MP News: हर्षा रिछारिया अब नहीं करेंगी धार्मिक प्रचार, साध्वी का चोला छोड़ने का ऐलान; बोलीं- अपने ही धर्म से मिला दर्द – INA


मकर संक्रांति के अवसर पर मां नर्मदा में स्नान करने के लिए हर्षा रिछारिया मध्य प्रदेश के जबलपुर के ग्वारीघाट पहुंचीं. साध्वी का चोला त्यागने से पहले उन्होंने नर्मदा में डुबकी लगाई. इसके बाद TV9 से बातचीत में उन्होंने कहा मुझे बहुत अच्छा लग रहा है क्योंकि जबलपुर संस्कारधानी और मां नर्मदा से मेरा बहुत पुराना और गहरा रिश्ता है. आज इस पावन अवसर पर मां नर्मदा के तट पर आकर डुबकी लगा पाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्य की बात है.
जब उनसे पूछा गया कि डुबकी लगाते समय उनकी आंखों में आंसू क्यों थे तो उन्होंने कहा वजह दिल और मन का दर्द है, जो मुझे अपने ही धर्म से मिला है और इतना मिला है कि अंत में आपको धर्म का प्रचार, धर्म में आगे बढ़ना वो सब छोड़ने का फैसला लेना पड़ता है. ये खुद में मुझे लगता है एक इंसान अगर इस हद तक आ रहा है तो ये अपने-आप में बहुत बड़ी बात होती है.
“इस सफर को विराम दे देती हूं”
हर्षा रिछारिया ने कहा कि आप कठिनाइयों का सामना करते हैं, परेशानियों का सामना करते हैं, विरोध का सामना करते हैं. तब तक, जब तक सब सही लगता है, लेकिन हम आशीर्वाद प्राप्त करना बहुत बड़ी बात मानते हैं, जिनकी एक झलक देखना बहुत बड़ी बात मानते हैं. वही बिना मतलब बार-बार आपका विरोध करें तो आपके कामों को आगे बढ़ने से रोकें, आपका नाम कहीं जाए तो उस नाम को कटवाएं नहीं, हर्षा रिछारिया नहीं आनी चाहिए तो इसका मतलब आप चाहते ही नहीं हैं कि मैं उस जगह पर जाऊं और जब इस सफर को एक साल हो गया. इस विरोध को एक साल हो गया तो अब मुझे लगता है कि जब उन लोगों को इतनी ही परेशानी है तो मैं ही इस सफर को विराम दे देती हूं.
उन्होंने कहा कि हम देख रहे थे कि लगातार सनातन की बात हो रही है, लेकिन इस कम समय में इस राह को छोड़ देना जो आपको कम समय लग रहा है. वो एक साल मेरे लिए एक सदी है. इस एक साल में मुझे पता है कि मैंने क्या-क्या झेला है. मेंटल प्रेशर, मेंटल टॉर्चर, पैनिक अटैक, एंग्जायटी, लो बीपी, माइग्रेन अटैक, सुसाइडल थॉट्स मैंने सब झेल लिए हैं. ये मेरे लिए एक सदी के बराबर था. मेरा परिवार कितना परेशान हो रहा है तो ये नहीं कहा जा सकता कि ये कम समय था.
“युवाओं का धर्म प्रचार कुछ गुरुओं को पसंद नहीं”
हर्षा ने कहा कि हां मुझे ये देख कर बहुत अच्छा लगता है कि आज जब हम नए साल की बात करते हैं तो मैंने इस पर भी एक बात कही थी कि नया साल अब जब आता है, तो युवा क्लब और नशे की तरफ न जाकर आज का युवा काशी, मथुरा, वृंदावन, अयोध्या जा रहा है. ये हमारे लिए बहुत गौरव की बात है, लेकिन आज ये हाल है हमारे देश का कि युवा जब मंदिर जाएं, पैर छूकर घर आ जाएं. उस पर वीडियो बना कर डाल दें वहीं तक युवा सही है. जब युवा धर्म के प्रचार में आगे बढ़ने लगता है. तब वही धर्म के कुछ गुरुओं को वो बिल्कुल भी स्वीकार नहीं होता.
