MP News: ‘सरेंडर कर दो, कब तक…’, भूखे-प्यासे खेत में पहुंचे 2 नक्सली, किसान ने दी ऐसी सलाह; डाल दिए हथियार – INA

MP News: ‘सरेंडर कर दो, कब तक…’, भूखे-प्यासे खेत में पहुंचे 2 नक्सली, किसान ने दी ऐसी सलाह; डाल दिए हथियार – INA

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में 43 लाख रुपए के इनामी दो नक्सलियों के सरेंडर के पीछे पिता-पुत्र की हिम्मत और पहल की कहानी सामने आई है. बालाघाट पर करीब 35 सालों से लाल आतंक का कलंक है. राशिमेटा गांव से शुरू हुई लाल क्रांति कोरका स्थित CRPF कैंप में अब दम तोड़ चुकी है. ऐसे में बालाघाट को हम पूरी तरह नक्सल मुक्त मान सकते हैं. अंतिम दो नक्सली दीपक और रोहित ने बिरसा थाना क्षेत्र की मझुरदा पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम कोरका स्थित CRPF कैंप में जाकर सरेंडर कर दिया.

भूखे-प्यासे भटक रहे थे दोनों नक्सली

नक्सली दीपक उर्फ सुधाकर और रोहित भूखे-प्यासे भोजन की तलाश में जंगल से निकलकर बोनदारी गांव एक किसान के खेत में पहुंचे. दोनों नक्सली ने किसान से पहले खाना मांगा. फिर किसान और उसके बेटे ने खूंखार नक्सलियों से हिम्मत जुटाकर कहा कि कब तक आप जंगल में भटकते रहोगे. हथियार डाल दो और मुख्यधारा की ओर लौट आओ. यह सुन कुछ देर तक दीपक और रोहित ने सोचा और फिर आत्मसमर्पण की बात कही. तभी किसान नैनसिंह के पिता कुंवर सिंह मरकाम ने कहा कि हम आपको पुलिस कैंप तक पहुंचाते हैं. दोनों को बाइक पर लेकर CRPF कैंप कोरका पहुंचे, जहां दीपक और रोहित ने सरेंडर किया.

ये भी पढ़ें- दलित के घर खाना खाने पर RSS कार्यकर्ता से गांववालों ने तोड़ा नाता, पंचायत ने कहा- पहले करो ये दो काम

नैनसिंह मरकाम ने बताया कि मैं बोनदारी गांव का रहने वाला हूं. खेत में गुरुवार की शाम को काम कर रहा था, तभी नक्सली दीपक और रोहित आए. दोनों पिता कुंवर सिंह मरकाम से खाना मांगने लगे. परिवार ने उन्हें चावल-भाजी दी. इसी दौरान मैंने और मेरे पिता ने हिम्मत जुटाकर कहा कि आप कब तक जंगल में घूमते रहोगे? हथियार डाल दो और मुख्यधारा की ओर लौट आओ.

CRPF कैंप में दोनों को सरेंडर कराया

इस बात पर नक्सली दीपक पहले मानने को तैयार नहीं था, जबकि रोहित सरेंडर के लिए तैयार हो गया. दीपक खाना खाने के बाद गांव से चला गया. नैन सिंह ने बताया कि वह अपनी बाइक से रोहित को कोरका CRPF कैंप ले जाकर सरेंडर करवाया. थोड़ी देर बाद दीपक भी हिम्मत जुटाकर पहुंचा गांव पहुंचा और कहा कि उसे भी सरेंडर करना है. फिर उसे भी बाइक से कैंप ले जाकर सरेंडर करवाया.

दरअसल, केंद्र सरकार ने 21 मार्च 2025 को घोषणा की थी कि नक्सलवाद को जड़ से खत्म करना है. ऐसे में सुरक्षाबलों ने अपनी रणनीति बदली और एंटी नक्सल ऑपरेशन तेज कर दिया. ऐसे में नक्सली बालाघाट के जंगलों में तो थे, लेकिन सिर्फ अपने औचित्य की लड़ाई लड़ रहे थे. बालाघाट में सरेंडर करने वाले दीपक और रोहित के साथ नक्सलियों के औचित्य की भी लड़ाई खत्म हो चुकी है.

7 दिसंबर को 11 नक्सलियों ने किया था सरेंडर

6 दिसंबर को केबी (कान्हा भोरमदेव डिवीजन) के कबीर सहित 10 नक्सलियों के सरेंडर के बाद बचे नक्सलियों की तलाश थी. फिर 7 दिसंबर को एमएमसी जोन (मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़) के प्रभारी रामदेर मज्जी ने भी 11 साथियों के साथ छत्तीसगढ़ के बकरकट्टा में सरेंडर किया था. इसके बाद सिर्फ तलाश थी रोहित और दीपक की, जो मलाजखंड दलम में सक्रिय थे. आखिरकार आज इन दोनों ने भी CRPF के कैंप में जाकर सरेंडर कर दिया.

ASP आदर्श कांत शुक्ला ने दी जानकारी

एंटी नक्सल ऑपरेशन के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आदर्श कांत शुक्ला ने इन दोनों के सरेंडर की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि दीपक बालाघाट के पालागोंदी गांव का रहने वाला था. उसने स्टेटगन के साथ सरेंडर किया है. वह तीनों राज्यों का मोस्ट वांटेड था और उस पर 29 लाख रुपए का इनाम था. वह जीआरबी डिवीजन (गोंदिया-राजनांदगांव-बालाघाट) डिवीजनल कमेटी मेंबर यानी DVCM रैंक का नक्सली था. अब उसके सरेंडर करने के साथ ही बालाघाट को पूरी तरह नक्सल मुक्त कहा जा सकता है.

‘सरेंडर कर दो, कब तक…’, भूखे-प्यासे खेत में पहुंचे 2 नक्सली, किसान ने दी ऐसी सलाह; डाल दिए हथियार

[ad_2]


देश दुनियां की खबरें पाने के लिए ग्रुप से जुड़ें,

[ad_1]

#INA #INA_NEWS #INANEWSAGENCY
Copyright Disclaimer :-Under Section 107 of the Copyright Act 1976, allowance is made for “fair use” for purposes such as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship, and research. Fair use is a use permitted by copyright statute that might otherwise be infringing., educational or personal use tips the balance in favor of fair use.
Credit By :-This post was first published on https://www.tv9hindi.com/, we have published it via RSS feed courtesy of Source link,

Back to top button