Nation- विदेश में हो गया था अपहरण… नाइजर में 8 महीने से बंधक बने झारखंड के 5 मजदूरों की हुई रिहाई, लौटे भारत- #NA

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के हस्तक्षेप के बाद दक्षिण अफ्रीका के नाइजर में बंधक बने झारखंड के पांच प्रवासी मजदूरों की सुरक्षित रिहाई हो गई है. राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष ने लगातार पांचों मजदूरों से फोन पर संपर्क रखा और उनकी स्थिति की जानकारी ली. मेडिकल जांच और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उन्हें हवाई मार्ग से झारखंड लाने की प्रक्रिया शुरू की गई. नाइजर में कैद श्रमिकों में फलजीत महतो, राजू महतो, संजय महतो, उत्तम महतो और चंद्रिका महतो शामिल थे. वर्तमान में ये सभी मुंबई में हैं, जहां उनकी अनिवार्य स्वास्थ्य जांच और सरकारी- कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं. उम्मीद है कि 14 जनवरी तक ये श्रमिक अपने गृह जिले गिरिडीह लौट जाएंगे.

इससे पहले अप्रैल 2025 में मुख्यमंत्री को गिरिडीह जिले के बगोदर थाना क्षेत्र के ग्राम दोन्दलो और मुंडरो से जुड़े पांच श्रमिकों के अपहरण की जानकारी मिली थी. मुख्यमंत्री ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष को तत्काल कार्रवाई करने और श्रमिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. ये श्रमिक कल्पतरु ट्रांसमिशन लाइन कंपनी में काम करने के लिए गए थे.

मजदूरों को बनाया गया था बंधक

राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष ने तुरंत कल्पतरु ट्रांसमिशन लाइन कंपनी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट एवं कंट्री हेड से संपर्क कर श्रमिकों की स्थिति का जायजा लिया. जानकारी मिली कि श्रमिक कंपनी साइट से लगभग 25-30 किलोमीटर दूर तेलाबारी क्षेत्र में कार्यरत थे और यह अपहरण घटना एक मिलिट्री ऑपरेशन से संबंधित थी, जिसमें कुल 26 स्थानीय नागरिकों और 12 अन्य देशों के श्रमिक भी बंधक बनाए गए थे. कंपनी प्रबंधन, स्थानीय सरकार, भारतीय राजदूत और भारतीय दूतावास ने मिलकर समन्वय कर मामले को सुलझाया.

अपहरण की घटना 25 अप्रैल 2025 को हुई थी

इस घटना की पुष्टि करने के बाद, प्रोटेक्ट ऑफ इमिग्रेंट्स, रांची, भारतीय दूतावास नियामी और विदेश मंत्रालय को तुरंत सूचित किया गया. सभी श्रमिकों की सुरक्षित रिहाई और स्वदेश वापसी को प्राथमिकता दी गई. अपहरण की घटना 25 अप्रैल 2025 को हुई थी, जब कुछ हथियारबंद व्यक्तियों ने श्रमिकों का अपहरण किया था. इस बीच उनके परिजनों में गहरी चिंता बनी रही.

मुख्यमंत्री के निर्देश पर गिरिडीह जिला प्रशासन ने श्रमिकों के आश्रितों को विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से लाभान्वित किया. इसमें लेबर कार्ड, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड, उज्ज्वला योजना, आवास योजना, मनरेगा जॉब कार्ड, नल-जल योजना, पेंशन योजना, ई-श्रम पंजीकरण और अन्य कल्याणकारी योजनाएं शामिल हैं.

इससे पहले वर्ष 2025 में मुख्यमंत्री के प्रयास से दक्षिण अफ्रीका के कैमरून में फंसे झारखंड के 47 श्रमिकों की सुरक्षित वापसी भी कराई गई थी. झारखंड सरकार लगातार अपने प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनकी सकुशल वापसी के लिए तत्पर है.

विदेश में हो गया था अपहरण… नाइजर में 8 महीने से बंधक बने झारखंड के 5 मजदूरों की हुई रिहाई, लौटे भारत

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