देश में बहुत सारे धर्म गुरु हैं. बड़े-बड़े जो सनातन और भगवा की बात करते हैं वो स्वीकार क्यों नहीं करते ये सवाल, मुझे लगता है, आपको उन धर्म गुरुओं से करना चाहिए कि उन्हें ये स्वीकार क्यों नहीं है, जो मंच पर बैठकर ये बोलते हैं कि नारी की पूजा होती है तो देवता बसते हैं, जो ये बोलते हैं कि हमारे धर्म में डाकू रत्नाकर थे, जो बाद में महर्षि वाल्मीकि बने कि आप कभी भी अपना पुराना जीवन छोड़कर नए धर्म के रास्ते पर आगे बढ़ सकते हो वही धर्म गुरु, वही कथावाचक, वही साधु-संत एक लड़की को आगे बढ़ने नहीं देना चाहते, आगे बढ़ता हुआ देखना नहीं चाहते. वही उसका विरोध कर रहे हैं उसका मनोबल तोड़ रहे हैं, उसके रास्ते में कठिनाइयां उत्पन्न कर रहे हैं तो ये सवाल उनसे पूछिए कि वो ऐसा क्यों कर रहे हैं उन्हें मुझसे क्या दिक्कत है.
“मैं बहुत गर्व से बोलती हूं कि मैं एंकर रही हूं”
इसके साथ ही हर्षा रिछारिया ने बताया कि इस एक साल में मैंने बहुत से धर्म गुरुओं से मिलने की कोशिश की. इवन अभी माघ मेला शुरू हुआ, तब भी कोशिश की. लेकिन जवाब यही मिला हमें हर्षा रिछारिया से नहीं मिलना. इसके साथ ही हर्षा ने कहा कि क्यों हर्षा रिछारिया ने किसके साथ बुरा किया और अगर आप पुराने काम को लेकर भी जज करेंगे तो मेरा पुराना काम ऐसा कुछ भी नहीं था, जिसके लिए मुझे या मेरे परिवार को शर्मिंदगी उठानी पड़े. हम शर्मिंदा नहीं हैं मैं बहुत गर्व से बोलती हूं कि मैं एंकर रही हूं, मैं एक्टर रही हूं.
इसके साथ ही हर्षा ने बताया कि आज की डेट में मुझसे बड़ी-बड़ी एक्ट्रेसेज हैं, जिन्होंने बहुत कुछ किया है फिर भी आप उन्हें धार्मिक मंचों पर बुला रहे हैं, जो अपनी निजी जिंदगी में जाकर मांस-मदिरा का सेवन कर रही हैं, उन्हें आप धार्मिक मंचों पर बुला रहे हैं, तब आपकी आस्था को, आपके धर्म को ठेस नहीं पहुंचती, लेकिन एक ब्राह्मण लड़की, जिसने जीवन में कभी मांस-मदिरा का सेवन नहीं किया, कुछ नहीं किया, सही रास्ते पर चल रही है. उसका आप विरोध कर रहे हैं तो आप सोचिए कि आज इस देश में विरोध किस चीज का हो रहा है.
“कैमरे के पीछे कुछ और होते हैं लोग”
देश में चल रहे सनातन और भगवा ध्वज को लेकर कहा कि मुझे नहीं पता कि मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है. आप किसी का भी नाम ले लीजिए, आज हर व्यक्ति कैमरे के सामने नहीं, बल्कि कैमरे के पीछे (behind the camera) कुछ और है. आप ये नोटिस कीजिए कि कैमरे के पीछे कितने लोग वास्तव में मेरे साथ खड़े हैं. कैमरे के सामने सब कहते हैं, हां हमारी बेटी आगे बढ़ रही है, हमारी बहन आगे बढ़ रही है, लेकिन कैमरा बंद होते ही वही लोग विरोध पर उतर आते हैं.
