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साल के 232 दिन गर्मी का प्रकोप, क्या 2050 तक आग का गोला बन जाएगा भुवनेश्वर? डरा देगी ये रिपोर्ट

सांकेतिक तस्वीर

भुवनेश्वर में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है. जलाशयों को खत्म कर बहुमंजिला इमारतें बनाई जा रही हैं और हर साल हजारों की संख्या में मकान बन रहे हैं. ऐसी स्थित में पेड़ों को तेजी से काटा जा रहा है. जिसको लेकर एक अध्यनन में सामने आए आंकड़ों ने सभी को हैरान कर दिया है. 2018 की तुलना में 2024 में शहर में मकान निर्माण में 23 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. इस दौरान 9.8 फीसदी पेड़ काटे जा चुके हैं, जबकि 75 फीसदी तालाबों को समाप्त कर उन पर मकान बनाए गए हैं. यही वजह है कि इस साल की अपेक्षा आने वाले साल में गर्मी की लहर शहरवासियों के लिए बड़ा खतरा बन सकती है.

इंटरनेशनल फोरम फॉर एनवायरमेंट, सस्टेनेबिलिटी एंड टेक्नोलॉजी (आईफॉरेस्ट) की रिपोर्ट में चेतावनी वाले आंकड़े सामने आए हैं. मौजूदा हालात बने रहे तो 2050 तक भुवनेश्वर में गर्मी की लहर और भी भयावह हो जाएगी. रिपोर्ट के अनुसार, 2050 तक शहर का तापमान 2 से 2.5 डिग्री तक बढ़ने का अनुमान है. 2024 की स्थिति इसका सबूत है. लगातार 17 दिन तक तापमान 40 डिग्री से ऊपर रहा है.

कैसा रहता है मौसम?

पूरे साल में 232 दिन गर्मी को लेकर चेतावनी जारी की गई. इनमें से 77 दिन येलो और 55 दिन ऑरेंज वार्निंग रही. खास बात यह है कि जनवरी और दिसंबर को छोड़ बाकी सभी महीनों में हीटवेव का असर महसूस किया गया. रिपोर्ट में भुवनेश्वर को लेकर सामने आए आंकड़ों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. जुलाई में, अगस्त में, सितंबर में और अक्टूबर में 25 दिन से ज्यादा का येलो अलर्ट जारी किया गया. वहीं अप्रैल में 10, मई में 17 और जून में 20 दिन ऑरेंज अलर्ट रहा था.

लोगों ने जताई चिंता

वहीं एक स्थानीय निवासी ने कहा कि अब तो फरवरी से ही पंखा-कूलर चलाना पड़ता है. मई-जून में हाल बेहाल हो जाता है. पेड़ कटने और जलाशय खत्म करने की वजह से शहर भट्टी बन गया है. वहीं एक महिला ने कहा कि गर्मी की वजह से छोटे बच्चों और बुजुर्गों की हालत खराब हो जाती है. पहले ऐसा नहीं था, अब तो बारिश भी समय पर नहीं होती.

क्या है एक्सर्प्ट की राय?

पर्यावरणविद् प्रो. रथींद्र नायक ने कहा कि यदि शहर में हरित आवरण नहीं बढ़ाया गया और जलाशयों को बचाया नहीं गया, तो आने वाले सालों में स्थिति और गंभीर हो जाएगी. यह केवल गर्मी की लहर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे जल संकट और बीमारियां भी बढ़ेंगी.

विशेषज्ञों का कहना है कि शहरीकरण से गर्मी और भी बढ़ी है. पहले 6 ऋतुएं महसूस होती थीं और अब केवल 3 बची हैं. साल के 12 महीनों में सिर्फ 1 महीने ही ठंड पड़ती है.

प्रशासन पर उठे सवाल

भुवनेश्वर में गर्मी की मार लगातार बढ़ती जा रही है. मौसम विभाग और सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले तीन दशकों में औसत तापमान 1 डिग्री तक बढ़ गया है. रात का तापमान भी अब पहले से ज्यादा रहने लगा है. गर्मी की लहर के दौरान शहर के अलग-अलग हिस्सों में 20 डिग्री तक का अंतर दर्ज किया गया. कहीं पारा 45 डिग्री पहुंचा, तो कहीं 34 डिग्री पर थमा.

लोगों का आरोप है कि प्रशासन निर्माण कार्यों को रोकने में नाकाम साबित हुआ है. शहर में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और जलाशयों का अतिक्रमण रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है.

साल के 232 दिन गर्मी का प्रकोप, क्या 2050 तक आग का गोला बन जाएगा भुवनेश्वर? डरा देगी ये रिपोर्ट

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