MP News: दिवाली पर इस गांव में नहीं होती लक्ष्मी पूजा…सैकड़ों साल पुरानी परंपरा, करते हैं ये अनोखा काम – INA

MP News: दिवाली पर इस गांव में नहीं होती लक्ष्मी पूजा…सैकड़ों साल पुरानी परंपरा, करते हैं ये अनोखा काम – INA

मध्य प्रदेश के उज्जैन में दीपावली के त्योहार पर वैसे तो सभी माता महालक्ष्मी और भगवान श्री गणेश का पूजन अर्चन कर शुभ समृद्धि की कामना करते हैं. लेकिन जिले में कुछ गांव ऐसे भी हैं जहां पर दीपावली पर अनोखी परंपरा का निर्वहन किया जाता है. गांव में दीपावली पर माता महालक्ष्मी की पूजा करने के अलावा पूर्वजों की पूजा की जाती है. इस दौरान पूर्वजों के निमित तर्पण कर खीर और चूरमे का भोग लगाया जाता है. साथ ही पूर्वजों की याद में पीपल और घास की रस्सी भी पूर्वजों की याद में नदी में विसर्जित की जाती है.

उज्जैन जिले के नागदा स्थित ग्राम डाबरी में गुर्जर समाज के लोग एक अनोखी परंपरा का निर्वहन करते हैं. गांव के सरपंच निलेश गुर्जर ने कहा कि लगभग 250 परिवार इस परंपरा का निर्वहन करते है. गांव में एक ऐसी परंपरा है जिसके तहत 3 दिनों तक गांव का कोई भी व्यक्ति बाहरी किसी व्यक्ति का चेहरा नहीं देखा और गांव में ही रहता है. इस दौरान गांव में प्रतिदिन व्यापार के लिए जाने वाले दूध को भी कहीं नहीं भेजा जाता और गांव में ही इसे बांट दिया जाता है.

इस परंपरा की विशेष बात यह है कि दीपावली पर गांव के लोग माता लक्ष्मी की पूजा नहीं करते बल्कि अपने पूर्वजों का निमित्त श्राद्ध और तर्पण करते हैं. इस पूजन के दौरान पितृ को खीर और चूरमे का भोग लगाया जाता है. साथ ही पुरुष वर्ग पीपल और घास से बनी रस्सी को पूर्वजों की याद में पानी में विसर्जित करते हुए वंश वृद्धि की कामना करते हैं.

इन गांव में मनाई जाती है परंपरा

नागदा के ग्राम डाबरी के साथ ही मंदसौर, नीमच, रतलाम से जुड़े कहीं गांव में इस परंपरा का निर्वहन किया जाता है. यह परंपरा काफी प्राचीन है. इसीलिए डाबरी, सिमरोल, बरखेड़ी, रतलाम, नीमच, मंदसौर में 1000 से अधिक परिवार दीपावली पर माता महालक्ष्मी की पूजा नहीं बल्कि पितृ पूजन अर्चन करते हैं.

कोई नहीं जाता गांव के बाहर

इस अनोखी परंपरा का निर्वहन करने के लिए गुर्जर समाज के लोग तीन दिनों तक गांव में ही रहते हैं. धनतेरस से लेकर दीपावली तक इस परंपरा का निर्वहन किया जाता है. इसीलिए कोई भी व्यक्ति गांव से बाहर नहीं जाता है साथ ही दूध और अन्य सामग्री भी विक्रय के लिए शहर में नहीं भेजी जाती है. गांव के लोगों का कहना है कि यह परंपरा इतनी अनोखी है कि इस दौरान किसी नए व्यक्ति को अपना चेहरा भी नहींदिखाया जाता.

दिवाली पर इस गांव में नहीं होती लक्ष्मी पूजा…सैकड़ों साल पुरानी परंपरा, करते हैं ये अनोखा काम

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