MP News: मोबाइल के यूज से बच्चे हो रहे चिड़चिड़े… बीजेपी MLA अभिलाष पांडे ने सरकार से की ये मांग – INA


मध्यप्रदेश जबलपुर की उत्तर मध्य विधानसभा से विधायक अभिलाष पांडे ने मध्य प्रदेश विधानसभा में बच्चों में बढ़ती मोबाइल और इंटरनेट की लत का गंभीर मुद्दा उठाया है. उन्होंने कहा कि आज मोबाइल की लत सिर्फ एक परिवार ही नहीं, बल्कि देश के हर घर की समस्या बन चुकी है. पांडे के अनुसार, 14 से 18 साल की उम्र के बीच के बच्चों में डिजिटल एडिक्शन तेजी से बढ़ रहा है. यह भविष्य में देश की खतरनाक सामाजिक-मानसिक समस्या का रूप ले सकता है.
विधायक ने कहा कि अब हालात ऐसे हैं कि बच्चे मोबाइल देखे बिना खाना तक नहीं खाते हैं. लगातार रील, गेम और तेज रंग-बिरंगे वीडियो देखने से उनके मस्तिष्क में डोपामिन नामक न्यूरोकेमिकल लगातार रिलीज होता रहता है, जिससे उन्हें तात्कालिक आनंद का अनुभव होता है और वे धीरे-धीरे इस डिजिटल दुनिया के आदी बनते जा रहे हैं.
उन्होंने चेतावनी दी कि AI, मेटा, शॉर्ट वीडियोज़ और तेजी से बदलते डिजिटल कंटेंट ने इसे और खतरनाक बना दिया है, क्योंकि जो बच्चा एक बार जो सामग्री देखता है. वही सामग्री लगातार उसके फ़ोन पर दिखाई जाती है, जिससे वो इस दुष्चक्र में फंस जाता है.
बढ़ रही आंखों की समस्याएं
अभिलाष पांडे ने इस दौरान एम्स की रिपोर्ट का उल्लेख किया, जिसके अनुसार मायोपिया यानी आंखों में नंबर आने वाली बीमारी बच्चों में तेजी से बढ़ रही है. उन्होंने बताया कि दिल्ली में 2001 में यह समस्या 7 प्रतिशत थी, 2011 में यह 14 प्रतिशत पहुंच गई और वर्ष 2021 में यह 21 प्रतिशत हो गई है. पहले यह समस्या 1820 वर्ष की उम्र में होती थी, लेकिन अब यह 1012 साल के बच्चों में पाई जा रही है.
उन्होंने कहा कि भारत में 87% लोग गैजेट का उपयोग करते हैं और 1014 वर्ष आयु वर्ग के 83% बच्चे अब अपने डिजिटल मोबाइल फोन का उपयोग कर रहे हैं, जो विश्व औसत 76% से काफी अधिक है.
घर से बाहर नहीं खेल रहे बच्चे
विधायक ने कहा कि यह स्थिति इतनी भयावह इसलिए है क्योंकि आज के बच्चे घर से बाहर खेल नहीं रहे, परिवार से संवाद कम हो रहा है, चिड़चिड़ापन, एकांकीपन और अवसाद जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा बताए गए पंच परिवर्तन और कुटुंब प्रबोधन को उन्होंने इस संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण बताया है. उनके अनुसार संयुक्त परिवार की अवधारणा और पारिवारिक संवाद इन समस्याओं का प्रभावी समाधान हो सकते हैं.
पांडे ने सदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मन की बात का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने परिवारों को No Gadget Zone बनाने की सलाह दी थी. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक बार ट्रेन में उन्होंने देखा कि एक तीन साल के बच्चे को खाना खिलाने के लिए चार लोग लगे थे मां खाना खिला रही थी, बड़ा भाई मोबाइल दिखा रहा था और दादा-दादी उसे मनाने की कोशिश कर रहे थे. उन्होंने कहा कि यह केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि करोड़ों घरों की हकीकत है.
सरकार चलाए no Gadget Zone अभियान
बीजेपी विधायक ने सुझाव दिया कि प्रदेश में स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला एवं बाल विकास ये तीनों विभाग इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण हैं. इन्हें मिलकर सामूहिक रूप से एक मजबूत नीति बनानी चाहिए. उन्होंने गाजियाबाद के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा जारी की गई बच्चों के मोबाइल उपयोग को लेकर एडवाइजरी का उदाहरण देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में भी ऐसी ही कड़ी एडवाइजरी जारी की जानी चाहिए.
अभिलाष पांडे ने मंत्री से आग्रह किया कि मध्य प्रदेश में No Gadget Zone को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य स्तर पर जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए. मोबाइल एडिक्शन से संबंधित एक स्पष्ट, कड़ी व प्रभावी एडवाइजरी जारी की जाए. जरूरत पड़ने पर कानून बनाकर इस गंभीर समस्या को नियंत्रित किया जाए.
मोबाइल के यूज से बच्चे हो रहे चिड़चिड़े… बीजेपी MLA अभिलाष पांडे ने सरकार से की ये मांग
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