MP News: अब गायों की भी लगेगी E-Attendance, मध्य प्रदेश सरकार ने तैयार करवाई खास माइक्रो चिप, ऐसे करेगी काम – INA

MP News: अब गायों की भी लगेगी E-Attendance, मध्य प्रदेश सरकार ने तैयार करवाई खास माइक्रो चिप, ऐसे करेगी काम – INA

अभी तक आपने सुना था कि स्कूल कॉलेज और प्राइवेट सेक्टरों में ई-अटेंडेंस लगाई जाती थी. लेकिन अब मध्य प्रदेश में भी गायों की अटेंडेंस लगाई जाएगी. इसके लिए एक खास चिप तैयार की गई है, जिसे इंजेक्शन की मदद से गाय के कंधे पर लगाया जाएगा. गौशाला में रहने वाली करीब साढे चार लाख गायों का पूरा डाटा सरकार के पास होगा कि आखिर कितनी गाय गौशाला में हैं. कौन-सी गाय कब आई, कितनी बार गर्भवती हुई और वर्तमान में उनकी स्थिति क्या है. इस दिशा में पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने एक विस्तृत योजना तैयार की है जिसे हम अब कुछ दिनों में ही लागू करने जा रहे हैं.

छतरपुर पहुंचे मध्य प्रदेश सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग के मंत्री लखन पटेल ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने पशुपालन क्षेत्र में एक नई और तकनीकी पहल शुरू की है जिसे कुछ दिनों में ही मध्यप्रदेश की सभी गौशालाओं में गायों की डिजिटल हाजिरी यानी कि E-Attendance दर्ज की जाएगी. जिस तरह स्कूलों, कॉलेजों और दफ्तरों में उपस्थिति दर्ज की जाती है उसी तर्ज पर अब गायों की मौजूदगी का पूरा डेटा ऑनलाइन रिकॉर्ड किया जाएगा. राज्य की करीब साढ़े चार लाख गायों के शरीर में एक विशेष माइक्रो-चिप लगाई जाएगी. यह चिप इंजेक्शन के माध्यम से गाय के कंधे पर डाली जाएगी.

कैसे करेगी ये माइक्रो चिप काम?

विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह चिप पूरी तरह सुरक्षित है और इससे जानवरों को किसी प्रकार की हानि नहीं होगी. इस चिप में हर गाय की पहचान से जुड़ी विस्तृत जानकारी दर्ज रहेगी, जैसे उसकी नस्ल, उम्र, गर्भावस्था की स्थिति, दूध उत्पादन की क्षमता और गौशाला में आने की तारीख से लेकर हर बात का उल्लेख रहेगा. इसके साथ ही ईअटेंडेंस यानी कि हाजिरी लेने के लिए हर गौशाला संचालक को एक हैंडहेल्ड डिवाइस उपलब्ध कराया जाएगा, जिसके माध्यम से वे रोजाना गायों को स्कैन करेंगे. स्कैन करने के बाद यह डेटा स्वतः सॉफ्टवेयर में अपलोड हो जाएगा. इस प्रणाली से सरकार को यह पता चलेगा कि किसी दिन कौन-सी गाय मौजूद थी उसकी सेहत कैसी है और क्या कोई गाय लापता तो नहीं हुई. इससे रिकॉर्ड पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित रहेगा, क्योंकि एक बार चिप में डेटा दर्ज होने के बाद उसे बदला या मिटाया नहीं जा सकेगा.

गायों के कानों में लगते थे पीले टैग

इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य गौशालाओं में हो रहे फर्जीवाड़े पर रोक लगाना है. अब तक गायों के कानों में पीले टैग लगाए जाते थे, जिन्हें आसानी से हटाया या बदला जा सकता था. कई बार कुछ गौशालाएं गायों की संख्या बढ़ाकर सरकारी अनुदान का गलत लाभ लेती थीं. वहीं कुछ मामलों में दुधारू गायों को मृत दिखाकर बीमा राशि तक हासिल कर ली जाती थी. अब माइक्रो-चिप प्रणाली से हर गाय का स्थायी और सटीक रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा.

गायों की लगेगी डिजिटल अटेंडेंस

गौ-संवर्धन बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष स्वामी अखिलेश्वरानंद ने इसे एक सकारात्मक कदम बताया. उन्होंने कहा कि हमारे समय में स्कूलों में रजिस्टर में हाजिरी लगती थी अब गायों की अटेंडेंस डिजिटल रूप में लगेगी. इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और धोखाधड़ी रुकेगी. इसके साथ ही सरकार ने गौशालाओं में प्रति गाय अनुदान राशि को भी दोगुना कर दिया है. जो पहले 20 प्रतिदिन थी, अब 40 कर दी गई है. इससे सालाना सरकारी व्यय लगभग 450 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है. साथ ही, राज्य में सड़कों के किनारे गोठान विकसित किए जाएंगे ताकि आवारा पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर रखा जा सके और सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके.

अब गायों की भी लगेगी E-Attendance, मध्य प्रदेश सरकार ने तैयार करवाई खास माइक्रो चिप, ऐसे करेगी काम

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