Nation- कैलिब्रेशन ट्रायल शुरू, सजावट का काम जारी… जेवर एयरपोर्ट को अब बस उड़ान की तारीख का इंतजार- #NA

जेवर एयरपोर्ट से जल्द ही विमान उड़ान भरेंगे.
उत्तर प्रदेश के जेवर में बन रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है. यह वह सपना है, जिसके पूरे होने का इंतजार न सिर्फ यूपी, बल्कि पूरा देश कर रहा है. यह न केवल देश का सबसे बड़ा हवाईअड्डा बनने जा रहा है बल्कि भविष्य में दिल्ली-एनसीआर ही नहीं, उत्तर भारत के हवाई यातायात का नया केंद्र भी बनने जा रहा है. लंबे समय से चल रही तैयारियों और निर्माण कार्यों के बीच अब तस्वीर साफ हो चुकी है. एयरपोर्ट का पहले चरण का काम लगभग पूरा हो चुका है और इसके उद्घाटन की औपचारिक घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से समय मिलते ही कर दी जाएगी.
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण में यहां से घरेलू उड़ानें शुरू होंगी और उसी दिन से एयर कार्गो संचालन भी शुरू कर दिया जाएगा. कुछ महीनों बाद, अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी इस हवाईअड्डे से संचालित होने लगेंगी. दूसरे शब्दों में कहें तो जेवर एयरपोर्ट अब केवल इंतजार की दहलीज पर खड़ा है.
एयरपोर्ट पर कैलिब्रेशन फ्लाइट के परीक्षण शुरू हो गए हैं. यह वह प्रक्रिया है जिसमें रनवे, लाइटिंग सिस्टम, नेविगेशन उपकरण और सुरक्षा व्यवस्था की तकनीकी जांच होती है. DGCA की टीम लगातार निगरानी कर रही है. परीक्षण सफल होते ही ट्रायल फ्लाइट उतरेगी और टेकऑफ करेगी. बस इसके बाद उद्घाटन की तारीख घोषित होने भर की देर है.
जर्मन तकनीक से तेजी से हुआ निर्माण
जेवर एयरपोर्ट का निर्माण स्विट्ज़रलैंड की ज्यूरिख इंटरनेशनल एयरपोर्ट कंपनी द्वारा किया जा रहा है. यह प्रोजेक्ट वर्ष 2023 से 2027 के बीच पूरा होना था, लेकिन कंपनी ने निर्धारित समय से पहले ही पहले चरण का कार्य लगभग पूरा कर दिया है. इस चरण पर करीब 4588 करोड़ रुपये की लागत आई है. निर्माण की गति और गुणवत्ता दोनों को लेकर राज्य सरकार और निवेशकों ने संतोष जताया है.
एयरपोर्ट की टर्मिनल बिल्डिंग, रनवे, एटीसी टावर, पार्किंग जोन, लैंडिंग सिस्टम और यात्री सुविधाओं वाले हिस्से लगभग तैयार हो चुके हैं. अब अंतिम चरण में एयरपोर्ट की सफाई, लैंडस्केपिंग, हॉल और वेटिंग एरिया की सौंदर्य सज्जा जैसे काम चल रहे हैं.
उड़ान संचालन शुरू होने में बस एक कदम की दूरी
एयरपोर्ट को उड़ान संचालन के लिए जरूरी मंजूरियों में से अधिकांश मिल चुकी हैं. गृह मंत्रालय से लेकर नागरिक उड्डयन मंत्रालय और DGCA तक सभी विभागों ने तकनीकी और सुरक्षा संबंधी अनुमति दे दी हैं. अब केवल एयरोड्रोम लाइसेंस का इंतजार है, जो किसी भी एयरपोर्ट को यात्रियों के लिए खोलने से पहले दिया जाता है. यह लाइसेंस मिलते ही विमान कंपनियां टिकट बुकिंग शुरू कर देंगी और उद्घाटन का कार्यक्रम घोषित कर दिया जाएगा. सूत्रों के मुताबिक, रोजाना 150 विमानों की उड़ान का लक्ष्य तय किया गया है. भविष्य में यात्रियों की संख्या बढ़ने पर इस क्षमता में और भी विस्तार किया जाएगा.
इंडिगो और अकासा से शुरुआत, आगे आएंगी कई कंपनियां
एयरपोर्ट संचालित करने वाली कंपनी यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड ने इंडिगो और अकासा एयर के साथ करार कर लिया है. दिसंबर तक स्पाइसजेट, एयर इंडिया और कुछ अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों से भी समझौते की तैयारी है. इसका अर्थ है कि यात्रियों को नई उड़ानों, नए मार्गों और नए विकल्पों का लाभ मिलेगा. दिल्ली से हवाई सफर का दबाव कम होगा और यात्रियों को लंबी कतारों व ट्रैफिक की परेशानी से छुटकारा मिलेगा.
पूरी तरह डिजिटल और स्मार्ट एयरपोर्ट
जेवर एयरपोर्ट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे पूरी तरह डिजिटल मॉडल पर तैयार किया जा रहा है. यहां ड्यूल फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क लगाया गया है, जिससे डाटा कनेक्टिविटी तेज और सुरक्षित रहेगी. एयरपोर्ट में दो बड़े डेटा सेंटर बनाए गए हैं, जो संचालन को बिना रुकावट जारी रखेंगे. सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए हर इन और आउट गेट पर हाई-रेजोल्यूशन कैमरे लगाए गए हैं, जो नंबर प्लेट से लेकर चेहरे तक को पहचानने में सक्षम हैं. टर्मिनल के अंदर बैगेज, बोर्डिंग और कस्टमर सर्विस तक सब कुछ डिजिटल सिस्टम से नियंत्रित होगा. यात्री अनुभव को इतना सरल बनाया जा रहा है कि चेक-इन से बोर्डिंग तक का समय न्यूनतम हो.
संचालन के लिए तीन बड़े कंट्रोल सेंटर
एयरपोर्ट में तीन मुख्य नियंत्रण केंद्र बनाए जा रहे हैं. एयरपोर्ट ऑपरेशन सेंटर, सुरक्षा नियंत्रण केंद्र और आपातकालीन संचालन केंद्र. ये तीनों ही केंद्र मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि टेकऑफ से लेकर लैंडिंग, सुरक्षा से लेकर यात्री सुविधाएं, और आपात स्थितियों से लेकर ट्रैफिक मॉनिटरिंग सब कुछ एक ही स्थान से नियंत्रित हो.
कार्गो और व्यापार के लिए बड़ा केंद्र
जेवर एयरपोर्ट को भारत का भविष्य का कार्गो हब माना जा रहा है. पहले चरण में ही 7.5 लाख टन माल की ढुलाई की सुविधा तैयार है. आने वाले वर्षों में इसकी क्षमता बढ़कर 20 लाख टन सालाना तक पहुंचाने का अनुमान है. इससे न सिर्फ यूपी बल्कि उत्तर भारत के औद्योगिक क्षेत्र, विशेषकर नोएडा, ग्रेटर नोएडा, बुलंदशहर, आगरा, मथुरा, अलीगढ़ और NCR के अन्य इलाकों में व्यापार को तेज गति मिलेगी. यह क्षेत्र इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्युटिकल, टेक्सटाइल और एक्सपोर्ट इंडस्ट्री के लिए गेम-चेंजर साबित होगा.
कैलिब्रेशन ट्रायल शुरू, सजावट का काम जारी… जेवर एयरपोर्ट को अब बस उड़ान की तारीख का इंतजार
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