Nation- जड़ों से जुड़कर शासन की नई इबारत… देहरादून में ‘आदि कर्मयोगी अभियान’ की तीसरी क्षेत्रीय प्रक्रिया प्रयोगशाला की शुरुआत- #NA

देहरादून में आदि कर्मयोगी अभियान के तहत क्षेत्रीय प्रक्रिया प्रयोगशाला का शुभारंभ
मोदी सरकार के विजन और लक्ष्य ‘विकसित भारत@2047’ की दिशा में जनजातीय कार्य मंत्रालय की कोशिशें लगातार जारी हैं. इसी कड़ी में मंत्रालय ने उत्तराखंड के देहरादून में ‘आदि कर्मयोगी अभियान’ के तहत तीसरी क्षेत्रीय प्रक्रिया प्रयोगशाला (Regional Process Lab ‘RPL’) की शुरुआत की. आरपीएल का मकसद देश के 20 लाख आदिवासी जमीनी कार्यकर्ताओं और ग्राम स्तर के नेताओं का ऐसा कैडर तैयार करना, जो आदिवासी समुदाय तक अंतिम छोर तक सरकार की योजनाओं और सेवाओं को पहुंचा सके.
इस कड़ी में देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश से आए एसएमटी (स्टेट मास्टर ट्रेनर्स) को ट्रेनिंग दी गई. मंत्रालय का मानना है कि यह केंद्र एसएमटी के लिए क्षमता निर्माण का केंद्र बनेगा और आगे चलकर डीएमटी (जिला स्तर के मास्टर ट्रेनर्स) को ट्रेनिंग देंगे.जनजातीय कार्य मंत्रालय का कहना है कि ‘आदि कर्मयोगी’ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि जमीनी स्तर से शासन की पुनर्कल्पना का मिशन है. यह मिशन ‘पीएम-जनमन’ और ‘दजगुआ’ जैसी योजनाओं से जुड़ा हुआ है और अभिसरण, समुदाय और क्षमता पर आधारित है.
आदिवासी दृष्टिकोण और स्थानीय समाधान
मंत्रालय के सचिव विभु नायर इस कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े. उन्होंने इसे जनजातीय शासन के परिदृश्य को पुनर्परिभाषित करने का ऐतिहासिक मौका करार दिया. उन्होंने एसएमटी को परिवर्तन के अग्रदूत करार दिया और आह्वान किया कि ये समुदाय के लिए काम करते हुए अंतिम छोर तक शासन की पहुंच सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी लें. उन्होंने कहा कि नीतियां समुदाय की जमीनी जरूरतों और अनुभवों के हिसाब से होनी चाहिए.
इस कार्यक्रम में उत्तराखंड सरकार की ओर से समाज कल्याण विभाग के सचिव डॉ. श्रीधर बाबू अद्दांकी ने हिस्सा लिया. उन्होंने इस अभियान को राज्य में जनजातीय विकास को नया आकार देने वाला प्रयास करार दिया. उन्होंने सांस्कृतिक रूप से जरूरी और स्थानीय जरूरतों पर आधारित कार्यक्रमों की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि राज्य एसएमटी और डीएमटी की ट्रेनिंग के लिए संस्थागत समर्थन देगा. साथ ही इस प्रक्रिया में पॉपुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल को नागरिक समाज संगठन के तौर पर जोड़ा जाएगा.
क्या बोले प्रसन्ना रामास्वामी?
जम्मू-कश्मीर के जनजातीय कल्याण विभाग के सचिव प्रसन्ना रामास्वामी जी. ने कहा, ‘आदि कर्मयोगी’ एक मजबूत कैडर आधारित क्षमता निर्माण मॉडल है, जो कि अंतिम छोर तक पहुंच की कमी को पूरा करने में मदद करेगा. ये समुदाय-आधारित शासन व्यवस्था की नई संस्कृति है. इस कार्यक्रम में जनजातीय कार्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, उप महानिदेशक अंशु सिंह और उप सचिव गणेश नागराजन भी मौजूद रहे.
देहरादून की यह लैब देश में बनने वाले क्षमता निर्माण सेंटर की श्रृंखला का तीसरा केंद्र है. यहां से ट्रेन्ड एसएमटी अपने-अपने राज्यों में क्षेत्रीय प्रयोगशालाएं चलाएंगे. ये लैब जिला स्तर के मास्टर ट्रेनर्स को ट्रेनिंग देंगी. इसमें नागरिक समाज संगठनों की भूमिका तय की गई है. इसका मकसद है कि प्रशिक्षण स्थानीय संदर्भों के तहत हो और सहभागी शिक्षण को बढ़ावा मिले.
‘आदि कर्मयोगी अभियान’ का मकसद
‘आदि कर्मयोगी अभियान’ आदिवासी समुदाय के सशक्तिकरण की दिशा में ठोस कदम है. मंत्रालय का मानना है कि इससे शासन को जमीनी स्तर पर ज्यादा उत्तरदायी, समावेशी और प्रभावशाली बनाने में मदद मिलेगी. यह महज आदिवासी समुदायों को नहीं बल्कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को भी गहराई से प्रभावित करेगा.
आदि कर्मयोगी अभियान की खास बातें-
- निचले स्तर से ऊपर की ओर दृष्टिकोण
- वास्तविक समय में शिकायत निवारण
- सहयोगात्मक कार्यान्वयन
यह प्रमुख मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वय पर आधारित है, जिनमें शामिल हैं:
- जनजातीय मामले
- ग्रामीण विकास
- महिला एवं बाल विकास
- जल शक्ति
- स्कूली शिक्षा
- पर्यावरण एवं वन
जड़ों से जुड़कर शासन की नई इबारत… देहरादून में ‘आदि कर्मयोगी अभियान’ की तीसरी क्षेत्रीय प्रक्रिया प्रयोगशाला की शुरुआत
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