MP News: MP: चोरी न हो जाए सिलेंडर, इसलिए टॉयलेट में बन रहा बच्चों का मिड-डे-मील… बदबूदार खाना खा रहे मासूम – INA

मध्य प्रदेश के एक सरकारी स्कूल से सामने आई तस्वीरों ने एमपी की शिक्षा व्यवस्था की परतें खोल कर रख दी हैं. प्राथमिक स्कूल में मासूम बच्चों को दिया जाने बाला मिड-डे मील पिछले चार महीनों से शौचालय के भीतर तैयार किया जा रहा था. जिस स्थान को स्वच्छता के लिए बनाया गया वहीं भोजन पकाकर बच्चों को खिलाया जा रहा था. सबसे हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे समय तक जिम्मेदार अधिकारी इस स्थिति से अनजान बने रहे. अब मामला उजागर होने के बाद जांच और कार्रवाई की बात कही जा रही है, लेकिन सवाल यह है कि बच्चों के स्वास्थ्य के साथ इस तरह की लापरवाही कैसे और क्यों हुई?

दरअसल, डिंडोरी जिले के शहपुरा तहसील अंतर्गत डोमदादर गांव में प्राथमिक स्कूल के 30 बच्चों को शौचालय में बना हुआ खाना करीब 4 माह से लगातार खिलाया जा रहा था. इस मामले की पोल तब खुली जब ग्रामीणों ने इसकी शिकायत संबंधित अधिकारियों से की. शिकायत के बाद परियोजना अधिकारी और बीआरसी अधिकारी ने शनिवार को स्कूल का अचानक निरीक्षण किया. मौके पर पहुंचकर उन्होंने पाया कि स्कूल का किचन शेड पिछले तीन वर्षों से जर्जर हालत में पड़ा हुआ है और उपयोग के योग्य नहीं था.

क्या है मामला?

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि नवंबर 2025 में स्कूल से दो एलपीजी सिलेंडर चोरी हो गए थे. इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने अस्थायी समाधान के तौर पर शौचालय के अंदर ही भोजन बनाने की व्यवस्था शुरू कर दी. आरोप है कि यह निर्णय स्थानीय सरपंच और सचिव के निर्देश पर लिया गया था. निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि जिस शौचालय में खाना बनाया जा रहा था, वह पूरी तरह तैयार भी नहीं था. उसे अंदर से थोड़ा-बहुत बदलकर रसोई की तरह उपयोग किया जा रहा था. सबसे चिंताजनक बात यह रही कि स्कूल के शिक्षक और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने इस गंभीर स्थिति की जानकारी उच्च अधिकारियों तक नहीं पहुंचाई.

अधिकारियों ने क्या कहा?

करीब चार महीने तक यह लापरवाही लगातार चलती रही, जिसमें बच्चों की सेहत और अधिकारों की अनदेखी की गई. इस पूरे मामले पर परियोजना अधिकारी विपिन दहेरिया ने कहा कि शौचालय जैसे स्थान पर भोजन बनाना पूरी तरह गलत है और यह बच्चों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है. उन्होंने आश्वासन दिया कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. वहीं बीआरसी अधिकारी गुरु प्रसाद साहू ने बताया कि इस प्रकरण में शिक्षा विभाग के संबंधित कर्मचारियों और शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है. साथ ही पंचायत स्तर पर भी जांच शुरू कर दी गई है कि आखिर ऐसी व्यवस्था को अनुमति कैसे दी गई.

कब से चल रहा था खेल?

लेकिन सबसे हैरानी की बात यह है कि दिसंबर माह से यह सिलसिला लगातार जारी था, जहां बच्चे उसी जगह बना खाना खाने को मजबूर थे जो स्वच्छता के बुनियादी मानकों पर भी खरा नहीं उतरता. दुर्गंध और गंदगी के बीच भोजन तैयार होने से बच्चों की सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा था. फिलहाल प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से इस व्यवस्था को बदलते हुए भोजन बनाने का काम स्कूल के दूसरे सुरक्षित भवन में शुरू करा दिया है. हालांकि इस घटना ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश पैदा कर दिया है और लोगों के बीच सरकारी व्यवस्थाओं को लेकर अविश्वास भी बढ़ा है.

MP: चोरी न हो जाए सिलेंडर, इसलिए टॉयलेट में बन रहा बच्चों का मिड-डे-मील… बदबूदार खाना खा रहे मासूम


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