MP News: भोपाल के बड़ा तालाब में दिखेंगे डल झील जैसे शिकारे, जानें किराया से लेकर टाइमिंग तक की हर डिटेल – INA


अगर आपका कश्मीर की डल झील में शिकारा राइड का सपना है और आप कश्मीर नहीं जा पा रहे थे, तो मायूस होने की जरूरत नहीं है, अब यही खूबसूरत एहसास भोपाल की झील में मिलने वाला है. भोपाल के बड़े तालाब में आज यानी गुरूवार से से डल झील की तर्ज पर बने 20 नए शिकारे चलने लगे हैं. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंत्रियों, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की मौजूदगी में इन शिकारों का शुभारंभ किया.
यह शहर के लोगों और पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षण का केंद्र बन गया है. इन शिकारों की खासियत यह है कि ये आधुनिक फाइबर रीइन्फोर्स्ड पॉलीयूरिथेन तकनीक से बनाए गए हैं, जो पानी को बिल्कुल भी प्रदूषित नहीं करते. यानी प्राकृतिक खूबसूरती का आनंद भी और तालाब की पारिस्थितिकी भी सुरक्षित रहेगी. भोपालवासियों के महीनों के इंतजार के बाद यह दिन आखिर आ ही गया.
भोपाल में शिकारे बने आकर्षण का केंद्र
आज से बड़ा तालाब सचमुच छोटे कश्मीर की झलक देने लगा है. हवा की हल्की लहरों पर डोलते रंग-बिरंगे शिकारे और उनमें बैठकर लोग झील की प्राकृतिक छटा का आनंद लेते नजर आएंगे. पिछले साल 13 जून 2024 को नगर निगम ने बड़े तालाब में एक शिकारे का ट्रायल रन कराया था. उस प्रयोग के सफल रहने के बाद अब एक साथ 20 शिकारे तालाब में उतारकर इस सुविधा को औपचारिक रूप से शुरू किया गया है.
आपको बता दें कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने करीब दस महीने पहले, 12 सितंबर को क्रूज और मोटर बोट सेवाओं पर रोक लगा दी थी. तब से तालाब में केवल सामान्य नावें ही चल रही थीं. इस बीच नगर निगम ने एक स्थानीय पंजीकृत मछुआरे से विशेष रूप से शिकारे की तर्ज पर नाव तैयार करवाई, जिसे सजाकर परीक्षण किया गया. उसी पहल को आगे बढ़ाते हुए अब यह आकर्षक सेवा शुरू की गई है.
2.3 किलोमीटर का होगा रूट
शिकारों को सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक चलाने की योजना है. जानकारी के अनुसार, किराया लगभग 150 रुपये प्रति व्यक्ति रखा जा सकता है, हालांकि अंतिम शुल्क अभी निर्धारित होना बाकी है. यह शिकारा लगभग 2.3 किलोमीटर का रूट तय करेगा और तालाब के बीच स्थित टापू के आसपास तक पर्यटकों को ले जाएगा.
शिकारा क्या होता है?
शिकारा असल में लकड़ी से बनी एक खूबसूरत पारंपरिक नाव है, जो कश्मीर की डल झील की पहचान मानी जाती है. ये नावें अलग-अलग आकारों में बनाई जाती हैं और आमतौर पर आधा दर्जन यात्रियों को आसानी से समेट सकती हैं. शिकारे के पिछले हिस्से पर बैठा चालक चप्पू से इसे चलाता है. पर्यटकों को लुभाने के लिए इन नावों को आकर्षक रंगों, पैटर्न और आरामदायक सीटों से सजाया जाता है. इसी वजह से यह डल झील आने वालों की पहली पसंद होती है.
भोपाल के बड़ा तालाब में दिखेंगे डल झील जैसे शिकारे, जानें किराया से लेकर टाइमिंग तक की हर डिटेल
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