हर्षा ने आगे कहा कि देखिए मैं वही इंसान हूं और वही रहूंगी. मैं अपना धर्म नहीं छोड़ रही हूं, अपना धर्म नहीं बदल रही हूं और सपने में भी मैं ऐसा नहीं कर सकती. मैं सिर्फ धर्म का प्रचार बंद कर रही हूं, लेकिन इसके बाद मैं किस मुंह से युवाओं और बेटियों से कहूं कि तुम इसमें आगे बढ़ो, जब मैं खुद अपना मनोबल टूटता हुआ देख रही हूं, खुद को विरोध का शिकार होते हुए देख रही हूं, मैं किस मुंह से चाहूं कि किसी और के साथ भी वही हो जो मेरे साथ हुआ, तो मेरा यही कहना है जो काम कर रहे हो, वो करो, बस नशा मत करो, किसी के साथ बुरा मत करो और सबसे बड़ी बात जिस धर्म में मंच पर बैठकर ये बोला जाता है कि किसी के साथ छल-कपट मत करो किसी का फायदा मत उठाओ उसी धर्म में एक बेटी के साथ ये हो रहा है. ये बहुत बड़ी बात है.
युवाओं को सनातन की और बढ़ने को लेकर कहा आज देश में बार-बार कुछ धर्म गुरु, कुछ संत सनातन राष्ट्र की मांग, हिंदू संगठन की मांग, हिंदू बोर्ड की मांग, सनातन संगठन बोर्ड की मांग, हिंदू राष्ट्र की मांग कर रहे हैं. सिर्फ बोलने से हिंदू राष्ट्र नहीं बनता. अहंकार में कोई कार्य नहीं होता. आप जिन महादेव को, जिन आदिशक्ति को, जिन राम को, जिन कृष्ण को पूजते हैं आप ये देखिए कि उन्होंने अपने वास्तविक जीवन में किस तरह धर्म का पालन किया, किस रास्ते पर चले और आज उनके नाम पर बोलने वाले क्या वही आचरण कर रहे हैं. ये मुझे समझ नहीं आता. अगर आप इस तरह हिंदू राष्ट्र की मांग करेंगे और बढ़ते हुए युवाओं को रोकेंगे तो आज से 25-30 साल बाद भी हिंदू राष्ट्र बनता हुआ आप नहीं देख पाएंगे.
“मेरे चरित्र पर उंगली उठाई गई तो कोर्ट में खड़े नजर आएंगे”
सोशल मीडिया में ट्रोल को लेकर कहा पिछले 2430 घंटों में मुझे पूरे विश्व से मैं सिर्फ देश की बात नहीं करूंगी. पूरे विश्व से मैसेज और डीएम आ रहे हैं कि दीदी, आप ऐसा मत कीजिए. आप जाएंगी तो हमारी हिम्मत टूट जाएगी, हमारी आस्था टूट जाएगी, लेकिन जो लोग ट्रोल कर रहे हैं. चाहे वो कोई छोटा-मोटा मीडिया चैनल हो, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हो ये वो हर्षा नहीं है, जो महाकुंभ में गई थी और बस आस्था के साथ चुप रही. ये वो हर्षा है, जिसे इस धर्म के लोगों ने कठोर बना दिया है. अब अगर मुझे ट्रोल किया गया, मेरे चरित्र पर उंगली उठाई गई तो आप सब कोर्ट में खड़े नजर आएंगे. क्योंकि इस बार ये बेटी किसी को बर्दाश्त नहीं करेगी.
इसके साथ ही कहा कि जहां तक इलाहाबाद जाने का सवाल है, मैं 17 तारीख को प्रयागराज पहुंचुंगी. 18 तारीख को मौनी अमावस्या के दिन संगम के तट पर आस्था की डुबकी लगाऊंगी. उसके बाद अपने इस प्रचार-प्रसार को विराम दूंगी. इसके बाद मैं वापस उस जीवन में लौटूंगी, जहां मुझे ज्यादा सुकून था. इसके साथ ही आम लोगों से अपील करते हुए कहा कि और कृपया ये गलत बात फैलाना बंद कीजिए कि मैं मॉडल थी, मैं एंकर थी, मैं एक्टर थी और वही प्रोफेशन कंटिन्यू करूंगी. मैं सनातनी हूं. मुझे गर्व है भगवा पहनना, भगवा तिलक लगाना, चंदन लगाना ये मेरा अधिकार है. ये मुझसे कोई नहीं छीन सकता, लेकिन अब आप मुझे हमेशा इस रूप में नहीं देखेंगे. मौनी अमावस्या के बाद से आप मुझे एक नए तरीके से देखेंगे.
हर्षा रिछारिया अब नहीं करेंगी धार्मिक प्रचार, साध्वी का चोला छोड़ने का ऐलान; बोलीं- अपने ही धर्म से मिला दर्द
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