MP News: MP में कुल 65000 BLO, सिर्फ एक ने पूरा किया अपना काम; कैसे पूरा होगा SIR का टारगेट? – INA

MP News: MP में कुल 65000 BLO, सिर्फ एक ने पूरा किया अपना काम; कैसे पूरा होगा SIR का टारगेट? – INA

मध्य प्रदेश में मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान भारी काम के बोझ का मामला गंभीर होता जा रहा है. केंद्रीय चुनाव आयोग की कलेक्टरों को फटकार के बाद अब बीएलओ पर सख्ती बढ़ा दी गई है. इसी दबाव के बीच प्रदेशभर में 30 से अधिक बीएलओ के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है, जबकि कई जिलों से तनाव और मानसिक दबाव की वजह से आत्महत्या तक की घटनाएं सामने आई हैं.

डिजिटल अपडेट न करने पर सख्त कार्रवाई

चुनाव आयोग ने इस बार एसआईआर प्रक्रिया में डिजिटल अपडेट को अनिवार्य बनाया है, लेकिन कई बीएलओ द्वारा समय पर ऐप में एंट्री न करने पर संबंधित अधिकारियों ने नोटिस जारी कर निलंबन जैसी कार्रवाई की है. बताया गया कि प्रदेश के लगभग सभी जिलों से बीएलओ पर कार्रवाई की रिपोर्ट भेजी जा रही है. चुनावी प्रक्रिया की समय-सीमा और ओवरलोड कार्यभार के कारण बीएलओ पर अतिरिक्त दबाव लगातार बढ़ रहा है, जिसके चलते कई अधिकारी मानसिक तनाव की शिकायत भी कर रहे हैं.

दतिया में बीएलओ की मौत, परिवार ने लगाया दबाव का आरोप

दतिया में एक बीएलओ ने कथित रूप से काम के दबाव में आकर आत्महत्या कर ली. बीएलओ के परिजनों ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक दबाव की वजह से उसने यह कदम उठाया. इसी तरह भोपाल और शहडोल में पांच बीएलओ को समय पर कार्य पूरा न करने पर निलंबित किया गया. परिजनों और कर्मचारी संगठनों ने आरोप लगाया है कि बीएलओ को कई बार एक ही दिन में असंभव मात्रा में काम सौंपा जा रहा है, जिसकी वजह से वे मानसिक रूप से टूट रहे हैं.

छतरपुर: नायब तहसीलदार और बीएलओ पर गिरी गाज

छतरपुर में आयोग की समीक्षा के दौरान लापरवाही सामने आने पर नायब तहसीलदार सहित कई बीएलओ पर कार्रवाई की गई है. कई को कारण बताओ नोटिस जारी हुए हैं, जबकि कुछ को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई है.

15 प्रतिशत ही फॉर्म जमा हो सके

मध्य प्रदेश में मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) का काम इस बार बीएलओ के लिए बड़ा बोझ बन गया है. प्रदेश में अब तक केवल 15% फॉर्म ही जमा हो पाए हैं, जबकि फॉर्म वितरण का आंकड़ा 99% से ज्यादा है. यानी फॉर्म घर-घर बांट तो दिए गए हैं, लेकिन उन्हें वापस लेना, जांचना और फिर ऑनलाइन भरना बीएलओ के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है.

गणना कार्य और SIR दोनों का दबाव

प्रदेश के कई जिलों में एक साथ गणना कार्य भी चल रहा है, जिसकी वजह से बीएलओ सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक ड्यूटी कर रहे हैं. कई जगह शिकायत है कि सर्वे और ऑनलाइन अपडेट के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया जा रहा. एक बीएलओ के मुताबिक, “हमसे इतने कम समय सीमा में दो-दो काम कराए जा रहे हैं, दबाव बेहद ज्यादा है.”

इंटरनेट-सिस्टम ने बढ़ाई मुश्किलें

ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की कमी, पोर्टल के धीमे चलने और टेक्निकल दिक्कतों ने बीएलओ का काम और कठिन बना दिया है. नाम जोड़ने, हटाने और फॉर्म डिजिटाइज करने में समय दोगुना लग रहा है. कई जगह सर्वे रिपोर्ट और एसआईआर फॉर्म साथ में भरना पड़ रहा है, जिससे परेशानी बढ़ी है.

सबसे ज्यादा दबाव बीएलओ पर

बीएलओ का कहना है कि फील्ड विजिट, फॉर्म भरवाने, दस्तावेज जांचने और डिजिटाइजेशन के लिए लक्ष्य तो तय हैं, लेकिन सहयोग नगण्य है. यही वजह है कि प्रदेश में फॉर्म जमा करने का प्रतिशत बहुत कम है. कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश में एसआईआर का काम सिर्फ आंकड़ों पर नहीं, बल्कि फील्ड स्तर पर बीएलओ की क्षमता और संसाधनों पर भी भारी पड़ रहा है.

MP में कुल 65000 BLO, सिर्फ एक ने पूरा किया अपना काम; कैसे पूरा होगा SIR का टारगेट?

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