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100 टन AC का भार और रोज 2000 लोगों का खाना... फिर भी बिजली बिल जीरो; ऐसी है दुनिया की सबसे बड़ी सोलर डिश

सांकेतिक तस्वीर

गुजरात के वडोदरा में एक ऐसा प्रोजेक्ट लगाया गया है, जिससे हर रोज 2000 लोगों के लिए खाना बनाया जा सकता है. इसके बाद गैस और बिजली के बिल में कमी आएगी. दरअसल, वडोदरा में दुनिया की सबसे बड़ी सोलर डिश लगाई गई है. ये एक एनवायरनमेंट-फ्रेंडली टेक्नोलॉजी है, जो कार्बन उत्सर्जन (Carbon emissions) कम करने और ऊर्जा की लागत (energy cost) को बचाने में मदद करेगा.

ऐसे में इस अल्ट्रा मॉर्डन 500 वर्गमीटर की सोलर डिश की मदद से, जहां हर 2 रोज हजार लोगों के लिए खाना बनाया जा सकेगा. वहीं साथ में 100 टन का एसी प्लांट भी चलाया जा सकेगा. सोलर डिश टेक्नोलॉजी ‘सोलर कंसंट्रेटर’ नाम से भी काफी मशहूर है. सोलर कंसन्ट्रेटर एक ऐसी तकनीक है, जिसमें शीशे या लेंस की मदद से सूरज की रोशनी को एक छोटे से पॉइंट या लाइन पर फोकस किया जाता है. इससे बहुत ज्यादा तापमान पैदा होता है, जिसका इस्तेमाल बिजली उत्पादन (CSP- केंद्रित सौर ऊर्जा) में, इंडस्ट्रियल वर्क और सोलर कुकर में खाना बनाने के लिए किया जाता है. पैराबोलिक डिश और ल्यूमिनसेंट सोलर कंसन्ट्रेटर इसके प्रमुख उदाहरण हैं.

सोलर डिश की क्या है खासियत?

सोलर डिश की खासियतों की बात करें तो ये लगभग 500 वर्गमीटर क्षेत्र में फैली हुई है, जो करीब 7 मंजिला इमारत जितनी ऊंची है. यही नहीं ये करीब 300 से ज्यादा शीशों से बनी हुई है. ये सूरज की रोशनी को फोकस कर तेज गर्मी पैदा करती है. पहले आश्रम में रोजाना बड़ी मात्रा में लकड़ी का इस्तेमाल होता था, जिससे खर्च भी बढ़ता था और पर्यावरण को नुकसान भी पहुंचता था. अब सोलर डिश के चालू होने से लकड़ी का इस्तेमाल पूरी तरह बंद हो जाएगा, जिससे कार्बन उत्सर्जन कम होगा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा.

मुनि सेवा आश्रम डॉक्टर विक्रम मुनि बताते हैं कि पहले रोजाना लगभग 1000 किलो लकड़ी खर्च होती थी. सोलर डिश को कम जगह में लगाया गया है, जो हॉस्पिटल जैसी संस्थाओं के लिए काफी आसान है. इस तकनीक से हॉस्पिटल के लगभग 100 टन क्षमता वाले एयर कंडीशनिंग सिस्टम को चलाया जाएगा. पहले एसी सिस्टम बिजली और गैस पर निर्भर था, लेकिन अब यह स्टीम आधारित होगी. इससे गैस की जरूरत खत्म हो जाएगी और हवा में किसी तरह का प्रदूषण नहीं होगा.

रोज 2000 लोगों का बनेगा खाना

सोलर डिश से तैयार स्टीम का इस्तेमाल आश्रम में रोजाना करीब 2000 लोगों के लिए खाना बनाने में किया जा सकेगा. इसके अलावा कपड़े धोने, स्टेरिलाइजेशन, गर्म पानी और अन्य जरूरी कामों में भी यही स्टीम काम आएगी. यह सोलर डिश सूरज की किरणों को फोकस कर ज्यादा गर्मी पैदा करती है, जिससे सोलर बॉयलर के जरिए स्टीम बनती है. एक डिश से 100 टन तक एयर कंडीशनिंग चलाई जा सकती है. फिलहाल गोरज में दो सोलर डिश काम कर रही हैं, जिससे 200 टन की कुल एसी क्षमता हासिल हो चुकी है.

इस डिश की खास बात यह है कि यह सूरजमुखी की तरह सूरज की दिशा के अनुसार दोनों ओर घूमती रहती है, जिससे ज्याजा एनर्जी मिलती है. इस अत्याधुनिक तकनीक को भारत में लाने वाले दीपक गढ़िया ने बताया कि इसकी मूल तकनीक ऑस्ट्रेलिया से ली गई थी, लेकिन अब इसका पूरा निर्माण और विकास भारत में ही किया गया है. यह सोलर डिश दुनिया की सबसे बड़ी सोलर डिश में गिनी जा रही है.

100 टन AC का भार और रोज 2000 लोगों का खाना… फिर भी बिजली बिल जीरो; ऐसी है दुनिया की सबसे बड़ी सोलर डिश

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