MP News: धीरेंद्र शास्त्री, देवकीनंदन-अनिरुद्धाचार्य को संत कहना चाहिए या नहीं? प्रदीप मिश्रा ने दिया जवाब – INA

MP News: धीरेंद्र शास्त्री, देवकीनंदन-अनिरुद्धाचार्य को संत कहना चाहिए या नहीं? प्रदीप मिश्रा ने दिया जवाब – INA

टीवी 9 भारतवर्ष का सत्ता सम्मेलन मंच इस बार मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सजा है. कार्यक्रम में कई दिग्गज शिरकत करने वाले हैं. राजनीति से लेकर धर्म और फिल्मी दुनिया के कई लोग मंच पर नजर आएंगे. इसी मंच पर कथावाचक प्रदीप मिश्रा भी शामिल हुए, जिन्होंने कई सवालों के जवाब दिए हैं. मिश्रा अपने कई बयानों के कारण चर्चा में रहे हैं. इसके साथ ही उनके धाम पर होने वाले कार्यक्रम में कई लोगों की मौत हुई थी, जिसके बाद उनपर कई तरह के सवाल खड़े हुए.

प्रदीप मिश्रा ने बताया कि अच्छे संत की परिभाषा आपके भीतर की सीतलता पर निर्भर करती है. अगर हम दूसरों को समझााने का प्रयास कर रहे हैं और खुद पर ही अमल नहीं कर रहे हैं. दूसरों को शांति की सलाह देते हैं पर खुद ही तेज हो जाते हैं. ऐसे लोग संत नहीं है. प्रेमानंद महाराज पर भी प्रदीप मिश्रा ने जवाब दिया. उन्होंने कहा कि प्रेम की भाषा की सर्वश्रेष्ठ भाषा है. भाव से जो भगवान को भज ले परमात्मा उसी का है.

प्रदीप मिश्रा ने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री, देवकीनंदन-अनिरुद्धाचार्य को संत नहीं कहना चाहिए. संत बनने के लिए परमात्मा के करीब होना बेहद जरूरी है. संत एक बड़ी उपाधि है. इसके लिए बहुत तप और परिश्रम करना पड़ता है. हम केवल कथावाचक कह सकते हैं. संत और कथावाचकों को अपनी मर्यादा में रहना चाहिए. अगर ऐसा रहता है तो कोई विवाद नहीं होगा. उन्होंने कहा कि मंच से कभी भी ऐसे शब्दों का उपयोग नहीं करना चाहिए. जिनसे लोगों में गुस्सा पैदा हो.

हिंदू राष्ट्र पर क्या बोले प्रदीप मिश्रा?

प्रदीप मिश्रा ने हिंदू राष्ट्र वाली मांग को लेकर कहा कि हिंदू राष्ट्र पहले भी था और आज भी और आगे भी रहेगा. बस इसमें कुछ सील ठप्पे लगने होंगे तो वो लग जाएंगे. मतलब साफ है कि प्रदीप मिश्रा ने हिंदू राष्ट्र की मांग का समर्थन किया है.

क्या विकलांग संन्यासी हो सकता है?

विकलांग कभी सन्यासी नहीं हो सकता है? इस सवाल उन्होंने कहा कि पूर्व में भी सूरदास जी भी रहे हैं. वो भी सन्यासी ही थे. आचार्यों ने कहीं भी पड़ा हो पर हम कथाकार हैं. हम साधक भी नहीं हैं. हम केवल कथावाचक हैं. जितने भी संत हैं, सबको ये नहीं देखना चाहिए कि कोई विकलांग है कोई क्या है. हमें एक साथ रहना चाहिए, मन को मिलाने का प्रयास करना चाहिए.

असली संत कौन?

संतों के बीच देखने को मिल रहे झगड़े को लेकर प्रदीप मिश्रा ने कहा कि जब संतों के बीच झगड़े देखने को मिलते हैं तो भगवान ही सहारा बनता है. व्यक्ति किसी के पास जाना पसंद नहीं करता है वो फिर भगवान के पास ही जाता है. उन्होंने कहा कि जिस संत के भीतर संतोष, शांति है वही असली संत है.

उन्होंने कहा कि हमने अक्सर देखा है कि संगति भी असर नहीं कर पाती है. आज का मनुष्य लोमड़ी के साथ नहीं रहता पर चालाकी रखता है. शेर के साथ न रहने के बाद भी अटैक कर देता है. कुत्ते के साथ रहते हुए भी लोग वफादार नहीं होते हैं. संतो के पास बैठने का मतलब चिलम लगाना नहीं है. न ही ये कोई संत सिखाता है. संत का कहना है कि इन चीजों से दूर रहो.

संस्कृत पर उठ रहे सवालों पर क्या बोले प्रदीप मिश्रा?

रामभद्राचार्य ने पिछले दिनों संस्कृत को लेकर कहा था कि प्रेमानंद महाराज को संस्कृत नहीं आती है. इस पर प्रदीप मिश्रा ने कहा कि प्रेम की भाषा की सर्वश्रेष्ठ भाषा है. भाव से जो भगवान को भज ले परमात्मा उसी का है. हम तो मूलतः एक ही बात कहेंगे की सनातन को एक करना है तो सबको एक ही होना होगा. आज भी सारे संत एकजुट हैं. आने वाले समय में भी ऐसे ही उज्जैन भी देखने को मिलेगा.

उन्होंने कहा था कि प्रेमानंद महाराज को संस्कृत का ज्ञान नहीं है. पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि संस्कृत का ज्ञान न होते हुए भी मीरा बाई की रचनाएं उनकी भक्ति, सरलता और भावपूर्ण शैली के कारण आज भी लोकमन में गूंजती हैं. इसलिए भगवान के लिए भाव जरूरी है.

धीरेंद्र शास्त्री, देवकीनंदन-अनिरुद्धाचार्य को संत कहना चाहिए या नहीं? प्रदीप मिश्रा ने दिया जवाब

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