MP News: बाघों को मिलेगी संजीवनी, गूंजेगी दहाड़… ‘वनतारा 2.0’ ऐसे सच करेगा सपना – INA

MP News: बाघों को मिलेगी संजीवनी, गूंजेगी दहाड़… ‘वनतारा 2.0’ ऐसे सच करेगा सपना – INA

वनतारा यानि जंगल का तारा… एक ऐसा नाम जिसकी खनक आज देश ही नहीं दुनिया में गूंजती है. एक ऐसी पहचान जो खतरे में पड़े जंगली जानवरों के लिए वरदान साबित हो रही है. वनतारा, भारत में अपनी तरह का पहला इनिशिएटिव है, जहां जानवरों की पूरी देखभाल की जाती है. ये नाम अब मध्यप्रदेश टाइगर फाउंडेशन समिति के साथ जुड़ गया है. दरअसर मध्य प्रदेश सरकार ने ग्रीन्स जूलॉजिकल रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर (वनतारा) के साथ एक एमओयू साइन किया है जो मध्य प्रदेश के टाइटर रिजर्व की तस्वीर बदलकर रख देगा. आइए जानते हैं कि आखिर ऐसी क्या जरूरत आन पड़ी कि मध्य प्रदेश सरकार को ग्रीन्स जूलॉजिकल रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर के साथ की जरूरत पड़ गई.

बता दें कि रातापानी और माधव नेशनल पार्क को टाइगर रिजर्व घोषित करने के साथ अब मध्य प्रदेश में कुल 9 टाइगर रिजर्व हैं. इन टाइगर रिजर्व में कान्हा, संजय दुबरी, पेंच, रातापानी, माधव नेशनल पार्क, बांधवगढ़, पन्ना, नौरादेही और सतपुड़ा हैं. देश में 9 टाइगर रिजर्व के साथ ही मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा मिला हुआ है. साल 2022 की गणना के मुताबिक मध्य प्रदेश के इन 9 टाइगर रिजर्व में 785 बाघ हैं जो 2018 की तुलना में काफी ज्यादा हैं. साल 2018 में इनकी संख्या 526 थी. ये आंकड़े भले ही बढ़ते हुए दिखाई पड़ते हों लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं. लगातार हो रही टाइगर की मौत से नए संकट की आहट सुनाई देने लगी है. आंकड़ों की बात करें तो साल 2025 में अब तक पूरे देश में 117 टाइगर की मौत हो चुकी है जिनमें से अकेले मध्य प्रदेश से 36 टाइगर की मौत चुकी है.

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भारत में अब 3682 बाघ हैं मौजूद

साल 2022 की गणना के मुताबिक भारत में अभी 3682 बाघ मौजूद हैं. भारत में हर चार साल में बाघ की गणना की जाती है. साल 2018 में की गई गणना की बात करें तो उस वक्त भारत में बाघों की संख्या 2967 थी. बाघ में सालाना 6 प्रतिशत की दर से बाघ बढ़े हैं. हालांकि एक बार फिर हालात बदले हुए दिखाई पड़ रहे हैं. इस साल इनकी संख्या में कमी देखी जा रही है. साल 2025 में अब तक पूरे देश में 117 टाइगर की मौत हो चुकी है जिनमें से अकेले मध्य प्रदेश से 36 टाइगर की मौत चुकी है.

मध्य प्रदेश में क्या-क्या होगा बदलाव?

वन्यजीवों को बचाने के लिए स्वास्थ्य चिकित्सा और बचाव के तरीकों में बदलाव किया जाएगा. इसके लिए नए पशु चिकित्सा अस्पताल और नैदानिक प्रयोगशालाएं बनाई जाएंगी. इसके साथ ही जानवरों को बचाने के लिए पहले से जो सुविधाएं मौजूद हैं उन्हें आधुनिक और उन्नत किया जाएगा. प्रदेश के चिड़ियाघरों के लिए एकीकृत डिजिटल प्रबंधन सूचना प्रणाली विकसित की जाएगी. विशेष रूप से चिड़ियाघरों में मौजूद बाघों की आबादी का आणविक आनुवंशिक विश्लेषण ग्रीन्स सेंटर की लैब में संभव होगा. वन्यजीवों को प्रभावित करने वाली बीमारियों की रोकथाम, निदान और उपचार के लिए संयुक्त अनुसंधान किया जाएगा. यह एमओयू दो साल की अवधि के लिए लागू रहेगा. इस दौरान ग्रीन्स सेंटर राज्य शासन को तकनीकी प्रोटोकॉल, पशु चिकित्सा पद्धतियों और पशु कल्याण मानकों पर सुझाव देगा.

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वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट ने उठाए सवाल

टाइगर की लगातार हो रही मौतों को लेकर वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट अजय दुबे का कहना है कि इसे लेकर टाइगर टास्क फोर्स बनाने की जरूरत है. ग्रामीणों की मदद लेने की जरूरत है. लगातार मॉनिटरिंग करने की जरूरत है. हम कोशिश करके जरूर टाइगर की मौतों को रोक सकते हैं. कैसे शिकारी जंगल में खुले घूम रहे हैं. ये बिना किसी कर्मचारी और अधिकारी के मिले असंभव है?

एमपी में बाघों की मौत के मुख्य कारण

  1. आपसी संघर्ष– बाघों के बीच वर्चस्व की लड़ाई बढ़ रही है, नर बाघों के बीच ये लड़ाई ज्यादा है.
  2. अवैध शिकार– अवैध शिकार और तस्करी लगातार बढ़ रही है. बाघों की खाल और हड्डियों की तस्करी
  3. बिजली का करंट– खेतों में लगाए गए बिजली के तारों से करंट लगने से भी बाघों की मौत होती है.
  4. प्राकृतिक कारण– बदलता प्राकृतिक वातारण बाघों केलिए मुफीद नहीं, वृद्धावस्था, बीमारी भी वजह
  5. मानव-पशु संघर्ष– इंसानी बस्तियों के पास आने से बाघों के मारे जाने का खतरा हो जाता है ज्यादा .
  6. हादसा बड़ा कारण– बड़े वाहनों और ट्रेनों की चपेट में आने से भी कई बाघों की मौत हो जाती है.

बाघों को मिलेगी संजीवनी, गूंजेगी दहाड़… ‘वनतारा 2.0’ ऐसे सच करेगा सपना

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