MP News: छात्र राजनीति, लव मैरिज की चाहत और नेपाल टूर… अर्चना तिवारी के गायब होने की कहानी बड़ी ही ‘फिल्मी’ – INA


भोपाल से गायब हुई अर्चना तिवारी का पता चल गया है. पुलिस उसे भोपाल लेकर पहुंची और पूछताछ की जा रही है. पूछताछ में कई राज खुलकर सामने आए हैं जिसकी वजह से यह तो साफ है कि अर्चना बहुत ही शातिर महिला है. वह अपने परिजनों की आंखों में धूल झोंकती रही और आखिर में उसकी बनाई हुई मिस्ट्री स्टोरी पूरी तरह से खोखली साबित हुई. अर्चना पेशे से खुद भी वकील है और इंदौर में रहकर जज की तैयारी कर रही है. ऐसे में यह तो साफ है कि वह कानून को बहुत अच्छे से समझती है. लेकिन, फिर भी उसने रहस्यमय तरीके से लापता होने की कहानी रची. चलिए जानते हैं अर्चना के सफर की एक-एक डेस्टीनेशन के बारे में…
अर्चना मध्य प्रदेश के कटनी जिले की रहने वाली है और वह इंदौर में सिविल जज की तैयारी कर रही है. 29 साल की अर्चना 7 अगस्त को नर्मदा एक्सप्रेस के कोच नंबर B-3 में बैठी थी. वह रक्षाबंधन की छुट्टी में अपने घर जा रही थी. जैसे ही उसकी ट्रेन भोपाल पहुंची और अचानक अर्चना लापता हो गई. उसकी सीट पर उसका बैग भी रखा मिला लेकिन उसका कोई अता-पता नहीं चल पा रहा था. परिजन परेशान हो गए और उन्होंने पुलिस से संपर्क किया. पुलिस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की और जांच में जुट गई.
पुलिस इस केस में अलग-अलग कई एंगल खोजने में जुटी रही. वहीं भोपाल स्टेशन के पास से अर्चना लापता हुई थी वहां के सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज खंगालती रही. 8 अगस्त को परिजनों ने कटनी जीआरपी को शिकायत दी थी जिसके बाद मामला दर्ज किया. 9 अगस्त को रानी कमलापति जीआरपी ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी. अर्चना के लापता होने के 12 दिन बाद उसका पता चल पाया है. पुलिस उसे नेपाल की सीमा से लेकर भोपाल पहुंची है जहां अर्चना ने पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. आखिर में जीआरपी पुलिस ने अर्चना को उनके परिजनों को सौंप दिया है.
कहां-कहां घूमती रही अर्चना
अपने रहस्यमयी तरीके से लापता होने की कहानी बनाने के बाद अर्चना देश के कई शहरों में चक्कर लगाती रही और आखिर में नेपाल चली गई. नेपाल में भी वह कई दिन तक रुकी और लौटकर नेपाल की सीमा से उसने अपनी मां को कॉल किया. जिसके बाद उसकी लोकेशन ट्रेस हुई और अर्चना का पता पुलिस को लगा. अर्चना नर्मदापुरम के जंगलों में उतर गई थी. वहां पर उसने अपने एक दोस्त तेजेंद्र सिंह से मदद मांगी थी. तेजेंद्र सिंह ने नर्मदापुरम से उसे कार में बैठाया और सीथा इटारसी लेकर पहुंचा और सारांश के पास छोड़ दिया.
नेपाल तक जा पहुंची अर्चना
सारांश की कार से अर्चना सीधे शुजालपुर पहुंची और इंदौर होते हुे हैदराबाद के लिए रवाना हो गई. हैदराबाद में 2-3 दिन रुकने के बाद उसने मीडिया में आई खबरों को देखा ौर समझ गई कि उसका मामला अब चर्चा में है, इसलिए उसे सुरक्षित महसूस नहीं हुआ. उसने 11 अगस्त को अर्चना सारांश के साथ हैदराबाद से सीधे दिल्ली पहुंची और टैक्सी करके नेपाल के धनगढ़ी पहुंच गई. यहां से वह काठमांडू भी पहुंची. वहां पर सारांश ने अपने दोस्तों से बात करके अर्चना को छोड़ा और एक होटल में ठहरा दिया. सारांश वापस इंदौर लौट आया था. अर्चना ने पुलिस पूछताछ में बताया कि तेजेंद्र और सारांश ने दोस्त के नाते उसकी मदद की है और कोई गलत काम नहीं किया.
नदी-जंगल, नाले खंगालती रही पुलिस
वहीं रानी कमलापति स्टेशन की जीआरपी पुलिस आसपास के इलाकों में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही थी. पुलिस ने नर्मदा नदी में बह जाने की शंका के चलते 32 किलोमीटर तक नदी में ही सर्च ऑपरेशन चलाया. जबलपुर तक अलग-अलग टीमों ने अर्चना को ढूंढने की कोशिश की. 2000 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज इस केस में खंगाले गए. इंदौर से लेकर बिलासपुर तक सभी रेलवे स्टेशनों पर अर्चना की तलाश की गई.
क्यों रची ये साजिश?
पुलिस की पूछताछ में अर्चना ने साफ किया कि उसके परिवारवाले उसकीी शादी उसकी मर्जी के खिलाफ करने जा रहे थे. उसके लिए रिश्ते भी देखे जा रहे थे. परिजनों ने उसका रिश्ता एक पटवारी लड़के से तय तक कर दिया था. परिजनों से वह बार-बार मना कर रही थी लेकिन परिवारवाले उस पर शादी को लेकर दबाव बना रहे थे. बस इसी वजह से वह मानसिक रूप से परेशान हो गई थी. अर्चना ने कहा है कि वह अब तब तक घर नहीं जाएगी जब तक सिविल जज नहीं बन जाती और तब तक शादी भी नहीं करेगी.
छात्र राजनीति, लव मैरिज की चाहत और नेपाल टूर… अर्चना तिवारी के गायब होने की कहानी बड़ी ही ‘फिल्मी’
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