Nation- Bihar Elections 2025: बिहार के करगहर से ही चुनाव क्यों लड़ना चाहते हैं प्रशांत किशोर?- #NA

प्रशांत किशोर ने खोज ली सेफ सीट (Photo- PTI)
जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने सासाराम के करगहर विधानसभा से चुनाव लड़ने का सीधा संकेत दिया है. अब तक राघोपुर (तेजस्वी यादव के विधानसभ) से लड़ने की बात करने वाले पीके जन्मभूमि के सहारे करगहर में लैंड करना चाहते हैं. सवर्ण बहुल करगहर विधानसभा का गठन 2008 के परिसीमन में किया गया था. पीके के लिए करगहर को सेफ सीट माना जा रहा है.
बिहार की 243 विधानसभा सीटों पर नवंबर 2025 में चुनाव प्रस्तावित है. पीके की जनसुराज 243 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने पीके खुद भी चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं.
करगहर पीके के लिए सेफ क्यों?
1. चुनाव आयोग 2024 के आंकड़े के मुताबिक करगहर विधानसभा में करीब 3 लाख 30 हजार वोटर्स हैं. chanakyya के मुताबिक करगहर सीट पर 30 हजार ब्राह्मण, 15 हजार राजपूत और 10 हजार से ज्यादा भूमिहार ब्राह्मण हैं. यह कुल वोटों का करीब-करीब 20 फीसद है.
करगहर में इसके अलावा कुर्मी-कोइरी और रविदास जातियों का दबदबा है. तीनों जातियों के करीब 30 प्रतिशत वोट यहां पर हैं. रविदास को छोड़कर बाकी दलित भी यहां 10 प्रतिशत से ज्यादा हैं. करीब 7 प्रतिशत वोटर्स यहां पर अल्पसंख्यक समुदाय के हैं.
प्रशांत किशोर ब्राह्मण समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. वर्तमान में जो कांग्रेस के विधायक हैं, वो भी ब्राह्मण समुदाय से ही हैं. 2015 में इस सीट से वशिष्ठ सिंह ने जीत दर्ज की थी. पीके सवर्ण, दलित और मुसलमान समीकरणों के सहारे इस किले को कांग्रेस से छिनने की कोशिश में हैं.
2. करगहर सीट पर पिछली बार कांग्रेस के संतोष मिश्रा ने 5 हजार वोटों से जीत हासिल की, लेकिन हालिया लोकसभा चुनाव में करगहर में कांग्रेस पिछड़ गई. वो भी तब, जब सासाराम लोकसभा सीट पर उसे जीत मिली. विधानसभा चुनाव में यहां से उतरकर पीके कांग्रेस के खिलाफ गुस्से को भुनाना चाहते हैं.
वहीं सासाराम के किले को फिर से दुरुस्त करने के लिए कांग्रेस भी पुरजोर कोशिश कर रही है. हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने वोट बचाओ यात्रा की शुरुआत सासाराम से ही की थी. सासाराम एक वक्त में कांग्रेस का गढ़ रहा है.
3. बिहार में सवर्ण समुदाय को भारतीय जनता पार्टी का कोर वोटर्स माना जाता है. लोकनीति के मुताबिक 2020 के चुनाव में 58 प्रतिशत सवर्ण वोटरों ने एनडीए के पक्ष में वोट किया. 64 सवर्ण समुदाय के विधायक पिछली बार चुनकर सदन पहुंचे. इनमें से 23 बीजेपी के थे.
दिलचस्प बात है कि सवर्ण बहुल करगहर में बीजेपी उम्मीदवार नहीं उतारती है. यह सीट जनता दल यूनाइटेड की है. पिछले चुनाव जेडीयू उम्मीदवार यहां से दूसरे नंबर पर रहे थे. इस बार भी यह सीट जेडीयू के खाते में ही जाएगी. पीके की पार्टी इसलिए भी इसे सेफ सीट मान रही है.
राघोपुर में रिस्क ज्यादा है
राघोपुर में जातीय समीकरण के अलावा पीके के लिए एक बड़ा रिस्क बीजेपी के लिए काम करने का ठप्पा लगना है. राघोपुर विधानसभा सीट से आरजेडी के तेजस्वी यादव विधायक हैं. पीके इस सीट से अगर चुनाव लड़ते हैं तो आरजेडी और महागठबंधन के लोग यह सीधा तर्क देंगे कि प्रशांत किशोर बीजेपी को छोड़कर विपक्ष से लड़ रहे हैं.
वर्तमान में बीजेपी गठबंधन की बिहार में सरकार है. सम्राट चौधरी बीजेपी के नेता हैं, जो खगरिया के परबता सीट से चुनाव लड़ सकते हैं. राघोपुर से लड़ने पर पीके पर बीजेपी या जेडीयू के बड़े नेताओं के खिलाफ भी चुनाव लड़ने का दबाव बढ़ेगा. पीके इस तरह की कोई भी परिस्थिति नहीं बनने देना चाहते हैं, जिसका नुकसान पूरे बिहार में जनसुराज को हो.
पीके सबको चुनाव लड़ाना चाहते हैं
243 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके प्रशांत किशोर सभी बड़े नेताओं को चुनाव लड़वाना चाहते हैं. जनसुराज की टीम पर्दे के पीछे बड़े नेताओं की सीट की मैपिंग कर रही है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस बार राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह से लेकर प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती तक को चुनाव लड़वाने की तैयारी है.
पीके की टीम 40 ऐसी सीटों की मैपिंग कर रही है, जहां किसी भी सूरत में पार्टी को जीतनी ही जीतनी है. हालांकि, मीडिया को दिए कई इंटरव्यू में प्रशांत किशोर रिकॉर्ड जीत का दावा करते हैं.
Bihar Elections 2025: बिहार के करगहर से ही चुनाव क्यों लड़ना चाहते हैं प्रशांत किशोर?
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