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महाराष्ट्र में 9 साल से पुरानी कैब नहीं चलेगी, यूनियनों ने जताई नाराजगी, जानें नियम

महाराष्ट्र मोटर वाहन एग्रीगेटर नियम 2025.

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में ओला, उबर, रैपिडो जैसी एग्रीगेटर कंपनियों के संचालन में अनुशासन और पारदर्शिता लाने के लिए महाराष्ट्र मोटर वाहन एग्रीगेटर नियम 2025 (Maharashtra Motor Vehicle Aggregator Rules 2025) का ड्राफ्ट जारी किया है. इन नए नियमों में वाहन की आयु सीमा से लेकर ड्राइवरों की ट्रेनिंग और बैकग्राउंड चेक तक कई कड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं.

पूरे महाराष्ट्र में तकरीबन 3 लाख एग्रीगेटर कंपनियों में अपनी गाड़ी लगाकर अपनी आजीविका चलाने वाले कैब ड्राइवर्स हैं.इनमें तकरीबन 80 हजार कैब ड्राइवर्स मुम्बई में हैं. सरकार की ये नई पालिसी से सभी परेशान हैं, क्योंकि मुम्बई में चलने वाली काली पीली टेक्सी को 20 साल तक गाड़ी चलाने की अनुमति है जबकि एग्रीगेटर कंपनियों में गाड़ी चलाने वालों को सिर्फ 9 साल. इन कैब ड्राइवर्स की मांग है कि उन्हें 13 साल या 15 साल गाड़ी चलाने की अनुमति मिले.

9 साल से पुरानी कैब नहीं चलेगी, बसों के लिए सीमा 8 साल

ड्राफ्ट के अनुसार, कैब और ऑटो रिक्शा का रजिस्ट्रेशन होने के बाद वे अधिकतम 9 साल तक ही चल सकेंगे, जबकि बड़ी बसें रजिस्ट्रेशन के 8 साल बाद अमान्य मानी जाएंगी. सरकार का कहना है कि इस नियम का उद्देश्य सड़कों पर सुरक्षित, प्रदूषणमुक्त और तकनीकी रूप से बेहतर वाहन सुनिश्चित करना है.

हालांकि, इस फैसले से गिग और ड्राइवर एसोसिएशन में नाराजगी है. उनका तर्क है कि अधिकांश ड्राइवर लोन पर वाहन खरीदते हैं. यदि 9 साल की सीमा से पहले वाहन अनुपयोगी घोषित कर दिया गया, तो वे न तो कर्ज चुका पाएंगे, न नया वाहन खरीद सकेंगे.

गाड़ी मालिकों पर आर्थिक बोझ बढ़ाएगा यह फैसला

एग्रीगेटर ड्राफ्ट पालिसी के अनुसार हर ड्राइवर को 30 घंटे की ट्रेनिंग जरूरी है. ड्राफ्ट नियमों में यह भी कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति एग्रीगेटर कंपनी के लिए वाहन चलाने से पहले 30 घंटे की अनिवार्य ट्रेनिंग लेगा. यह ट्रेनिंग एग्रीगेटर कंपनियों की जिम्मेदारी होगी और इसे ऑनलाइन या ऑफलाइन, दोनों माध्यमों से आयोजित किया जा सकेगा.

ट्रेनिंग में निम्न विषय शामिल होंगे

  • ट्रैफिक नियमों की जानकारी
  • वाहन का रखरखाव और ईंधन बचत के उपाय
  • मार्गों की समझ
  • ड्राइवर-एग्रीगेटर अनुबंध की जानकारी
  • जेंडर सेंसिटिविटी और दिव्यांगजनों के प्रति संवेदनशीलता
  • राज्य सरकार द्वारा निर्धारित अन्य विषय
  • ट्रेनिंग पूरी होने के बाद ही ड्राइवर को ऐप पर सक्रिय किया जाएगा

विशेष ट्रेनिंग कैंप में भाग लेना अनिवार्य

यदि किसी ड्राइवर की रेटिंग 5 में से 2 से कम होती है, तो उसे विशेष ट्रेनिंग कैंप में भाग लेना अनिवार्य होगा. वहीं जब तक ट्रेनिंग पूरी नहीं होती, ड्राइवर को सवारी लेने की अनुमति नहीं होगी. इसी तरह, यदि किसी यात्री की ओर से शिकायत दर्ज होती है, तो एग्रीगेटर कंपनी को 3 दिनों के भीतर जांच करनी होगी. जांच पूरी होने तक संबंधित ड्राइवर को प्लेटफॉर्म पर काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

ड्राफ्ट में यह भी प्रावधान है कि एग्रीगेटर कंपनियों को हर ड्राइवर का बैकग्राउंड वेरिफिकेशन करना होगा. इसमें यह जांच की जाएगी कि पिछले तीन वर्षों में ड्राइवर किसी आपराधिक मामले, नशीली दवा या शराब पीकर वाहन चलाने के अपराध में दोषी तो नहीं पाया गया है. यदि किसी ड्राइवर के खिलाफ गंभीर मामला दर्ज पाया जाता है, तो उसे प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत नहीं किया जाएगा.

सरकार का उद्देश्य- सुरक्षा और पारदर्शिता

सरकार का कहना है कि यह नीति राज्य में एग्रीगेटर सेवाओं को अधिक पारदर्शी, जिम्मेदार और सुरक्षित बनाने के लिए बनाई गई है. इससे न केवल यात्रियों की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं और फर्जी ड्राइवरों की संख्या भी घटेगी. वहीं गिग ने कहा कि वे जल्द ही सरकार से इस ड्राफ्ट में संशोधन की मांग करेंगे.

ड्राइवर समुदाय पर भारी पड़ेंगी शर्तें

हम एग्रीगेटर कंपनियों में पारदर्शिता के पक्ष में हैं, लेकिन 9 साल की सीमा और अतिरिक्त शर्तें ड्राइवर समुदाय पर भारी पड़ेंगी. सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए. महाराष्ट्र सरकार का यह नया ड्राफ्ट जहां सुरक्षा और पारदर्शिता को बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है, वहीं ड्राइवर समुदाय के लिए यह नया आर्थिक बोझ बन सकता है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि राज्य सरकार इस ड्राफ्ट में क्या संशोधन करती है और गिग एसोसिएशन की मांगों पर कितना ध्यान देती है.

महाराष्ट्र में 9 साल से पुरानी कैब नहीं चलेगी, यूनियनों ने जताई नाराजगी, जानें नियम

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