Nation- 16 शहरों के लिए ‘संजीवनी’ बना कानपुर PGI, हर दिन 1000 मरीज करा रहे इलाज- #NA

उत्तर प्रदेश में अगर किसी गंभीर मरीज का इलाज कराना होता है तो सालों से लोग लखनऊ के पीजीआई का रुख करते थे. अब पिछले दो सालों से कानपुर पीजीआई ने ना सिर्फ कई गंभीर मरीजों की जान बचाई है, बल्कि 16 शहर के मरीजों को सुपर स्पेशलिटी इलाज मिल रहा है. यहां पर मौजूद ऐसी आधुनिक मशीनें हैं जो पूरे देश में इक्का-दुक्का जगह पर हैं. इसके अलावा यहां पर आने वाला खर्च प्राइवेट अस्पतालों के मुकदबले 90% तक कम होता है. यही कारण है कि मात्र दो साल में तकरीबन एक हजार से बारह सौ मरीज रोज यहां की ओपीडी में आते है.

आज से ठीक दो साल पहले 14 अगस्त 2023 को कानपुर को एक बड़ी सौगात मिली, जिसका नाम था गणेश शंकर विद्यार्थी सुपर स्पेशलिटी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट, जिसको आम भाषा में पीजीआई कहा जाता है. इससे पहले पीजीआई लखनऊ में था, जहां पर इलाज कराने के लिए जाना पड़ता था. जिस समय कानपुर का पीजीआई खुला था, उस समय यहां सिर्फ न्यूरो की ओपीडी होती थी जो कि अब बढ़कर 9 सुपर स्पेशलिटी हो गई है.

अगर हम कानपुर पीजीआई की बात करें तो इस समय यहां पर जो सुपर स्पेशलिटी सुविधाएं हैं वो है न्यूरोलॉजी, न्यूरो सर्जरी, न्यूरो रेडियोलॉजी, गैस्ट्रो मेडिसिन, यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, पेन मेडिसिन, एंडोक्रिनोलॉजी, पीएमआर, क्रिटिकल केयर मेडिसिन और न्यूरो एनेस्थीसिया. इसमें से पेन मेडिसिन देश की पहली ब्रांच है.

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16 शहर, 1000 से ज्यादा मरीज, आधुनिक सुविधाएं

कानपुर पीजीआई के नोडल अधिकारी डॉ. मनीष सिंह के अनुसार ना सिर्फ कानपुर के बल्कि आसपास के तकरीबन 16 शहरों के मरीज अपना इलाज कराने आते हैं. अगर आंकड़ों की बात करें तो यहां पर रोज तकरीबन 1000 से 1200 मरीजों की ओपीडी होती है. यहां आने पर सरकारी अस्पताल नहीं बल्कि प्राइवेट अस्पताल का फील आता है.

मरीज मौत के मुहाने से आए बाहर

कानपुर पीजीआई में कई ऐसे मामले सामने आए, जहां मरीज मौत के मुहाने तक पहुंच चुका था. यहां तक कि बड़े-बड़े प्राइवेट अस्पतालों ने भी हाथ खड़े कर दिए थे.

केस 1- कुछ दिन पहले एक गर्भवती महिला आई जिसके पेट में 28 हफ्ते का गर्भ था. उस महिला को ब्रेन ट्यूमर था और जच्चा बच्चा दोनों के बचने की कोई उम्मीद नहीं थी. 28 हफ्ते के गर्भ को हटाने के लिए भी सरकार और कोर्ट से अनुमति लेनी पड़ती.

ऐसे में पीजीआई के डॉक्टर्स ने बीड़ा उठाया और इलाज करके महिला को भी जिंदा रखा और गर्भ को 38 हफ्ते तक ले आए. इसके बाद महिला की डिलीवरी करवाई गई और साथ ही ब्रेन ट्यूमर का इलाज भी किया गया. आज तीन महीने से महिला पीजीआई में भर्ती है और जच्चा बच्चा दोनों सुरक्षित हैं.

केस 2- इसके अलावा कुछ दिनों पहले एक व्यक्ति को लाया गया था जिसने अपने सर में खुद ही लंबी कील ठोक ली थी. उसको भी डॉक्टर्स ने बचाया और उसके सर की कील निकाल कर व्यक्ति की जान बचाई.

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पीजीआई में ऐसे करा सकते हैं इलाज

अगर किसी को जरूरत पड़ जाए तो मरीज को लेकर कानपुर पीजीआई पहुंचें जो हैलेट अस्पताल परिसर के अंदर ही स्थित है. यहां पर ग्राउंड फ्लोर पर 50 रुपए का पर्चा बनता है. यहां के रेट केजीएमयू के बराबर रखे गए हैं. इसके बाद प्रथम तल पर सभी ओपीडी बने हुए हैं, जहां जाने के लिए सीढ़ियों, लिफ्ट, रैंप सभी सुविधाएं मौजूद हैं.

सबसे खास बात यह है कि यहां पर कई जगह टीवी मॉनिटर लगे हुए हैं, जिस पर हर चीज के रेट लगातार दिखाए जाते हैं. इसलिए कोई भी दलाल आपको बेवकूफ नहीं बना सकता. पीजीआई में सरकारी दवाखाना भी मौजूद है, जहां पर हजारों रुपए की सस्ती और महंगी दवाएं मुफ्त मिल जाती हैं.

यहां पर भी मॉनिटर लगा हुआ है जिसको देखकर आपको पता चल जाएगा कि कौन सी दवा मेडिकल स्टोर में मौजूद है और कौन सी नहीं. कानपुर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ संजय काला बताते हैं कि आयुष्मान मरीजों के लिए यहां पर इलाज पूरी तरह से मुफ्त है और इसके अलावा अन्य मरीजों के इलाज में भी प्राइवेट अस्पतालों के मुकाबले 80 से 90% कम खर्च आता है. कानपुर पीजीआई 16 शहरों के मरीजों के लिए वरदान बना हुआ है.

16 शहरों के लिए ‘संजीवनी’ बना कानपुर PGI, हर दिन 1000 मरीज करा रहे इलाज

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