ल अपने क्षेत्र में त्योहार मनाते रहे, न ही कोई विभागीय मीटिंग बुलाई. स्वास्थ्य राज्य मत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने भी कोई बैठक नहीं की. उल्टा कॉल लगाने पर झूठ बोलते रहे. नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि मैं भोपाल में नहीं हूं, बल्कि वह भोपाल में ही थे. वो भी आज तक छिंदवाड़ा नहीं पहुंचे.

स्वास्थ्य विभाग ने भी लापरवाही बरती

यही नहीं छिंदवाड़ा के प्रभारी मंत्री राकेश सिंह भी आज तक छिंदवाड़ नहीं गए. ड्रग कंट्रोलर दिनेश मौर्य छुट्टी मनाते रहे. जब प्रदेश की लैब में सैंपल आए तो उन्होंने उन दवाओं के टेस्ट किए, जिस पर शंका कम थी. जानलेवा कोल्ड्रिफ के टेस्ट दो दिन के लिए टाल दिए गए. स्वास्थ्य विभाग के सचिव संदीप यादव के स्तर पर भी लापरवाही बरती गई. न तो समय रहते सचिव ने कोई गंभीर कदम उठाए और न ही दिशा-निर्देश जारी किए. छिंदवाड़ा में कोल्ड्रिफ बैन होने के बाद भी प्रदेश में सरकार ने इसे बैन तक नहीं किया.

ये भी बता दें कि 3 सितंबर से लेकर 27 सितंबर तक छिंदवाड़ा में ही 12 मौतें हो चुकी थीं. इन सारे बच्चों का इलाज डॉक्टर प्रवीण सोनी ने किया था. आंकड़े छुपाए गए. 12 मौतें में से छह मौतें ही बताई गईं. 29 सितंबर को पहली बार छिंदवाड़ा कलेक्टर ने बयान जारी किया. कलेक्टर ने मौखिक रूप से कोल्ड्रिफ पर बैन लगाया.

आखिर जिम्मेदार कौन?

तमिलनाडु में सिरप बनाने वाली कोल्ड्रिफ कंपनी को अप्रूवल किसने दिया, जांच रिपोर्ट किसने तैयार की, मध्य प्रदेश में क्यों नहीं ड्रग विभाग ने इस सिरप की जांच पड़ताल की? सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तार डॉक्टर प्रवीण सोनी की कोल्ड्रिफ कंपनी से सेटिंग थी. मुनाफा सीधे 80 से 90 प्रतिशत था. यही कारण था कि प्रवीण सोनी बच्चों की तबीयत बिगड़ने के बाद भी सिर्फ यही सिरप लिखता रहा.

484 कोल्ड्रिफ सिरप का हिसाब नहीं

तमिलनाडु की कंपनी ने जबलपुर के डीलर से सेटिंग की. सारी सिरप सिर्फ एक ही डीलर के पास पहुंचे. बच्चों की मौत की बाद छापा मारा गया. आज भी 484 कोल्ड्रिफ सिरप का हिसाब प्रशासन के पास नहीं है. आखिर ये सिरप गई कहां? क्या अन्य बच्चे तो ये नहीं पी रहे? अंदेशा इस बात का भी है कि ड्रग विभाग के कई अधिकारी भी जांच के घेरे में हैं.

कब्र से निकाले गए बच्चों के शव

छिंदवाड़ा में बच्चों की मौत हुई. प्रशासन ने किसी भी बच्चे का पोस्टमॉर्टम नहीं करवाया. दलील दी गई कि बच्चों के अभिभावकों ने अनुमति नहीं दी, जबकि बाद में कब्र खोदकर पोस्टमॉर्टम किया गया. सवाल ये भी उठता है कि सबसे पहले छिंदवाड़ा में जहरीले सिरप को बैन करने वाले कलेक्टर शीलेंद्र सिंह का तबादला कर दिया गया.

40 हजार रुपए वेंटिलेटर का खर्च

सिरप बैन करने पर उन्हें भोपाल से 150 से ज्यादा कॉल गए. नए कलेक्टर ने दो दिन तो मामला समझने में ही लगा दिए. पीड़ितों में ज्यादातर परिवार गरीब हैं. इलाज में परिवार ने अपनी पूरी गृहस्थी बेच दी, लेकिन सरकार ने सिर्फ चार लाख रुपए दिए, जबकि इलाज में 8 से 10 लाख रुपए खर्च हुए. जो बच्चे वेंटिलेटर पर हैं, आज भी 40 हजार रुपए प्रतिदिन का खर्च आ रहा है.

Chhindwara Cough Syrup: 36 दिन में 19 मौतें, 484 कोल्ड्रिफ सिरप गायब… कहीं और मासूमों ने तो नहीं पी? उठ रहे सवाल

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