Nation- 100 कमरे, 200 साल पुराना, फिर भी वीरान… इस श्रापित आलीशान महल का क्या है रहस्य?- #NA

खंडहर हुआ महल
कृषि प्रधान भारत देश में बारिश का मौसम एक तरफ किसानों के चेहरे पर खुशियां लेकर आता है. वहीं, दूसरी तरफ झारखंड की राजधानी रांची में बारिश का सीजन आते ही एक श्रापित राजा के किले (महल) पर हर साल आकाशीय बिजली का कहर देखा जाता है, जिससे स्थानीय लोग डर और दहशत में आ जाते हैं. यह किला लगभग 200 साल पुराना है, जिस पर बीते कई सालों से लगातार आकाशीय बिजली गिर रही है.
चौंकिए मत! यह हकीकत है. रांची के पिठोरिया थाना क्षेत्र के तहत आने वाले रांची-पतरातू रोड पर पिठोरिया गांव स्थित है, जहां पर लगभग 200 सालों से भी ज्यादा पुराना एक रहस्यमय राजा जगतपाल सिंह का 100 कमरों वाला आलीशान राजमहल हुआ करता था. एक श्राप के कारण इस महल पर हर साल आकाशीय बिजली कहर बनकर गिरती है, जिस कारण से यह आलीशान महल धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील हो गया.
नहीं थम रहा महल पर बिजली गिरने का सिलसिला
हालांकि, आज भी राजा जगतपाल सिंह के रहस्यमय महल (किले) पर आकाशीय बिजली गिरने का सिलसिला थमा नहीं है. बारिश के आगमन के साथ ही खंडहर में तब्दील होने के बावजूद किले पर आकाशीय बिजली गिरने का सिलसिला जारी है. स्थानीय लोगों की माने तो ऐसा इसलिए होता है क्योंकि राजा जगतपाल सिंह ने देश के साथ गद्दारी की थी और ब्रिटिश सैनिकों का समर्थन किया था.
राजा ने दिया था ब्रिटिश सैनिक का साथ
1857 के विद्रोह के दौरान उन्होंने ब्रिटिश सैनिक का साथ देते हुए स्वतंत्रता सेनानी ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव को पकड़वाने में ब्रिटिश अधिकारी थॉमस विलकिंग्सन की मदद की थी. इसके बाद ब्रिटिश शासकों ने ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव को फांसी पर चढ़ा दिया था. हालांकि, फांसी के पूर्व ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव ने राजा जगतपाल सिंह देश के साथ गद्दारी कर श्राप देते हुए कहा था कि तुम्हारे साम्राज्य का अंत होगा. तुम्हारा सबसे प्रिय 100 कमरों वाला महल (किले )का तहस-नहस हो जाएगा.
स्वतंत्रता सेनानी ठाकुर विश्वनाथ ने दिया था श्राप
उस किले पर तब तक आसमानी कहर बरसेगा (बिजली गिरेगी) जब तक वह मिट्टी में ना मिल जाए. स्थानीय लोगों के अनुसार, ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव के श्राप के कारण ही हर साल मानसून के महीने में राजा जगतपाल सिंह के किले पर बिजली गिरती है, जिस कारण उनका भव्य किला पूरी तरह से नष्ट हो चुका है. हालांकि, किले के कुछ अवशेष अभी मौजूद हैं, जो आकाशीय कहर के कारण हुए क्षति की गवाही देता है.
100 से ज्यादा कमरे वाला महल हुआ खंडहर
क्षेत्र के बूढ़े बुजुर्गों ने बताया कि राजा जगतपाल सिंह के किले का रहस्य 200 वर्षों से भी ज्यादा पुराना है. लगभग 30 एकड़ में फैले दो मंजिला महल में 100 से ज्यादा कमरे थे. इस महल की खासियत यह थी कि इसमें मुगलकालीन वास्तुकला का प्रयोग किया गया था. इस किले में रानियों के नहाने के लिए अलग से तालाब का निर्माण किया गया था. वहीं पूजा करने के लिए एक भव्य शिव मंदिर भी बनाया गया था.
हालांकि, राजा जगतपाल सिंह की गद्दारी और ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव द्वारा दिए गए श्राप के कारण कुछ ही सालों के बाद उनका भव्य 100 कमरों वाले महल पर आकाशीय बिजली का कहर शुरू हो गया. धीरे-धीरे राजा जगतपाल सिंह का पूरा परिवार और उनका महल समाप्त हो गया. भव्य महल आज खंडहर के रूप में मौजूद है.अब यह महज संयोग है या वाकई राजा जगतपाल सिंह का किला श्रापित है. जिस कारण हर साल उसी किले पर बिजली गिरती है.
जानें भूवैज्ञानिकों के अनुसार महल पर क्यों गिरती बिजली
इसे लेकर भूवैज्ञानिकों की माने तो राजधानी रांची और खास करके पिठोरिया वाले क्षेत्र में मौजूद पहाड़ों और उच्चे-उच्चे पेडों के नीचे काफी बड़ी मात्रा में लोह अयस्क की मौजूदगी है, जिस कारण आसमानी बिजली को यह अपनी तरफ आकर्षित करते हैं. आकाशीय बिजली के लिए एक सुचालक के रूप में रास्ता उपलब्ध कराते हैं, यही वजह है कि बारिश के मौसम में उस स्थान पर और खासकर किले पर बिजली गिरती है.
ये भी पढ़ें-: दिल्ली यूनिवर्सिटी में कैसे होगा एडमिशन, क्या है प्रोसेस? Tv9 के साथ दूर करें हर कंफ्यूजन
100 कमरे, 200 साल पुराना, फिर भी वीरान… इस श्रापित आलीशान महल का क्या है रहस्य?
[ad_2]
देश दुनियां की खबरें पाने के लिए ग्रुप से जुड़ें,
[ad_1]
#INA #INA_NEWS #INANEWSAGENCY
Copyright Disclaimer :-Under Section 107 of the Copyright Act 1976, allowance is made for “fair use” for purposes such as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship, and research. Fair use is a use permitted by copyright statute that might otherwise be infringing., educational or personal use tips the balance in favor of fair use.
Credit By :-This post was first published on https://www.tv9hindi.com/, we have published it via RSS feed courtesy of Source link,





.webp)




